भियां 2 सिंगों के बीच टिकट को लेकर कडी टक्कर हो री… जननी सोच समझ कर करें टिकट तक…. एक सिंग के चक्कर में कहीं जननी की छवि धुमिल न जाये….

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सभी को राम… राम… भियां राजनिती अनिश्चितओं से भरी पडी है… कब क्या हो जायेगा.. ये कुछ के नी सकते… पर भियां चुनावी बिगुल बज गिया है… इस बार जननी प्रदेश के कुछ जगहों पर निर्णाय के रूप में नजर आ री है… जैसा कि भियां मैं पेले ही बिता चुका हुं… मेरे गांव की टिकट तो जननी ही तय करेगी…। जननी ने जिस पर हाथ रख दिया… समझों वो चल निकला… पर भियां इस बार जननी को सोच समझ कर किसी के सिर पर हाथ रखना पडेगा… नही तो भियां इस बार जननी की छवि भी धुमिल होने से नी बच सकती। 
भियां इस बार दो सिंगों को लेकर जननी और संगठन में जमकर रस्साकस्सी चल री है… एक गौर…. दुसरा कल… पर भियां जननी आप ही बिताओं ये दोनों ये दोनों के विरोधी कितने है… भियां मैं बिता दुं… एक सिंग के कार्यकाल में क्या हो रिया था… आप खुद ही जान रिये हो… उसका क्षेत्र मानों उडता पंजाब बन गिया… छात्रावास की छात्राएं इनके दुमछल्लों की रखेले बन गी थी… तो भियां इस मासुमों छात्राओं की एक बार फिर अस्मिता जननी लुटते देखना चाहती है… अब जो भी है भियां जननी के हाथों में है… ये राजनिती है कब क्या हो जाये… पर हां जननी की बात ही अलग है… इसलिए के रिया हुं… भोत सारे दुसरे दावेदार भी है… उन पर दाव आजमाओ…. । सुत्रों की मानें तो भियां एक सिंग की गुजरात लिस्ट के दौरान टिकट तय हो गिया था… पर अचानक क्या हो गिया… समझ नी आया….। 
 
मेरा क्या… मैं जननी पर विश्वास करता हुं… इस लिए के रिया…. कहीं जननी की छवि धुमिल न हो जायेे…. भियां जननी अभी भी के रिया हुं… और आगे भी बिताउगा… सिंगों की लडाई में… किसी दुसरे को देदो… आपकों भी पता है… पिछले चुनाव में एक सिंग को कितना विरोध का सामना करना पडा… सत्ता होने के बाद भी इतने वोटो से हारना… सोचनीय बात है… अब जा रिया…. बस ये ही सोच कर डर लग रिया हुं… कहीं जननी के दामन पर दाग न लग जाये…. जय राम जी की। 
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