पेटलावद नगर परिषद चुनाव रोमाचंक मोड़ पर

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सुरेश मुलेवा पेटलावद


नाम वापसी के बाद अब नगर परिषद चुनाव को लेकर स्थिति साफ हो गई है। भाजपा से 15 तो कांग्रेस से 14 उम्मीदवार मैदान है। वहीं 26 उम्मीदवार निर्दलीय मैदान में खड़े है। इन सभी को मिलाकर इस बार चुनाव में कुल 55 उम्मीदवार मैदान है। गुरूवार को नाम वापसी के दौरान जिस तरह से भाजपा में भारी बगावत देखने को मिली उससे अब यह चुनाव रोमांचक मौड़ पर आ खड़ा हुआ है। इसका सीधा-सीधा फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है, लेकिन अभी यह कहना अतिशयोक्ति होगा कि इस बार चुनाव में कौन बाजी मारेगा।
भाजपा में बगावत पड़ेगी भारी-
पेटलावद नगर की बात करे तो पेटलावद में सिर्वी, जैन, राठौड़, कहार, एसटी,एससी, गवली, ब्राह्मण, मुस्लिम और ठाकुर समुदाय का विशेष वोट बैंक है। यहां भाजपा ने जातिगत समीकरण को साधने के फार्मुले पर काम किया और टिकटो का वितरण किया। इसमें भाजपा ने जैन समाज से 4, एसटी से 4 सिर्वी समाज से 3, ब्राह्मण, राठौड़, कहार और एससी से एक-एक व्यक्ति को टिकट दिया, लेकिन गवली, ठाकुर और मुस्लिम समाज को नजरअंदाज किया। जिससे इन समाजो में भाजपा के प्रति काफी असंतोष देखने को मिल रहा है। वहीं कई वार्डो में ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिया गया, जिनसे नाराज होकर कई बड़े नेता निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए और भाजपा से बगावत कर दी। अब यही बगावत भाजपा की नैया डूबाने का प्रयास करेंगे। यही बगावत अब भाजपा पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है।
भाजपा ने 5 वार्डो में दिए माफियाओं को टिकट देने वाली चर्चा चैराहे पर-
आदर्शवादी संगठन कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी पर यह आरोप लगे है कि पेटलावद में इस बार भाजपा ने 5 वार्डो में माफियाओं को टिकट दिया है। जो चैराहो पर चर्चा का विषय भी बने हुए है, कि आखिर भाजपा को वार्डो में माफियाओं के अलावा दूसरे साफ-स्वच्छ छवि वाले प्रत्याशी नही मिले जो इन माफियाओं को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा गया। जिन वार्डो में आरोप लगे है उनमें वार्ड 1 जिसमें यह आरोप है कि बीज माफिया को टिकट दिया गया। वार्ड 4,6,10 में भू-माफिया को टिकट देने के आरोप लगे है तो वार्ड 12 में सट्टा किंग की पत्नि को टिकट देने के आरोप लगे है। इन आरोपो में सच्चाई कितनी है यह जनता भलिभांति जानती है। यह आरोप हम नही लगा रहे, बल्कि इन दिनो चोराहो पर चर्चा का विष्
किस वार्ड में कौन बिगाड़ रहा समीकरण-
– वार्ड 1 की बात करे तो यहां भाजपा ने विनोद भंडारी को टिकट दिया, जो पूर्व में नगर परिषद अध्यक्ष रह चुके है। यह वही विनोद भंडारी है जिन पर 12 सितंबर 2015 को यह आरोप लगे थे कि इन्होनें राजेंद्र कांसवा के परिवार को संरक्षण देकर पेटलावद से फरार करवाया था। अब ऐसी स्थिति मे यह जो कारण है भाजपा के लिए एक बड़ा डेमेज कंट्रोल बन रहा है। वहीं इनको टिकट मिलने के बाद भाजपा के ही मुकेश परमार जो कि पेटलावद में एक बड़ा नाम है, उन्होनें बगावती सूर अख्तियार किए और अपना नामांकन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जमा कर दिया। गुरूवार को नाम वापसी की अंतिम घड़ी तक इन्हे बीजेपी पदाधिकारियों द्वारा मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे नही माने और अब इस वार्ड में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा।
– वार्ड 2 की बात करे तो यहां 10 साल पहले पार्षद रही प्रकाश मुलेवा की पत्नि रचना मुलेवा पर भरोसा कर उन्हें टिकट दिया गया। जबकि यहां बीजेपी से 3 दिग्गज नेताओं ने टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नही मिला। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि कांग्रेस से यहां कोई प्रत्याशी नही है, लेकिन 3 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में है, जो बीजेपी का ही खेल बिगाड़ेंगे।
– वार्ड 3 में भी भाजपा प्रत्याशी का खेल निर्दलीय उम्मीदवार बिगाड़ेंगे। यहां 3 उम्मीदवार निर्दलीय है और एक कांग्रेस से उम्मीदवार है। यहां भी भाजपा से टिकट न मिलने की नाराजगी भाजपा को नुकसान कर सकती है।
– वार्ड 4 में भाजपा-कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा। यहां निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में है, लेकिन यहां कांग्रेस प्रत्याशी मजबूत नजर आ रहे है।
