कां भुगतोगे दरोगा साहब….! कप्तान का हिस्सा कां गिया

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गरीबो की हाय कहि घर परिवार वाले न भुगतें

ब्याज खोर के साथ मिलकर कर दिया खेल

भियां सभी को राम…. राम…. लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ….
 भियां बुरे कर्मो को बुराईज नतीजा होता है… और हमारे दरोगा साहब को अपने कुकर्मो का फल मिलनेईज वाला है… भियां दारोगा साहब गरीबों का खुन चुस चुस कर अपने अपने घर परिवार को आगे बढाने की सोच रिये हो तो ये भूलईज जाओ… सब निकलईज जायेगा…।
भियां आज मैं आपकु दारोगा साहब ने रानापुर में प्लाट कहा से खरिदा बिताउंगा… भियां बात है दुसरे लाॅक डाउन के बाद की… बेकल्दा के पास पांच पिपलिया का ब्याजखोर मास्टर जो मजलुद, गरीब तबके के लोगों को अपना षिकार बनाकर ब्याज पर रूपयें देने के नाम पर उनका खुन चुस करोडों रूपयें इकटठे कर लिए… इस ब्याजखोर मास्टर के एक महिला के साथ अवैध संबंध थे… इसी अवैध संबंधों को बरकरार रखने के लिए… ब्याजखोर मास्टर ने पेटलावद के वार्ड क्रमांक 6 में भियां एक मकान लेकर अपनी प्रियषी को रख रखा था… ब्याजखोर मास्टर की सारी करतुर उसी प्रियषी को मालुम थी…. और उसकी तिजोरी भी महिला के कमरे पर ही थी… जिसमें करोडों रूपयें भरे हुए थे… एक दिन ब्याजखोर मास्टर बाहर गया हुआ था… तो उसकी प्रियषी नियत में खोट आ गया और वो एक गाडी में तिजोरी भर कर झकनावदा में एक मकान में छिप गई… ये बात किसी को पता नही थी… पता थी तो बस गाडी के ड्राइवर को… जब ब्याजखोर मास्टर घर पहुंचा तो… न उसकी प्रियषी थी और न ही तिजोरी… चारों तरफ खोजबिन करने के बाद… ब्याजखोर ने अपने एक दोस्त को फोन किया… और अपनी प्रियषी की दांस्ता बताई… अब पुलिस के पास सीधे जा नही सकते थे… तो दोस्त ने तरकीब लगाई और पेटलावद के एक पार्षद के मार्फत गरीबों का खुन चुसने वाले दारोगा के पास गए… मगर दारोगा ने कप्तान का हवाला दिया और उन्हे नजर अंदाज कर दिया… नजर अंदाज भी इसलिए किया कि दारोगा को समझ आ गया था… मामला करोडों का है… और खेल बडा है… तो ब्याजखोर और उसका दोस्त तवज्जो नही मिलने पर रात को 11 बजे पेटलावद के एक पत्रकार के यहां पहुंच… उन्हे समझ आ गिया था कि अब मामला ऐसे ही सेट होगा… भियां पत्रकार मेरे सम्मानिय है… और मैं उनका बडा आदर करता हुं… इसलिए नाम नी बिताउंगा… तब दोनों ने मिल प्रत्रकार को सारी जानकारी दी… रात को 12 बजे के लगभग प्रत्रकार के साथ ब्याजखोर और उसका दोस्त दारोगा के पास पहुंच… और दारोगा को कन्वेस किया… दारोगा ने फिर कप्तान का हवाला दिया…. और छानबिन प्रारंभ कर दी… छानबिन में गाडी और उसके ड्राइवर का पता छल गया… ड्राइवर को जब ठोक बजाकर पुछा… तो ड्राइवर ने फलाना जगह पर ब्याजखोर की प्रियषी को छोडना बताया… रात 1 बजे के लगभग सभी साथ में झकनावदा गए… दारोगा अपने साथ एक सिपाही को ले गया… झकनावदा पहुंच महिला को दारोगा साहब ने खुब डराया चमकाया… तो महिला ने तिजोरी बिताई और तिजोरी से करोडों रूपये निकाल… 4 बडी थेलियां में नोटों के बंडल भरे… दो चार गडियां सिपाहियों ने रख ली… 4 मेसे एक थैली फिर दारोगा ने रख ली… जिसमें लाखों रूपये थे… और मामला 3 करोड के लगभग था… पत्रकार को 15 लाख की सौगात मिली… और सब वहां से निकल गिया… मगर दोस्त को कुछ नही मिला… तो दोस्त ने ब्याजखोर को कहा और ब्याजखोर ने भी पल्ला झाड लिया और कह दिया दरोगा साहब ने 1 थेली ली है… उसमें से लो… और दरोगा ने भी कप्तान का हवाला देकर पल्ला झाड लिया… अब दोस्त पत्रकार के पास पहुंचा वहां भी यही जवाब… जैसे तैसे कर जिसने पुरे मामले को सुलझाने में अहम भूमिका अदा की उसे मात्र 30 हजार देकर ठंडा कर दिया… और भियां उसी रूपयों से 60 लाख की जमीन नेनटिया बैरागी दलाल के मार्फत रानापुर ने जमीन खरीदी… नेनटिया के भी खुब काले कारनामें है… वो भी जल्द हम बितायेंगे… अब भियां आप जान गिये… होंगे दारोगा साहब ने रानापुर में जमीन कहा से खरीदी… ये बात तो पेटलावद में बच्चे बच्चे को मालुम है… बस बात ये समझ नी आ री की ये जो बार बार कप्तान का हवाला दे रिया था तो कप्तान के पास तो हिस्सा पहुंचाईज नी… ये बात तो कप्तान को मालुमईज नी है… मतलब कप्तान के नाम का हिस्सा भी गप कर लिया… ऐसे कप्तान के नाम पर दारोगा ने जोबट में भी जमीनें खरीदी है… और खिलौने घोटाले का खेल हम अगले अंक में बितायेगा… बस बुरा तो इस बात का है कप्तान तो बिना हिस्सा लिए ही बदनाम हो रिये है…। लेते तो क्या होता…
अब जा रिया… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं… भियां मामले तो भोत है… और आगे भी बिताउंगा… कमाओ… और ऐसे ब्याजखोरों को तो लुटनाईज छिये… पर गरीब… मजलुमों को छोड दो…दुआ लगेगी…. का भुगतोगे अपने पाप… तुमारे पापो का फल कही घर वालों को नी भुगतना पडे… सारे गरीबों के खुन चुसे पैसे निकल जायेगे… बाकि बाद में… अब जा रिया… जय राम जी की…।

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