परिषद गुमराह कर रही जनता को भरवा रही लाखो रुपये,ओर जनता की जान से भी हो रहा खिलवाड़

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पिछले 5 वर्षों से नगर विकास के लिए गठित नगर परिषद के द्वारा लगातार जनविरोधी ओर नगरविरोधी कामकाज किए जा रहे हैं ।और इन जन विरोधी काम काजो को लेकर जहां आज तक आम जनता दबीजुबान बातें करती थी और समय-समय पर सक्षम अधिकारियों के समक्ष आपत्ति भी प्रस्तुत करती थी और इन आधारों पर लगातार मीडिया में खबरें प्रकाशित होती रही है।

*पार्षद हुई मुखर आई जनहित खुलकर सामने*
लेकिन अब नगर परिषद के कामकाज को लेकर खुद नगर परिषद के निर्वाचित पार्षदों के द्वारा भी आपत्ति ली जा रही है वहीं ऐसी परिस्थितियां निर्मित हो रही है जिसमें खुद पार्षदों के द्वारा नगर पंचायत में किए जा रहे काम का जो को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे है।ओर पार्षद के द्वरा नगर परिषद में नियम विरुध्द तरीके से किये जा रहे कामकाज को लेकर खुलकर आपति दर्ज करवाई जा रही है।

*लगाई आपत्ती*

उल्लेखनीय है कि 20 जून सोमवार को नगर परिषद में सुबह 10:30 बजे नगर परिषद के द्वारा नगर के विभिन्न छतों की लिज संपादित की जा रही है उसके संबंध में एक बैठक का आयोजन रखा गया था जिसमें सभी पार्षदों को इस बैठक में उपस्थित होने के लिए पूर्व से पत्र जारी किया गया था । इस बैठक में नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 6 की पार्षद श्रीमती मंगला शंकरलाल राठौड़ के द्वारा कोरम और पार्षदों तथा सीएमओ और अध्यक्ष की उपस्थिति में लिखित में अपनी एक विस्तृत आपत्ति दर्ज करवाई गई है। आपत्ति को यदि ध्यान से पढ़ा जाए तो इस बात का खुलासा हो रहा है कि नगर परिषद के द्वरा जो अब तक नगर की विभिन्न छतों की लीज प्रक्रिया की गई है वो नियम विरुद्ध है।

*ये है आपत्ति के बिंदू*
सबसे पहले यहां हम आपको जो आपति लिखी गयी है उसको मूलतः साझा कर रहे है…

श्रीमान मुख्य नगर परिषद अधिकारी महोदय, पेटलावद

*विषय :- नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 01 श्रंद्धाजली चौक में स्थित दुकानों कि छत, वार्ड क्रमांक 06 में नगर पंचायत कॉम्पलेक्स कि छत, वार्ड क्रमांक 05 में शोचालय के उपर की छत, वार्ड क्रमांक 11 में मुरार पेंटर के निकट शोचालय की उपर की छत कि लिज प्रक्रिया के संबंध में नगरिय प्रशासन विभाग से प्रशासकिय स्वीकृती / अनुमति नहीं लियें जाने से एवं छतो की वर्तमान स्थिती एवं नविन निर्माण कियें जाने के अनुकुल होने की तकनिकि रूप से इंजिनियर कि रिपोर्ट नहीं लियें जाने से उक्त छतो की लिज एवं आवंटन की प्रक्रिया को स्थगीत या निरस्त कियें जाने बाबत*

1. यह कि नगर परिषद पेटलावद के द्वारा नगर के विभिन्न वार्डा में यथा वार्ड क्रमांक 01 श्रंद्धाजली चौक में बनी हुई 10 दुकानों के उपर की छत, वार्ड क्रमांक 05 में रूपगढ़ रोड़ पर बने हुए शोचालय के उपर की छत, वार्ड क्रमांक 06 में गांधी चौक के मुरार पेंटर के पास कि बनी हुई दुकान की छत व वार्ड क्रमांक 06 में नगर पंचायत काम्पलेक्स की छत को निलामी एवं लिज देने की प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव बनाकर ई-टेंडर आमंत्रित कियें गयें है।

2. यह कि उक्त छतो की लिज प्रक्रिया देने के संबंध में नगर परिषद के द्वारा समस्त पार्षदों कि उपस्थिती में प्रस्ताव पारीत किया था जिसकी नगरीय प्रशासन से आपके द्वारा कोई सर्वानुमति या सहमती नही ंली गई है जिसका विवरण आपके पत्र क्रमांक 797/दिनांक 17/05/2022 के माध्यम से मुझे अवगत भी कराया गया था।

