होसान्ना के जयकारों से गुंजा झाबुआ चर्च प्रांगण…. खजुर रविवार के साथ येसु की होसान्ना

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झाबुआ। रविवार सुबह न्यू कैथोलिक मिशन स्कूल झाबुआ में हजारों की संख्या में विश्वासी एकत्र होकर प्रभु येसु की होसान्ना करते हुए चर्च प्रांगण की ओर जुलुस में आगे बढे। सभी विश्वासियों के हाथों में खजुर की डालियां थी, फादर राॅकी शाह ने धर्म विधी की शुरूआत खजुर की डालियों की आशीष से की। उन्होने अपने छोटे से उदबोधन में कहा कि जिस प्रकार हम अपने मुख से प्रभु येसु की जयकार और होसान्ना करते है। उसी प्रकार खजुर की डालियां हिलाने पर प्रक्रति भी ईश्वर का जयकार करती है। उन्होने लोगों से आव्हान किया िकवे पुरे जुलुस में खजुर की डालियों को अपने हाथों में उंचा रखकर उसे लहराते हुए चले। यह ईश्वर का स्तुतिगान करता है, चर्च प्रांगण में जुलुस पहुंचने पर पवित्र मिस्सा अनुष्ठान का अगला भाग शुरू किया गया। पवित्र मिस्सा अनुष्ठान का अगला भाग शुरू किया गया।

        आज से यह सप्ताह दुखभोग का सप्ताह कहलाएगा। सुसमाचार की घोषणा आज विशेष होती है। इसमें प्रभु के दुखभोग की घटना को पढकर सुनाया जाता है। आज प्रभु येसु के दुखभोग की घटना का वाचन फादर राॅकी, फादर इम्बानाथन और फादर माईकल द्वारा किया गया। फादर राॅकी ने अपने प्रवचन में लोगों से आज के दिन की गंभीरता को संमझाते हुए आव्हान किया कि जिस प्रकार प्रभु के समय की उस परिस्थिति को पांच भागों में बांटा जा सकता है। उसे लोगों को आसन शब्दों में समझाया गया। इन पांच भागों में पहला भाग प्रभु येसु ख्रीस्त की शिक्षाएं दुसरे भाग में प्रभु येसु ख्रीस्त के शिष्यों द्वारा येसु की शिक्षा को समझना तीसरे भाग में जनता द्वारा प्रभु येसु को अपना राजा मानना, चैथे भाग में जनता की भीड में कुछ ऐसे लोग जो न तो येसु के साथ थे और न ही येसु के विरूद्ध थे उनको समझना और अंतिम पांचवें भाग में उस समय के क्रातिकारियों की भावनाओं को समझने पर फादर ने विस्तृत रूप से समझाया। मिस्सा अनुष्ठान के अंतिम भाग के बाद सभी लोगों ने चुनाव में पुर्ण मतदान करने की शपथ ली। शपथ कार्यक्रम का आयोजन झाबुआ जिले के निर्वाचन अधिकारियों द्वारा करवाया गया।
प्वित्र मिस्सा अनुष्ठान के लिए विशेष रूप से फादर प्रताप बारिया, फादर जाॅनसन, फादर इम्बानाथन, फादर माईकल, फादर अश्विन और फादर राॅकी फादर रोहित उपस्थित थे।
दुखभोग का सोमवार सामुहिक मिस्सा बलिदान में मनाया जाता है। इसे क्रिस्मा मिस्सा कहा जाता हे। इस दिन सुबह से दिन भर बिशप बसील भूरिया अपने सभी पुरोहितों के साथ दिन भर विशेष प्रार्थनाएं करते हैं इसमें सभी पुरोहितों का आना अनिवार्य होता है। शाम को लोगों के साथ पवित्र मिस्सा बलिदान में विशेष प्रार्थनाएं होती है। मुख्य रूप से पूरोहित अपनी आज्ञाकारिता वृत का नवीनीकरण करते है। उसके बाद तेलों की आशीष होती है यह तेल अलग अलग संस्कारों में प्रयोग किए जाते है।
दुखभोग का गुरूवार
इस दिन मिस्सा अनुष्ठान में विशेष रूप से प्रभु के उस कार्य को याद किया जाता है जिसमें उन्होने अपने शिष्यों के पैर धोये थे मुख्य याजक बारह वरिष्ठ लोगों के पैर धोते और उन्हे चुमते हैं। यह घटना हमें संदेश देती है कि प्रभु येसु सेवा कराने नही बल्कि सेवा करने में विश्वास रखते है मिस्सा अनुष्ठान के बाद रात्रि 12 बजे तक लोग परम प्रसाद की आराधना करते है व दुखभोग का शुक्रवार इस दिन दोपहर 1 बजे कु्रस मार्ग में भाग लेते है। एक भारी लकडी के क्रुस को 14 अलग अलग लोगों द्वारा ढाया जाता है और 14 अलग अलग विश्रामों पर प्रभु येसु के दुखभोग की याद की जाती है। तत्पश्चात लोग विशेष धर्म वीधि के लिए एक स्थान पर एकत्रित हो जाते है। लगभग 3 बजे जो कि प्रभु येसु ख्रीस्त की मृत्यु का समय है। उस समय महाप्रार्थनाएं होती है। विश्व में केवल यही एक दिन है, जिस दिन मिस्सा अनुष्ठान नही किया जाता है। वर्ष के 365 दिन में से 364 दिन मिस्सा अनुष्ठान होते है, इस दिन को छोडकर। अंत में सभी लोग परमप्रसाद ग्रहण कर मौन रहते हुए अपने घर लौट जाते है। अब सभी लोग 3 दिन तक मौन रहकर किसी भी प्रकार के मनोरंजन में भाग नही लेते है।
पवित्र दुखभोग का सप्ताह ईसाई समुदाय के लिए मनन चिंतन और त्याग और तपस्या करने का समय है। उक्त जानकारी समाज के निकलेश डामोर ने दी।

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