कलेक्टर साहब के डंडे को देख दुम दबाकर भागे मौत के दुकानदार…!

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@Voice ऑफ झाबुआ         @Voice ऑफ झाबुआ

झाबुआ एक आदिवासी बाहुल्य जिला है..यहां आज भी शिक्षा का स्तर काफी कम है…और इसी का फायदा उठाते हुए मौत की दुकानें खोल बैठ मौत के सौदागर…अवैध चिकित्सक…इनके वो सभी चिकित्सक शामिल है जो अपनी पद्धति छोड….दुसरी पद्धति में काम करते है…इनका मकडजाल ऐसा फैला हुआ है कि एक पर कार्रवाई होती है… और ये करने लग जाते है विरोध….यहां तक की झुठी शिकायत करने में भी नही चुकते…इन मौत के सौदागरों ने इस आदिवासी बाहुल्य जिले में लुट मचा रखी है…।वाॅइस ऑफ झाबुआ कलेक्टर सोमेश मिश्रा साहब का आभार मानता है कि उन्होने इस आदिवासी बाहुल्य जिले में इन अवैध क्लीनिक संचालको पर कार्रवाई के निर्देष दिए थे…जिसके बाद कार्रवाई का सिलसिला चला तो… कई अवैध क्लीनिक संचालक ऐसे दुम दबाकर भागने लगे…और लोग कहने लगे….देखो….देखों कौन भागा….कौन भागा….डंडा तो बडी बखुबी चला….पर सुना है की इस मौत के दुकानदारों का कोई मुखिया दातला है….है जो अभी तक जिला स्वास्थ्य विभाग में सेटिंग करता आया है… मगर जैसे ही कलेक्टर साहब का कार्रवाई का डंडा चला तो ये बौखला गया….और कलेक्टर साहब के खिलाफ झुठी झुठी शिकायते करने लगा…यहां तक की प्रभारी मंत्री को भी कलेक्टर और उनके द्वारा बनाई गई टिम की भी शिकायत की….अब सांसद गुमानसिंह डामोर का नाम लेकर….अपने मौत के सौदागर साथियों के साथ कार्रवाई न करने के लिए दबाव बना रहा है….जिसके बारे में सांसद गुमानसिंह डामोर को मालुम ही नही है….अगर सच में सांसद गुमानसिंह डामोर इस आदिवासी बाहुल्य जिले का भला चाहते है….तो उनका नाम बदनाम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दे… क्योंकि ये आपकी छवि दिन ब दिन धुमिल कर रहे है….सांसद महोदय इन अवैध क्लीनिक संचालकों के यहां कई आदिवासियों की मौत हो चुकी है और ये ईलाज के नाम पर मोटी रकम वसुल करते है….ऐसे में ये जो आपका नाम लेकर दबाव बनवा रहे है…उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करें…ये तो बिन पेंदें के लौटे है….तो भाजपा के राज में भाजपा की ओर….और कांग्रेस के राज में कांग्रेस की ओर लुढक जाते है?ऐसे में सांसद महोदय अपनी छवि धुमिल होने से बचाइए…।

आदिवासी संगठनों को आना होगा आगे…..

झाबुआ एक आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां कई आदिवासी संगठन समाज हित में कार्य कर रहे है ऐसे में जिले भर में जो ये अवैध क्लीनिक संचालक है…जो आदिवासी समाज के लोगों की जान से खिलाड कर रहे है…और ईलाज के नाम पर मोटी रकम वसुल कर रहे है। इसलिए आदिवासी संगठनों को भी इनके खिलाफ आवाज उठाना चाहिए ताकि किसी भी आदिवासी के साथ ईलाज के नाम पर लुटपाट न हो सके और बेसमय काल के गाल में न समा जाये।

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