3. यह कि नगर परिषद के द्वारा इन छतो को लिज देने से नगर परिषद को वित्तिय हानि होने की प्रबल संभावना है क्योंकि आपके द्वारा जो लिज दी गई है वह सालाना लिज की लागत केवल 4 हजार रूपयें प्रतिवर्ष रखी गई है, यदि इन छतो पर अलग-अलग दुकानें बनाकर प्रत्येक दुकान से कर या किराया वसुला जाता तो उससे नगर परिषद की आय लगभग 10 गुना से अधिक होती जिससे नगर परिषद को अधिक राजस्व की प्राप्ती होती जो नगर के विकास कार्या में खर्च करने के लिए अनुकुल रहता किन्तु आपके द्वारा की गई प्रक्रिया से वर्तमान में नगर परिषद को वित्तिय हानि हो रहीं है।

4. यह कि इसके अतिरिक्त वार्ड क्रमांक 01 श्रंद्धाजली चौक पर पूर्व में बनी हुई दुकानों के उपर विश्रामालय बनाकर स्वं. नानालाजी भंडारी के द्वारा नगर परिषद को संचालन एवं देखरेख हेतू सुपुर्द किया गया था किन्तु नगर परिषद पेटलावद की देखरेख के अभाव में उक्त विश्रामालय क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे तोडकर या पूर्न निर्माण किया जाना चाहिए था जिसके स्थान उक्त छतो पर दुकान आंवटन की लिज प्रक्रिया संपादन कि जा रहीं है जो विधि अनुकुल और नगर की जनता व दान दाता कि भावनाओं के विपरित है, इसलिए पूनः विश्रामालय इसी स्थान पर बनाकर गरीब एवं आमजन के लिए सुविधा प्रदान की जावें, जो कि वर्तमान में म.प्र. शासन के निर्देशों एवं मंशा के अनुरूप है।

5. यह कि इसके अतिरिक्त इन छतो की वर्तमान स्थिति और इन छतो पर भविष्य में होने वाले निर्माण से कोई जनहानि होने के संबंध में या छतो की नविन निर्माण के संबंध में अधिकृत प्रशासनिक इंजिनियर से तकनिकी प्रशासकिय रिपोर्ट या अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया है, ऐसी स्थिती में नगर परिषद के द्वारा जो बिना प्रशासकिय स्वीकृति और इंजिनियर से तकनिकी अनापत्ति रिपोर्ट प्राप्त कियें बगेर जो छतो को लिज पर देने एवं आवंटन करने की जो प्रक्रिया की जा रहीं है वह नगर पंचायत अधिनियम व नगरीय प्रशासन विभाग के दिशा निर्देशों एवं प्रावधानो तथा वरिष्ठ विभाग की सहमती के बगेर की गई प्रक्रिया होने से विधी संगत नहीं होने से उक्त छतो की लिज आवंटन प्रक्रिया को स्थगीत किया जावें अथवा पुरी प्रक्रिया प्रशासकिय स्वीकृति के अभाव में नियम अनुसार नहीं होने से निरस्त किया जाना आवश्यक है।

6. *यह कि उक्ताशय की आपत्ति प्रस्तुत कियें जाने का कारण श्रीमान के द्वारा पत्र क्रमांक 797/दिनांक 17/05/2022 को देते हुए यह विश्वास दिलाया था कि छतो कि निविदा प्रक्रिया में प्रशासकीय स्वीकृति और इंजिनियर का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया है, ऐसी स्थिती मेंं टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढाई जाएगी किन्तु इसके पश्चात श्रीमान के द्वारा समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशन के पश्चात विभिन्न दिनांको का ई-टेंडर आमंत्रित करते हुए छत की टेंडर प्रक्रिया ओपन करते हुए लिज प्रक्रिया को आगे बढाया जा रहा है जो कि नियम विरूद्ध होने से यह आपत्ति प्रस्तुत कि जा रहीं है।*

*वरिष्ठ विभाग से नही ली है स्वीकृति*

इस तरह से यदि इस आपत्ति को समझा जाए तो खुद पार्षद के द्वारा नगर परिषद में इस बात की आपत्ति ली जा रही है कि नगर परिषद के द्वारा अब तक जिन छतो की नीलामी ओर लीज प्रक्रिया संपादित की गई है उन छतो के संदर्भ में नगर पंचायत अधिनियम के प्रावधानों के तहत वरिष्ठ नगरीय प्रशासन विभाग से निर्माण या लीज संबंधी कोई भी स्वीकृति प्राप्त नहीं किगयी है।

