कथा के पांचवे दिन राम जी के वनवास प्रसंग पर पूरे कथा पंडाल मैं भक्त भावुक हो गए सभी की आंखें नम हो गई।

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सुरेश परिहार सारंगी

खेड़ापति हनुमान जी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीराम कथा मैं पांचवे दिन पंडित श्री मयंक शर्मा ने रामायण के अयोध्या कांड का वर्णन किया पंडित जी ने बताया कि राजा दशरथ ने अपने दिए हुए वचन का पालन कर केकई को दो वर दिए जिसके कारण राम को 14 वर्षों का वनवास प्राप्त हुआ और भरत का राज्य अभिषेक राम पिता के वचन का पालन करते हुए 14 वर्षों के लिए वनवास को चल दिए माता सीता ने पति की सेवा के लिए राजभवन के सुख को त्याग दिया राम ने छोटे भाई लक्ष्मण ने भाई की सेवा के लिए राज भवन का त्याग कर वन को चल दिए माता कौशल्या ने अपने बेटे का , उर्मिला ने अपने पति का , भरत ने अपने राज सिंहासन का त्याग कर 14 वर्षों तक सन्यासी का जीवन जिया भगवान राम के वनवास चले जाने पर पूरी अयोध्या में मातम छा गया पशु पक्षी जानवरों ने भी अन्न जल त्याग दिया राम के वियोग में राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए
हर माता-पिता को अपने बच्चों को संस्कार वान बनाना चाहिए अपने बच्चों को प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने की आदत डालना चाहिए ताकि वह धर्म के साथ जुड़े रहे

राम जी के वनवास प्रसंग पर पूरे कथा पंडाल मैं भक्त भावुक हो गए सभी की आंखें नम हो गई

मनुष्य को भी जीवन में भजन कीर्तन सत्संग में भाग लेना चाहिए मनुष्य को अपने वचन पालन करने के लिए जो त्याग करना पड़े उससे करना चाहिए पंडित जी ने कथा पंडाल में उपस्थित नारी शक्ति को सबसे महान बताया क्योंकि नारी ही ममता करुणा एवं त्याग की देवी है कथा श्रवण करने के लिए नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से भी भक्त कथा पंडाल पर पहुंच कर कथा श्रवण कर रहे हैं।

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