ठेकेदार की मनमर्जी से चल रहा घटिया बैराज निर्माण कार्य .. उच्च स्तरीय जांच की आमजनो ने की मांग

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झाबुआ । चाहे सरकार भ्रष्टाचार एवं घटिया काम करने वालों के विरूद्ध सख्ती बरतने का दावा करे किन्तु भ्रष्टाचार करने वाले अपनी करनी करने से पीछे नही रहते है। ऐसा ही वायका शुक्रवार को हमारी टीम ने जब मेघनगर की अति प्रतिक्षित नल जल योजना के लिये बन रहे बैराज की साईड पर पार्षदों के साथ निरीक्षण किया तो चैकाने वाले तथ्य सामने आये । झाबुआ नगर  की पेयजल परियोजना की तर्ज पर ही मेघनगर में भी जल प्रदाय के लिये अनास नदी पर 9 करोड की लागत से बेराज का निर्माण नगर परिषद के माध्यम से कराया जारहा है । उक्त कार्य ठेकेदार पीसी स्नेहल रियान वाटर टेंक प्रा.लि. (जेबी) के माध्यम से किया जारहा है । हमारी टीम ने नगरपरिषद के दो पार्षदों के साथ  उक्त बैराज निर्माण की साईड का अवलोकन किया तो साईड पर गुणवत्ताहीन कार्य के अलावा बिना किसी तकनीकी जिम्मवारों की देख रेख में ठेकेदार द्वारा अपने हिसाब से काम लेबरों से करवाया जारहा है । वहां गिट्टी का बनाया जारहा माल पतला  एवं घटिया होकर वहां वाईब्रेटर का उपयोग भी नाम मात्र के लिये किया जारहा था । साईड पर किसी भी तकीनीकी जिम्मेवार या विभाग के जिम्मवारों का नही रहना कइ्र शंकाओं को जन्म दे रहा था ।

  बैराज निर्माण की साईड पर पेटी कांट्रेक्टर के लोग ही मौजूद थे और उन्ही के द्वारा ही निर्माण काम करवाया जारहा था । बेराज के अलावा नगर मे पाईप लाईन बिछाने सहित अन्य कार्य भी  इसी ठेकेदार के द्वारा  कराया जारहा था । नगरपरिषद मेघनगर एवं नगरवासियों द्वारा घटिया काम को लेकर शिकायत की गई थी और जांच के लिये इन्दौर से  दल भी आया था जिसने इस कार्य मे अनियमिततता पाई थी किन्तु प्रतिवेदन नही दिया है ।नगर परिषद के बाशिन्दो की प्यास बुझाने के लिये अनास नदीदपर बनाये जारहे बैराज का निर्माण निर्धारित मापदंड के अनुसार नही हो रहा है वही विभाग का कोई भी तकनीकी जिम्मेवार भी वहांनही पाया गया । फलतः ठेकेदार अपनी मनमर्जी के अनुसार सतत कार्य करवा रहा है । ठेकेदार गिट्टी एवं सीमेंट का घटिया माल बना कर बैराज में डलवा रहे थे ।

    उक्त मटेरिया का टेस्टिंग के लिये मनमाफिक माल बना कर अलग से रख लेते है । उल्लेखनीय है कि अनास नदी पर घटिया माल डाल कर बनाये जारहे माल के कारण घटिया निर्माण की बात को नकारा नही जासकता है ।  अनास नदी पर बन रहे इस बैराज में दो नदियों का पानी संग्रहित होगा। ओर इस तरह से घटिया माल का उपयोग करने एवं निर्धारित मापदंड से काम नही होने के चलते करोड की लागत बनने वाले इस बैराज से नगर परिषद् के ेबाशिंदो की प्यास बुझाने में यह निश्चित ही नाकाम साबित होगा।  बैराज की गुणवत्ताहिन के बारे में नगर परिषद् के वार्ड क्रमांक 13 के पार्षद राजेश गामड ने भी बताया कि बैराज निर्माण का काम ठेकेदार द्वारा मनमर्जी से किया जा रहा हैं जो पुरी तरह घटिया होकर जनता के खून पसीने की कमाई व शासन के करोडो खर्च करने पर जो सौगात दी गई है वह पुरी तरह नाकारा सिद्ध होगी। परिषद् के वार्ड 1 के पार्षद कलसिंह भूरिया ने भी घटिया स्तर के माल का उपयोग करने एवं निर्माण के ेदौरान जिम्मेवार लोगो का साईट पर ना होने से आक्रोश व्यक्त करते हुआ कहा कि निश्चित ही यह घटिया कार्य नगर की प्यास नही बुझा पायेगी। 
      इस संबंध मे नगर परिषद के सब इंजिनियर से चर्चा की तो उन्होने बताया कि डैम इंचार्ज का दायित्व पीआईयू की मैडम की देखरेख में निर्माण चल रहा हैं जब हमारी टीम ने मौके पर जाकर देखा तो वहा से मैडम नदारद पायी गयी। ओर क्वालिटी कंट्रोल को देखने वाला कोई भी जिम्मेवार साईट पर नही मिला। उक्त सभी बिन्दुओ को देखने पर यह भी पाया कि बैराज निर्माण साईट पर कोई भी बोर्ड प्रदर्शित नही किया गया था। जिससे बैराज निर्माण की प्रारंभिक जानकारी प्राप्त हो सके। मजदूरो के लिये ना तो छाव की व्यवस्था थी ओर ना ही भोजन अवकाश के समय मूलभूत व्यवस्था एंव सुविधाएं ठेकेदार द्वारा मुहैया करवाई गई। इस तरह मजदूरो के शोषण का मामला भी विचारणीय हैं ।
    अनास पर करोडो की लागत से बन रहे इस बैराज निर्माण में प्रारंभिक काल में ही जब इस प्रकार की धांधलियां दिखाई दे रही हे तो तय है कि इसमे भ्रष्टाचार को लेकर श्ंाका की संुई का घुमना स्वाभाविक है। बिना मिली भगत के ठेकेदार के भरोसे इतने बडे जनहितैशी प्रोजेक्ट के निर्माण में इन लोगो की भूमिका को नकारा नही जा सकता है। ठैकेदार द्वारा मनमर्जी से किये जा रहे इस घटिया निर्माण को लेकर नगर में भी चर्चा का माहौल गरम है ओर ठेकेदार पर अंकुश लगाने के साथ ही इस निर्माण की उच्च स्तरीय एवं तकनिकी जांच की भी मांग  उठाई जा रही है। 
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