हाथीपावा तो एक बहाना है असल में अधिकारियों से नजदिकियां बडाना है…… पौधों में पानी डलने से पहले सोशल मीडिया पर डल जाती है फोटो… अब ये भी समझ नी आ रिया आखिर तेदुंआ पानी की टंकी के पिछे छुपा क्यो…..!

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        सभी को मेरा नमस्कार…. लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ…. भियां शानदार…. जबरजस्द… झकास…. भियां बोले तो बडी मेहनत से सींच सींच कर समाज सेवकों ने पुरे हाथीपावा को हरियाली से लहलहा दिया है… अब जंगली जानवर भी यां आ गिये है… सर से लेकर पैरों तक पसीना टपका… टपका कर इन सेवकों ने बाल्टियां भर भर कर पौधों में पानी डाला जो अब पेड बन गिये है… ऐसे पेड जिनकी छाव में बैठकर भियां सब उसका मजा ले रिये है। भियां से सब सपना है… हकिकत तो कुछ ओर ही नजर आ री है…।

       भियां पिछले काफी समय से अधिकारी कर्मचारी का महकमा हाथीपावा पर पौधों की सेवा करने जा रिया है…. वहां नगर के कई समाजसेवी… गणमान्य नागरिक भी जा रिये है… जिन्होने हाथीपावा को हरियाली से हललहा दिया है… भियां ये ऐसे समाजसेवी है जो राम नाम जपना पराया माल अपना की तर्ज पर हाथीपावा जा रिये है…. जो हरियाली सेवा तो दिखावे के लिए कर रिये है… उनका असली मकसद तो अधिकारियों से नजदिकियां बढाना है… तभी तो भियां पौधों में पानी डले नी डले पर अधिकारियों कर्मचारियों के साथ फोटो सोशल मीडिया पर जरूर डाले जा रिये है… वो भी इसलिए भियां कि अधिकारियों से नजदीकियां बढ जाये… और ठेके मिल जाये… फर्जी बिल लग जाये… एनजीओ को सरकारी काम मिल जाये… अपने हित पूरे हो जाये… अधिकारियों की दलाली कर भीख मिल जाये… जमीनों के फर्जी कागज बन जाये… बस… पेड पौधे तो बहाना है….।
        ये भी समझ नी आ रिया आखिर तेदुंआ पानी की टंकी के पिछे छुपा क्यो!…. भियां हम भी अन्न खा रिये है और आप भी…. भियां जंगल में आग लगी और तेंदुए जैसा जानवर पानी की टंकी के पीछे छीप कर बैठे… और ट्रेक्टर पास जाये और तेंदुआ उसके पीछे भागे और हमला नी करें…. भियां बुरा लगे तो आज दो रोटी और खाना… पर लोगों को मामु मत बनाओ… कि तेंन्दुआ आया… तेन्दुआ आया… भियां जब हाथीपावा पर आग लगी तो तेंन्दुआ… आग बुझाने का इंतजार नही करेंगे… वो किलोमीटरों में दुर भाग जायेगा… न की टंकी के पीछे छुप कर बैठेगा… और भियां टेक्टर भी इतना तेज नी भागता है कि तेंदुआ उसके पीछे भागे और उसे पकड नी ले। भियां समाजसेवा का ढिन्डोरा मत पीटो…. और लोगों को मामु बनाना छोड दो… सब जान गिये है… असलीयत क्या है! अगर मामले के खुलासे किये ने तो जिन अधिकारियों के साथ सेल्फी ले रिये हो वो आसपास फटकने नी देंगे…।
         भियां अब जा रिया हुं… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं… ये जिनते भी समाजसेवी हाथीपावा पर दिख रिये है… वो सारे के सारे धंधे बाज है… जो सिर्फ और सिर्फ अपने हितों के लिए जा रिये है… अगर अधिकारी इनके काम करना बंद कर दे… तो देखों… क्या होता है… अब जा रिया… जय राम जी की।
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