राष्ट्रवाद को जीवित रखना हमारी नैतिकता(दंगाई के पीछे की ताकत समझने की जरूरत ):-शिशिर बड़कुल

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शिशिर बडकुल

अनेकता में एकता की मिसाल देते भारत में जब कुछ साम्प्रदायिकता भड़काने वाली गतिविधि होती हैं , तो निश्चित ही हर सच्चे भारतीय के ह्रदय में पीड़ा का उबार आना स्वाभाविक है। विगत कई दिनों से एवं कई अवसरों पर भारत के विभिन्न अंचलों में धर्म – पंथ के नाम पर साम्प्रदायिकता फैलाने की घटनाएं होती आ रही हैं। विचार करें तो यह घटनाएं सुनियोजित तरीके से तय समय अनुसार एक साथ कई स्थानों पर घटित होती हैं । हाल ही में रामनवमी के अवसर पर शोभायात्रा पर देश के चार राज्य मध्यप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और गुजरात में एक साथ पथराव और आगजनी की घटनाएं हुई । विचार करने की बात यह है कि एक साथ एक ही समय पर एक जैसी घटनाएं स्वतः तो हो नही सकती हैं । इन घटनाओ के पीछे छुपी ताकत को पहचानकर आमजन के सामने लाने की जिम्मेदारी हर एक भारतीय की बनती है । यह सिर्फ आज की घटना नही है, ऐसी घटनाएं देश के कई क्षेत्रों में लगातार कई समय से होती आ रही हैं और आज स्थिति सुधरी नही तो आगामी समय में पुनः ऐसी घटनाएं होंगी जो हमारे सौहाद्र पूर्ण वातावरण पर आघात करेगी ।
किसी समाज विशेष का बार बार ऐसी घटनाओं के मुख पृष्ठ पर होना अगर किसी ओर इशारा करता है तो इसमें गलती सोचने वालों की कतई नही है , यह गलती उसी विशेष समाज की और उनके पीछे छुपे तंत्र की है। हम 1830 में भारत आए लार्ड मैकाले की काली सोच की बात करें तो आज भी दुनिया भर में यही सोच विद्दमान है कि भारत को तोड़ना है तो भारत की वर्षों पुरानी संस्कृति पर आघात करना होगा । यही आज हो भी हो रहा है , इसी का परिणाम है कि देश की राजधानी की एक यूनिवर्सिटी में आजादी के नारे,अफजल जिंदाबाद के नारे लगाए जाते हैं । जहां बुरहान वानी जैसे आतंकवादियो की मौत को शहादत का नाम दिया जाता है, पढ़े लिखे लोगों की एक ऐसी समाज जो इतिहास को रौंदकर खुद को कल का भारत बताने में जुटी है । जहां इतिहास शून्य होने लगता है वहां का भविष्य सदैव ही काले अंधकार में खो जाता है।  देश के हर वर्ग हर स्तर के लोगों के मन मस्तिष्क से खेलने का काम अगर कोई कर रहा है तो ऐसी ताकतों को पहचानकर निकालना होगा। कौन हैं वो लोग जो न सिर्फ ऐसे लोगों को मानसिक सहायता करते हैं बल्कि आर्थिक सहायता से भी मजबूत करके देश को खोखला करने में भरसक प्रयास करते रहते हैं । पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में ऐसी घटनाओं का होना इसीलिए भी आदत बन चुकी है क्योंकि वहां की राज्य सरकारें खुद आदतन इन घटनाओं को बढ़ावा देती हैं । भाजपा की सरकार वाले राज्यों में ऐसी घटनाएं होती है तो सरकार तुरंत क्रिया पर कठोर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कड़े से कड़े कदम उठाती है।
समस्याओं का आना और उनका निवारण होना स्वाभाविक मानव स्वभाव के साथ चलता रहेगा । पर कष्ट तब होता है जब ऐसे लोग जो भारत मे रहकर भारत के ही खिलाफ आवाजों को हिम्मत देने का कार्य करते हैं। न सिर्फ उन्हें हिम्मत देते हैं बल्कि लगातार बयानों के माध्यम से यह बताते हैं कि डरने की जरूरत नही है मैं खुद पाकिस्तान की तरफ से तुम्हारे बीच तुम लोगो के साथ हूँ। यही संदेश मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह लगातार देते रहते हैं, हाल ही मे मध्यप्रदेश के खरगोन में हुई घटना के बाद अन्य स्थान की फोटो ट्वीट करके साम्प्रदायिकता भड़काने का कार्य किया।  और साथ ही दंगाईयों को स्पष्ट रूप से बढ़ावा दिया । यह पहली बार नही है जब दिग्विजय सिंह ने आतंकवाद को बढ़ावा देने का कार्य किया है, यह तो कांग्रेस के नेताओं और दिग्विजय सिंह के डीएनए में शामिल है । जो हिंदुस्तान में रहते हैं और हिंदू परिवारों को भगवा आतंकवाद का नाम देते हैं और वहीं दूसरी ओर आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को जी लगाकर संबोधित करते हैं । लोकतंत्र में जनतंत्र सत्ता परिवर्तन कराता है, विकास और सरकार के कार्यों में मतभेद हो सकते हैं। पर संस्कृति की रक्षा और राष्ट्रवाद की अलख जगाए रखने में तो निश्चित ही हमें एक होना चाहिए । परिवार की द्वंद जब बाहर आता है तो जलती आग में हर कोई हाथ सेंकने आ जाता है। पर यह बात दिग्विजय सिंह जैसी मानसिकता वालों को अगर समझ नही आती है तो हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है समझाने की और साथ ही हर उस व्यक्ति की आवाज बनने की जो हिंदुत्व की बात करता है , राष्ट्र की बात करता है। आज अगर हम सब एक हो जाएंगे तो दुनिया की कोई ताकत भारत की तरफ बुरी नजर से देख तक नही सकती है । आज महती आवश्यकता है कि राष्ट्रवाद को जीवित रखना हमारी नैतिकता है साथ ही जरूरी है कि हम हर दंगाई के पीछे छुपी ताकत  को समझ कर समाज के सामने उन्हें लेकर आएं।

(लेखक भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के सोशल मीडिया सह प्रभारी है)

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