15 लोकसभा चुनावों में एकछत्र राज रहा काग्रेस का …… जीएस डामोर के मैदान में आने पर लोकसभा चुनाव बनेंगे रोचक और कोतूहल यूक्त…..  सबसे बडी और छोटी जीत का रिकार्ड कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम 

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राजनैतिक गलियारों से उमेश चौहान
झाबुआ । पहले झाबुआ और वर्तमान में रतलाम लोकसभा सीट पर 1957 से 2015 तक हुए 15 चुनाव व एक उपचुनाव में कांग्रेस का एक छत्र राज रहा है। भाजपा ने 2014 में पहली बार इस आदिवासी सीट पर कमल खिलाया था, लेकिन निर्वाचित सांसद के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने फिर से यह सीट भाजपा से छीनकर अपने कब्जे में ले ली। संसदीय क्षेत्र में सर्वाधिक 12 बार किसी न किसी ’भूरिया’ का कब्जा रहा। दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस से पांच बार, भाजपा से एक बार सांसद चुने गए, वहीं कांतिलाल भूरिया कांग्रेस से पांच बार सांसद निर्वाचित हुए।
        आदिवासी बहुल रतलाम लोकसभा सीट पर 1957 से 1967 तक हुए तीन चुनाव में कांग्रेस ने हैट्रिक बनाई। इसके बाद 1971 में एसएसपी और 1977 में बीएलडी ने कांग्रेस को पटखनी देकर दबदबा जमाया, लेकिन इसके बाद यह आज तक कायम नहीं रहा सका। 2014 के चुनाव में नमो लहर में जरूर भाजपा ने कांग्रेस का गढ़ ढहाते हुए सफलता का झंडा गाड़ा, लेकिन यह भी भाजपा के निर्वाचित सांसद दिलीपसिंह भूरिया के निधन से ज्यादा दिन टिक नहीं पाया। 2015 में हुए उपचुनाव में फिर कांग्रेस ने अपने गढ़ में वापसी कर ली। 
आठ विधानसभा जुड़ी हैं इस सीट से
इस सीट से आठ विधानसभा जुड़ी हैं। इनमें जोबट, आलीराजपुर, झाबुआ, पेटलावद, थांदला विधानसभा सीट झाबुआ क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं, वहीं रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहर, सैलाना विधानसभा सीट रतलाम जिले से जुड़ी हैं।
सबसे बड़ी जीत कांतिलाल भूरिया के नाम
संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए चुनाव में सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत का रिकॉर्ड कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम है। 1962 के चुनाव में कांग्रेस की जमुनादेवी ने भारतीय जन संघ के गट्टू को सबसे कम 22384 मतों से पराजित किया था। जमुनादेवी को 68024 मत और गट्टू को 45640 मत मिले थे। इसी प्रकार 1999 के चुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया को सर्वाधिक 149377 मतों से पटखनी दी थी। कांतिलाल को 371842 मत और दिलीपसिंह को 222465 मत मिले थे।
1962 में पहली बार जीती महिला
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर अब तक हुए कुल 16 चुनाव में पांच बार महिला प्रत्याशी टक्कर में रही, लेकिन जीत केवल एक बार ही मिली। 1962 में कांग्रेस से जमुनादेवी सफलता का परचम फहराकर इस सीट की पहली महिला सांसद निर्वाचित हुई। इसके बाद जमुनादेवी ने 1980 में फिर जेएनपी से किस्मत आजमाई, लेकिन कांग्रेस के दिलीपसिंह भूरिया से पराजित हो गईं।
झाबुआ-रतलाम सीट पर देखने को मिलेगा रोमांचक मुकाबला
गुजरात की सीमा से सटी मध्यप्रदेश की रतलाम-झाबुआ (अनुसूचित जनजाति) सीट आजादी के बाद से कांग्रेस की खासी मजबूत गढ़ बनी हुई है और अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में से उसे मात्र दो बार हार का सामना करना पड़ा है। इस बार के चुनाव में झाबुआ-रतलाम सीट पर रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। इस बार  कांग्रेसी सांसद कांतिलाल भूरिया एवं भाजपा के झाबुआ विधायक गुमानसिंह डामोर के बीच ही रोचक मुकाबला होना तय है । भाजपा ने  रामनवमी 14 अप्रेल को  कांतिलाल भूरिया जैसे कांग्रेस के छत्रप के सामने झाबुआ विधायक गुमानसिंह डामोर को टिकट देकर भूरिया की राह में अवरोध पैदा करने का माहौल अपनी रणनीति के तहत अपनाया है।  दोनों की प्रत्याशी धनबल में किसी से कम नही आंके जासकते है।
    पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी के दिलीप सिंह भूरिया ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को शिकस्त देकर यह सीट भाजपा की झोली में डाली। अगले ही साल सांसद दिलीप सिंह भूरिया के निधन के कारण यहां उपचुनाव हुआ जिसमें कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने जीत हासिल करते हुए ये सीट कांग्रेस के नाम कर ली।
यह सीट पहले झाबुआ नाम से जानी जाती थी लेकिन परिसीमन के बाद इसका नाम रतलाम-झाबुआ हो गया। कांग्रेस के कद्दावर आदिवासी नेता दिलीप सिंह भूरिया यहां से पांच बार सांसद रहे। कांग्रेस ने 12वें लोकसभा चुनाव में कांतिलाल भूरिया को अपना प्रत्याशी बनाया, जिन्होंने इसके बाद लगातार 1998 से 2009 तक तथा उपचुनाव के बाद 2015 से इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।
