बदलते बदलते बच गिये भाजपा जिलाध्यक्ष….. आखिर क्यों बनने नी मांग रिया संतोष …. चुनाव के बाद इन 8 में से या कोई ओर होगा जिलाध्यक्ष

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सभी को राम… राम… लो भियां मैं फिर आ गिया… कुछ कही-अनकही के साथ… भियां  आठ दस दिन पेले की बात बिता रिया हुं… घर से बीबी का फोन आ गिया… चाय पीने आ जाओ… तो मैने मोटरसाईकिल उठाई और जाने लग गिया घर… तभी भियां रास्ते में एक मित्र मिल गिया… बोला भियां…तुम लिख रिये थे जिलाध्यक्ष बदलने वाला है बदलता तो नी…… मैने किया… भियां जहां मुझे तीर लगना  था लग गिया… अब नी बदलेगा… भियां थोडी ओर बात हुई और मे निकल गिया चाय पीने…
तो भियां आज मुझे उस मित्र की बात याद आ गी…  तो सोचा थोड़े भोत पते खोल दुं… भियां मैं पेले ही बिता चुका हुं जिलाध्यक्ष की दौड मे 12 लोग फिल्डिग भर रिये थे… जिसमें से 3 को हटा दो… 1 जो बनने नी मांग रिया था… वो थांदला का खांटी संघी चेहरा संतोष सोनी जो जिसके लिए पुरा संगठन एक मत नजर आता है…….    आठ महीने जैसे छोटे  से कार्यकाल में लूप लाईन समझे जाने वाले पीछडे मोर्चे को लाइम लाइट में लाकर खडा कर देने वाला ये बन्दा अपने आकाओं के एक ईशारे पर मोर्चा जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर साल भर से निष्क्रिय बैठा भले दीख रिया है। लेकिन भियां उसके काम का जादु अंदर ही अंदर खुब दौड रिया है… भियां अंदर के खानों की खबर रखने वालों की बात करें तो इसके जिलाध्यक्ष बनने की सुगबुगाहट सुन सुटबुटधारियों की नींद गायब हो गी है…….  भियां सुत्रों की माने तो भाजपा के पुराने पदाधिकारी हो या जननी के जुने सुपत सब के ठप्पे लगेले है सन्तोष पर …….. लेकिन भियां क्या पता आखिर संतोष क्यो नी बनने मांग रिया……… भियां देखते है बचे 8….  पूर्व विधायक शांतिलाल बिलवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष शैलेष दुबे, श्यामा ताहेड, प्रवीण सुराना, पुरषोतम प्रजापति, अजय पोरवाल, राजेन्द्र उपाध्याय, कलसिंह भाबर इन पर चुनाव बाद ठप्पा लग सकता है पर भियां जिन 3 की में पीले बात कर रिया था उनमे  से कोई  भी 1 बन सकता है।

  • भियां वो तो 6-7 मार्च को भाजपा जिलाध्यक्ष ओम शर्मा निपट ही गिये थे पर भियां एक तो उनका विकल्प हात नी चढा ओर दूसरा नवे नवेले विधायक ने शर्माजी को बचा लिया…. .. भियां सुत्रों की माने तो फटफटी रैली फ्लाप होने के बाद संगठन से जिलाध्यक्ष को जमकर फटकार लगी है…… वहीं एक भैया और ये सगठन के पदाधिकारी की जमकर तु तु मैं मैं हुई… ऐसे में दो बार जिलाध्यक्ष बदलते बदलते रे गिया… खैर मेरा तीर तो निशाने पर लग गिया.थां .. जिलाध्यक्ष नी बना….। अब देखते है चुनाव बाद इन आठों पर संगठन और जननी विश्वास करती है या फिर कोई और…. इन 12 को छोड एक और नया चेहरा …..।

भियां अब जा रिया… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता… अब पुराने चावल ही सारा मामला तय करेंगे…. इन पुराने चावलों में जननी के सपुतों की भी पुरी पुरी भूमिका है… इस बार ये सपुत ही टिकट तय करने जा रिये है… प्रदेश के कुछ स्थानों पर जननी के सपुतों की अहम भूमिका रेगी…. किसको टिकट देना है… अब क्या होता है… ये मैं भी नी जानता और आप भी नी… अब जा रिया… जय राम जी की।

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