*इंजीनियर से भी नहीं ली रिपोर्ट*

वहीं इन छतों की कैपेसिटी और निर्माण स्थिति के लिए अधिकृत इंजीनियर से भी कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र या तकनीकी प्रमाण पत्र जारी नहीं करवाया गया है।

*नगर परिषद ने भी किया स्वीकार नही ली है अनापत्ति*

पार्षद श्रीमती मंगला शंकर राठौड़ के द्वारा ली गई इस आपत्ति का मीडिया में आने के बाद हड़कंप मच गया है क्योंकि खुद नगर परिषद के द्वारा दिनांक 17-05- 2022 को एक पत्र जारी करते हुए यह स्वीकार किया है कि छतों की लीज प्रक्रिया के पूर्व किसी भी अधिकृत इंजीनियर से अनापत्ति प्रमाण पत्र या तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं की गई है।

*हो गयी पूरी प्रक्रिया अवेद्ध*

ऐसी स्थिति में विधि विशेषज्ञों और नगर परिषद के कामकाजो के जानकार व्यक्तियों का मानना है कि नगर परिषद के द्वारा किए जा रहे किसी भी कार्य के अनुमोदन या स्वीकृति वरिष्ठ नगरी प्रशासन विभाग से यदि नहीं ली जाती है तो नगर परिषद के द्वारा किए गए सारे कार्य नियम विरुद्ध एवं माने जा सकते हैं।

*घटना के लिये भी जिमेदार*

वही यदि छतों की केपेसिटी से अधिक और यदि इन छतों पर पुनः निर्माण होने या वजन ढोने की स्थिति नहीं होने पर यदि भविष्य में कोई घटना -दुर्घटना हो जाती है तो उसके संबंध में भी सीधे नगर परिषद और संबंधित व्यक्ति जिम्मेदार माना जा सकता है।

*ठहराव प्रस्ताव के नाम पर कर रही नगर की जनता को गुमराह*

इस तरह से इस रिपोर्ट और आपत्ति के बाद यह बात तो खुलकर सामने आ गई है कि नगर परिषद के द्वारा मात्र अपने ठहराव प्रस्ताव (जिसमे भी सभी के हस्ताक्षर या सहमति नही है)
को आधार बनाकर नगर के लोगों का लाखों रुपया इन छतों में लगवाया जा रहा है लेकिन भविष्य में यह सारी प्रक्रिया यदि विभाग से अनुमोदित हुए बिना हुई है तो अपने आप में नियम अनुसार गलत, अवेद्ध मानी जावेगी।

*नहीं करते कर सकते सब लीज भी*
वही इस संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि जिस व्यक्ति को छत की लीज दी जा रही है वह मात्र उस लीज की निश्चित समयावधि तक ही उपयोग उपभोग कर सकता है और लीज धारक किसी अन्य व्यक्ति ओर संस्था को भी सब लीज नहीं कर सकता यह भी नियमों के अंतर्गत आता है ।किंतु परिषद तो लीज धारक को मालिक बनाने बैठी है जो नियम विरुद्ध भी है।
*महिला पार्षद ने खोल दी पोल हिम्मत की हो रही तारीफ*

इस तरह से पार्षद श्रीमती मंगला शंकर राठौड़ के द्वारा एक आपत्ति लगाकर नगर परिषद के द्वारा नगर की जनता को गुमराह जो नियम विरुद्ध काम किए जा रहे हैं उनकी सीधी पोल खोल दी है। महिला पार्षद श्रीमती मंगला शंकर राठौड़ के द्वारा दिखाई गई इस हिम्मत की पूरे नगर में प्रशंसा हो रही है ।
*अन्य माननीय भी सोचे नगरहित में*

वही दबी जुबान में नगरवासी यह भी कह्ते नजर आ रहैं है कि अन्य पार्षदों को भी श्रीमती मंगला शंकर राठौड़ से सीख लेना चाहिए क्योंकि उन सभी निर्वाचित पार्षदों की पहली जिम्मेदारी नगर हित और नगर की जनता ही है। और जनता की आवाज़ बैठकों में उठाना चाहियें।

*इनका है कहना

*छतों को लीज देने से पहले विभागीय अनुमोदन नही लिया वही इंजीयनयर की रिपोर्ट भी नही ली है जो नियम विरुद्ध है,इसीलिए मेने आपति दी है ।वार्डवासियों व नगरहित में आवाज उठाने के लिये ही जनता ने चुना है* ।

*मंगला शंकरलाल राठौर पार्षद वार्ड नं06*

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