     क्षेत्र के कद्दावर आदिवासी नेता दिलीप सिंह भूरिया एकमात्र ऐसे नेता रहे जो पहले कांग्रेस से पांच बार सांसद रहे और बाद में भाजपा में आकर भी उन्होंने जीत हासिल की। कांग्रेस की ओर से जहां इस बार फिर से यहां से कांतिलाल भूरिया को ही पार्टी प्रत्याशी बनाया गया है वहीं भाजपा ने सभी अटकलों को विराम देते हुए झाबुआ विधायक गुमानसिंह डामोर पर अपना विश्वास जताया है । इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में संघ के कई संगठन अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। इस संसदीय सीट में झाबुआ जिले की तीन झाबुआ, थांदला, पेटलावद, अलीराजपुर जिले की अलीराजपुर, जोबट और रतलाम जिले की रतलाम ग्रामीण, रतलाम सिटी और सैलाना सीट शामिल हैं।
      विधानसभा चुनावों में झाबुआ की तीन में से दो पर कांग्रेस और एक पर भाजपा विजयी हुई है। वहीं रतलाम की तीन में से दो पर कांग्रेस और एक पर भाजपा तथा अलीराजपुर की दो में से दो पर कांग्रेस का कब्जा है। इस प्रकार कुल आठ विधानसभा सीटों में छह कांग्रेस के और दो भाजपा के पास है। कुछ माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में झाबुआ सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता जेवियर मेडा ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने के चलते निर्दलीय चुनाव लड़ा था जिसका खामियाजा सांसद पुत्र डा. विक्रांत भूरिया को अपनी हार के  साथ चुकाना पडा था औ र भाजपा के गुमानसिंह डामोर ने भाजपा की इस सीट को बरकरार रखा । लोकसभा चुनाव के समय अब बदले समीकरण में जेवियर मेडा  जिनकी की बगावत के कारण इस सीट पर कांग्रेस को नुकसान झेलना पड़ा था। अब लोकसभा चुनाव के ऐन पहले मेड़ा ने घोषणा की है कि वे लोकसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ेंगे और कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करेंगे। रतलाम संसदीय क्षेत्र में सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होगा।
इस प्रकार इस सीट पर 13 बार कांग्रेस ने परचम लहराया-
वर्ष 1957 से लेकर 2014  तक हुए लोकसभा के निर्वाचन तथा 2015 मे हुए उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर 13 बार जीत दर्ज कराई है। किन्तु इस बार कांग्रेस प्रत्याशर््ाी कांतिलाल भूरिया का मुकाबला भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी गुमानसिंह डामोर से होना है जो पूरी लोकसभा सीट रोमांचक बन गई है तथा कौतुहल का सबब बनी हुई है –
वर्ष निर्वाचित निकटतम जीत का अंतर
  • 1957 अमरसिंह  कांग्रेस नाथुसिंह भाजसं 41596
  • 1962 जमुनादेवी  कांग्रेस गट्टू भाजसं 22384
  • 1967 सूरसिंह भूरिया कांग्रेस सडीबेन एसएसपी 28385
  • 1971 भागीरथ भंवर एसएसपी सूरसिंह भूरिया कांग्रेस 26593
  • 1977 भागीरथ भंवर भारतीय लोकदल दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस 62672
  • 1980 दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस जमुनादेवी जेएनपी 90136
  • 1984 दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस भगवानसिंह चैहान भाजपा 134532
  • 1989 दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस भगवानसिंह चैहान भाजपा 116957
  • 1991 दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस रैलम चैहान भाजपा 27899
  • 1996 दिलीपसिंह भूरिया कांग्रेस भागीरथ भवर भाजपा 27899
  • 1998 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस दिलीपसिंह भूरिया भाजपा 82373
  • 1999 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस दिलीपसिंह भूरिया भाजपा 149377
  • 2004 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस रैलम चैहान भाजपा 80282
  • 2009 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस दिलीपसिंह भूरिया भाजपा 57668
  • 2014 दिलीपसिंह भूरिया भाजपा कांतिलाल भूरिया कांग्रेस 108452
  • 2015 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस निर्मला भूरिया भाजपा 88877
इस बार रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र के चुनाव  को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सतत बैठके लेकर अपनी बनाने के साथ ही बुथ स्तरों पर अधिक से अधिक ध्यान केन्द्रीत करने के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को दायित्व सौपना शुरू कर दिया है । वही भाजपा के गुमानसिंह डामोर विधायक बनने के बाद से सतत पूरे  लोकसभा क्षेत्र को कई बार भ्रमण कर चुके है तथा भाजपा द्वारा भी मिटिंगों का सिलसिला शुरू हो गया है।  ऐसे में इस बार कांग्रेस भी इस चुनाव को फौरी तोर पर नही ले रही है क्या ेकि पिछले चुनावों से अगल इस बार के चुनाव काफी रांेमांचक एवं कांटे की टक्कर वाले बनने वाले है। जो जितनी मेहनत करेगा, जनता से जितना अधिक जनसपंर्क करने मे कामयाब होगा वही इस बार दिल्ली  जाने वाला है यह आम लोगों की भावना एवं मत है। आगामी 19 मई को ईव्हीएम में  मत कैद हो जायेगें और 23 मई को  ये मशीने किस के पक्ष मे ं परिणाम उगलती है यह समय ही बतायेगा ।
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