महोत्सव के दूसरे दिन पुण्य सम्राट को याद कर भावुक हुए भक्त नगर में निकली भव्य शोभा यात्रा

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महोत्सव के दूसरे दिन
पुण्य सम्राट को याद कर भावुक हुए भक्त

नगर में निकली भव्य शोभा यात्रा

पारा। न्यूज़। पुण्य सम्राट को समता, सद्भावना और समर्पण बहुत पसंद था और अगर आप गुरुदेव के सच्चे भक्त हैं तो आप को भी यही सब गुण अपनाना चाहिए। गुरुदेव ने आचार्य बनने के पूर्व 47 वर्षो तक शासन की सेवा की थी और इसके बाद ही वे शासन सम्राट बने इसलिए युवाओं को भी निरंतर शासन सेवा करनी चाहिए , अगर किसी मे कोई खास गुण होगा तो अपने आप संघ उसे जिम्मेदारी दे देगा। उक्त प्रवचन मुनिराज निपुण रत्न विजय जी ने गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी की निश्रा में हुई पुण्य सम्राट की पांचवी वार्षिक पुण्य सप्तमी पर हुए महोत्सव रूपी आयोजन में कही। इसके पूर्व अल सुबह से ही नगर के श्रावक – श्राविका पुण्य सप्तमी पर्व को लेकर खासे उत्साहित दिखे। मुख्य मार्ग स्थित श्री आदिनाथ-शंखेश्वर-सीमंधर जिन मंदिर में चढ़ावे के साथ विभिन्न पूजन का लाभ लाभार्थी परिवारों द्वारा लिए गए। मूलनायक आदिनाथ भगवान, विश्व पूज्य दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी एवं पुण्य सम्राट की आरती भी लाभार्थी ने की। सुबह की नवकारसी का लाभ दिलीप कुमार, संजय कुमार कोठारी परिवार द्वारा लिया गया। सुबह करीब 10 बजे जिनालय से प्रारंभ होकर एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। वर्तमानाचार्य की निश्रा में निकली शोभायात्रा में पुण्य सम्राट की स्मृति में भक्ति गीतों पर युवा गुरुदेव को याद करते उत्साहित दिखाई दिए। वहीं दादा गुरुदेव और पुण्य सम्राट की प्रतिमा को लेकर चलने के लिए भी भक्तजनो में होड़ लगी थी। बेंड बाजो की धुन पर निकली शोभायात्रा में धर्म ध्वजा लेकर घोड़े पर बैठने का लाभ प्रदीप मेहता परिवार तथा प्रकाश छजेड परिवार ने लिया, रथ पर पुण्य सम्राट का चित्र लेकर चलने का लाभ सुभाष चन्द्र कांकरिया परिवार द्वारा लिया गया। मुख्य मार्गो से निकली शोभायात्रा में समाजजनों द्वारा पुण्य सम्राट के चित्र तथा वर्तमानाचार्य को गहुली कर अक्षत से बधाया गया। शोभायात्रा के पुनः मंदिर परिसर पहुंचने पर एक धर्मसभा का आयोजन किया गया। पुण्य सम्राट की प्रतिमा पर वासक्षेप पूजन करने का लाभ सज्जन लाल, ओच्छब लाल कटारिया परिवार राणापुर ने लिया वहीं गुरुदेव को माल्यार्पण करने का लाभ स्व सागरबाई वालचन्द्र कांकरिया की स्मृति में हेमेंद्र कांकरिया द्वारा लिया गया। इसके बाद नगर के तथा आसपास से शहरों से आये वक्ताओं ने पुण्य सम्राट का गुरु गुणानुवाद अपने शब्दों में किया। मंच पर विराजमान मुनिवर चारित्र रत्न विजयजी, प्रशम सेन विजयजी, निपुण रत्न विजय जी, प्रत्यक्ष रत्न विजय जी, पवित्र रत्न विजय जी तथा अध्यात्म रत्न विजय जी ने पुण्य सम्राट के संस्मरण सुनाते कहा कि दादा गुरुदेव श्रीमद राजेन्द्र सूरीश्वरजी मसा की पाट परम्परा के छठे आचार्य रहे पुण्य सम्राट जयंत सेन सूरीश्वर जी के जन्म से लेकर जीवन पर्यंत तक जितने भी किस्से कहें वो कम ही होंगे। आप सभी ने एक स्वर में यह संदेश भी दिया कि गुरुदेव ने हमे और खास कर पारावासियों को बहुत कुछ दिया ही दिया है अब उन्हें मात्र समर्पण ही दे और उनकी बातों को जीवन मे उतारें। साध्वी अमृतरसा श्री जी ने भी प्रवचन के माध्यम से गुरुदेव के जीवन पर प्रकाश डाला। अंत मे वर्तमान आचार्य ने सभी को एकसूत्र में रहने की बात कही। सुबह में हुई स्वामी भक्ति का लाभ प्रकाश तलेसरा परिवार ने लिया। वहीं दोपहर में भंवरलाल ,धनराजमल, गट्टूलाल व्होरा परिवार द्वारा जयंत सूरी महापूजन रखी गई। शाम को शांतिलाल पंवार परिवार की ओर से स्वामीवत्सल्य आयोजित किया गया। वहीं शाम को होने वाली पुण्य सम्राट की आरती की बोली प्रकाश तलेसरा परिवार द्वारा ली गई।
पुण्य सप्तमी पर दोपहर में सामूहिक आयम्बिल तप का आयोजन किया गया जिसमें 25 से अधिक श्रावक – श्राविकाओं ने तप किया।

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