जननी के नाम पर पेटलावद के दो ठेकेदारों ने.आदिवासी बच्चों का हक छिना… कांग्रेस मौन, युवा नेता ने करवाई बैठक…. आदिवासी समाज के नाम पर ठेकेदारी करने वाले मौन क्यों?

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      सभी को मेरा नमस्कार… लो भियां मै फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ…. भियां समूह बनाने वाले विभाग ने… सकूल डरेस अभी भी कई शिक्षा के मंदिरों में नी बांटी… भियां ये घोटाले के बारे में पेले भी बिता चुका हुं… कि इसका मास्टर माईड अमित है… जिसने अपने आका विशाल की सहमती पर भियां… पूरा खेल किया है…।
    भियां आज मैं छुटटी मनाता हुं… इसलिए ज्यादा कुछ नी कुंगा… बस जो मैं पेले बोल के गिया था… वो सब बिताउंगा…. पेले लेते है अमित को…. भियां सकूल डरेस घोटाले के मास्टरमाइंड  अमित…. ने अपनी मां की मृत्यु के बाद… दुसरी मां की जात लगाकर… फर्जी कागज बनाए और नौकरी हासिल की….। जबकि इस नौकरी का ये पात्र ही नहीं था …..  भियां काॅलेज के समय से ये नेतागिरी कर रिया था… इसलिए इस करोडों के सकूल डरेस घोटाले विपक्ष के नेताओं से जोर लगा दिया… भियां गांधीछाप देखते ही दोनों राजनैतिक पार्टियों के नेता नतमस्क हो गिये और सारे नियम कायदे तांक में रख… इस घोटाले को कर डाला। भिंया और भी कुछ है… जल्द ही अमित की किटी पार्टी के बारे में भी बिताऊंगा। … क्या होता है इसमें …….
     भियां नियमों की धज्जियां उठा पेटलावद के दो ठेकेदार जिन्होंने  जननी (संघ) के नाम को बदनाम करते हुए सकूल डरेस का घोटाला किया… भियां जननी के बेटे ऐसे नी होते है… पेली बार ऐसा देखा की जननी के बेटे जननी के ही नाम पर सकूल डरेस का ठेका लेकर इतना बडा घोटाला करेंगे…. मैने देखें है जननी (संघ) के बेटे जो अपना सब कुछ मातृभूमि पर न्यौछावर करते है… लेकिन भियां जब से फूलछाप   सरकार आई थी…तब ये पेटलावद के करबेठा और काणोदिया… जननी(संघ) के नाम पर ऐसे घोटाले करते आये है… जिन्होने जांच के लिए जो सकूल डरेस का सेम्पल  प्रस्तुत किया था… उसकी बजाया… घटिया से घटिया सकूल डरेस लाकर  कुछ जगह दे डाली… जिसको एक बार धोव…. दुसरी बार पेनने लायक नी री… कुछ होता भी यही तो ये जननी के नाम पर ;क फिर अपने प्रदेश स्टार पर बैठे जननी के दूसरे बेटों से दबाव बनवाते है…… पेली बार  ऐसे बेटे देखे जिन्होने जननी की इज्जत सडकों पर उतार दी….।
      भियां इस मामले की मेघनगर में प्रभारी मंत्री को भी शिकायत की… क्षेत्र के कददावर नेता को भी… मामला उठा… जांच के आदेश हुए… और फिर अचानक से कांग्रेस ने मौन धारण कर लिया। तब इस मामले की तह तक गिया… तो दाल में काला नी था… पुरी दाल काली थी…
       अब बात करते है आदिवासी समाज के ठेकेदारों की…. जो इस घोटाले को लेकर चुप है… ऐसे तो भोत केते है… आदिवासियों के साथ ये हो रिया है… वो हो रिया है… आदिवासियों के साथ छलावा किया जा रिया है… ये केने वाले आज कां गायब हो गिया… जबकि भियां ये करोडों की सकूल डरेस आदिवासी बच्चों को ही मिलनी थी…. तो ये क्या आदिवासी बच्चों के साथ छलावा नही है…।
   अब जा रिया… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दु… भियां काग्रेस के नेता भी कुछ कम नी है… थांदला के एक युवा नेता… जो आने वाले समय में नगर पालिका अध्यक्ष के सपने संजोये बैठा है… उसने भी इस मामले को कांग्रेस स्तर पर सेटल किया है… सब की बैठक करवाई और… ये घोटाला हो गिया… उसके बारे में बाद में बिताउगा… अब जा रिया… जय रामजी की।
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