– वार्ड 5 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में नेहा जानी को टिकट मिला है। यहां कांग्रेस तो हर बार की तरह शून्य रहने वाली है। अब मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशी और भाजपा के बीच होने वाला है। हालांकि यह भी तय है कि जो निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में है उनके पति के काले कारनामों की वजह से उन्हें खासा नुकसान होगा। उनके पति पर आरोप लगे है कि वह अवैध गतिविधियों में लिप्त है। खैर आरोप में कितनी सच्चाई है यह जनता जानती है।
– वार्ड 6 में भाजपा से गौतम गेहलोत को टिकट मिला है, लेकिन उनको टिकट मिलने से नाराज भाजपा से ही पूर्व में पार्षद रहे शंकरलाल राठौड़ ने बगावत की और निर्दलीय मैदान में खड़े है। बता दे कि यह वार्ड शुरू से ही भाजपा की झोली में रहा है। यहां राठौड़ समाज के अधिक वोट है और यही वजह रही कि नाम वापसी के दिन शंकर राठौड़ ने सामाजिक तौर पर अपना शक्ति प्रर्दशन दिखाया और भाजपा प्रत्याशी गोतम को झूकना पड़ा और एक बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिला। अब भाजपा यहां फंस गई है कि न तो कमल के फूल के खिलाफ वोट मांग सकती है और न ही भाजपा यहां कमल के फूल के पक्ष में प्रचार कर सकती है। ऐसे में भाजपा के नेता उलझकर रह गए है और भाजपा यहां बेकफूट पर है कि आखिर करे तो करे क्या।
– वार्ड 7 में मुकाबला भाजपा प्रत्याशी ललीता गामड़ और निर्दलीय प्रत्याशी जो भाजपा से पूर्व में पार्षद रहे है उनके बीच होने के आसार है। यहां भाजपा के ही मोहन मेड़ा बगावत कर अपनी पार्टी के खिलाफ मैदान में है। वह भाजपा प्रत्याशी ललीता गामड़ को टिकट देने से नाराज है। अब यहां देखना दिलचस्प होगा कि किस प्रत्याशी के खाते में जीत मिलेगी।
– वार्ड 8 में भाजपा-कांग्रेस सहित 3 उम्मीदवार निर्दलीय है। हालांकि यह वार्ड अजा वार्ड है और शुरू से ही यह वार्ड भी भाजपा का ही रहा है। माना जा रहा है कि यहां भाजपा प्रत्याशी येन केन प्रकरण निकल जाएंगे। हालांकि यहां एक जो निर्दलीय प्रत्याशी है वह भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाएगी, लेकिन यह भी जरूर है कि उन पर भी कई आरोप लगे है, जो उन्हें नुकसान करेंगे।
– वार्ड 9 में जिस प्रत्याशी को भाजपा ने टिकट दिया है उससे अन्य भाजपाई नाराज है और निर्दलीय मैदान में है। यहां पूर्व परिषद में उपाध्यक्ष रही माया सतोगिया के पति सत्यनारायण राजू सतोगिया बगावत कर निर्दलीय चुनाव में है। इसी के साथ एक अन्य प्रत्याशी अनुपम भंडारी भी निर्दलीय मैदान में है। यह सभी भाजपा का खेल बिगाड़ेंगे।
– वार्ड 10 में मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच है। यहां भाजपा ने संजय चाणोदिया को टिकट दिया है, जिन पर भू-माफिया होने के आरोप लगते आए है। अब यह कारण यहां भाजपा को डेमेज कर रहा है। यहां कांग्रेस भाजपा प्रत्याशी को पूरजोर टक्कर देगी।
– वार्ड 11 में भी मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी यहां कमजोर नजर आ रही है। देखना होगा यहां दोबारा भाजपा को जीत मिलती है या इस बार जनता बदलाव करती है।
– वार्ड 12 में मुकाबला भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच है। यहां भाजपा ने जिसे टिकट दिया है उनके पति पर भी सट्टा किंग होने के आरोप लगे हुए है और यही वजह है कि भाजपा के कद्दावर नेता आजाद गुगलिया ने इन्हें टिकट दिए जाने के बाद भाजपा से बगावत की और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में डट गए।
– वार्ड 13 में भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला होने के आसार है। यहां 4 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में है। जो भाजपा प्रत्याशी को डेमेज करेंगे और माना जा रहा है कि यहां जनता बदलाव करेगी।
– वार्ड 14 की बात करे तो यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होगा। यहां भी जनता बदलाव के मुड़ में है, क्योकि बीते 5 वर्ष में जो भाजपा के पार्षद रहे उन्होनें कभी भी वार्ड में झांककर नही देखा, जिससे यहां के वार्डवासी खासे नाराज है।
– वार्ड 15 की बात करे तो यहां मुकाबला त्रिकोणीय है। यहां भी माना जा रहा है कि जनता इस बार बदलाव चाहती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाली 27 सितंबर को जनता किसके पक्ष में वोट करती है।

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