*निजी स्कूलों मे महंगाई की मार : पालको को चुकाना पड़ रहे 1000 से 1200 रुपए-* *निजी स्कूलों में किताबें भी निजी प्रकाशको की, पालकों में नाराजी* *स्कूलों और प्रकाशकों की मिली भगत स्कूल संचालक को मिलता है कमीशन*

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 📝अलीराजपुर से मोहम्मद जोबटवाला की रिपोर्ट📝
अलीराजपुर कक्षा पहली की पढ़ाई के लिए एनसीईआरटी की किताबें महज 165 रुपए में उपलब्ध हैं, लेकिन निजी स्कू लों की मनमानी के कारण पालकों को 1000 से 1200 रुपए चुकाना पड़ रहे हैं। इसकी वजह कोर्स में निजी प्रकाशकों की किताबें शामिल करना बताया जा रहा है। एनसीआरटी में कक्षा पहली में कुल तीन किताबें होती हैं, लेकिन निजी स्कूलों में आठ से नौ किताबों से अध्यापन कराया जाता है। इसके चलते पालकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
*राज्य सरकार द्वारा सभी निजी स्कूलों को एनसीआरटी की किताबें प्राथमिकता*
 से चलाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन यह निर्देश महज कागजों पर दिखाई पड़ रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा भी सरकारी निर्देशों की खानापूर्ति कर दी जाती है। जिसके कारण निजी स्कूलों की मनमानी पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। शहर में करीब आधा दर्जन बड़े स्कूल हैं। जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई करते हैं, लेकिन इक्का-दुक्का स्कूलों को छोड़कर अधिकांश स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबों को ही प्राथमिकता देते हैं। जानकारी के अनुसार यह निजी स्कूल दिखावे के तौर पर एनसीआरटी की दो-तीन कि ताबें चलाते हैं। इसके अलावा शेष किताबें निजी प्रकाशकों की होती हैं। जिले में लगभग 130 से अधिक कक्षा पहली से आठवीं तक के स्कूल है लेकिन अभी तक मामले में अंकुश लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं कि या गया है।
*छह गुना महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें*
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार एनसीआरटी की तुलना में निजी प्रकाशकों की किताबें छह गुना तक महंगी होती हैं। कक्षा 1 से 2 तक कुल किताबों की कीमत 165 रुपए होती है, लेकिन निजी प्रकाशकों की किताबों की कीमत 1000 से 1200 रुपए तक पहुंच जाती है। बाजार में इन दिनों कक्षा 3 से 5 तक का कोर्स 1200 से 1500 रुपए तक तथा कक्षा 6 से 8वीं तक का कोर्स 1600 से 2800 रुपए तक में बेचा जा रहा है। जबकि एनसीआरटी की किताबें चलाई जाती हैं तो किताबों की कीमत 200 रुपए से लेकर 600 रुपए तक होती है।
*पालकों की कट रही जेब*
निजी प्रकाशकों की किताबें चलने के कारण पालकों की जेब कट रही है। जिन पालकों के एक से अधिक बच्चे हैं। उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किताब खरीदने पहुंचे पालक का कहना था कि उनका बेटा कक्षा 3 री में पड़ता है। एनसीआरटी के हिसाब से उसका कोर्स लगभग 600 रुपए का होना था, लेकिन उन्हें 1600 रुपए चुकाना पड़े। इनमें कुछ किताबों की कीमत 250 से 350 रुपए तक थी। यही स्थिति अन्य पालकों के साथ भी बन रही है। पालकों का कहना था कि जिला प्रशासन को स्कू लों की जांच कर एनसीआरटी की किताबें लागू कराना चाहिए।
*नर्सरी में चल रही मनमानी*
एनसीआरटी द्वारा नर्सरी और के जी 1 तथा के जी 2 की किताबें नहीं बनाई जाती। जिसके चलते निजी स्कूलों की मनमानी इन कक्षाओं में जमकर चलती है। शहर में संचालित होने वाले अधिकांश स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें चलाते हैं। जिनकी कीमत 500 से 1000 रुपए तक होती है। सूत्रों का कहना है कि निजी प्रकाशकों द्वारा स्कूलों को कमीशन दिया जाता है। इसी के चलते स्कूल संचालक उनकी किताबों को प्राथमिकता देते हैं।
*शिक्षा विभाग नहीं करता जांच*
निजी स्कूलों की मनमर्जी को रोकने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा भी कोई प्रयास नहीं किए जाते हैं। इस बार भी नया शिक्षा सत्र शुरु होने से पहले जिला शिक्षा अधिकारी ने औपचारिकता के तौर पर सभी निजी स्कूल संचालकों को पत्र जारी कर दिया है, लेकिन उनके निर्देशों के पालन के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। सीबीएससी से संबद्घ स्कूलों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का रवैया काफी लापरवाही भरा होता है।
*मामला दिखवाएंगे*
पालकों पर परेशानी नहीं आए, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। मामले को दिखवाया जाएगा और शिक्षा विभाग के अफसरों को इस संबंध में कार्‌रवाई के लिए कहेंगे।
*सुरेशचंद्र वर्मा, एडीएम*
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