क्या वार्ड नम्बर 14 से मनुबेन को टिकट देना उचित रहेगा…? झाबुआ की जनता संतुष्ट है या नही..!

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वॉईस ओफ़ झाबुआ

ऐसा लग रहा है इस बार नगर पालिका चुनाव नही कोई दंगल हो रहा है… और सभी अपनी अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए है.. ऐसेें आखिर टिकट किसे दे ये स्थिति भी सही ढंग से तय नही हो पा रही है ये स्थिति भाजपा ही नही काँग्रेस की भी नजर आ रही है. अब चाहे पुराने पार्षद हो या फिर नए युवा ऐसे में वार्ड नम्बर 14 से पूर्व नगर पालिका अध्यक्षा मनुबेन डोडिया भी अपनी दावेदारी कर रही है… और वहां से पार्षद के लिए कांग्रेस से अपनी टिकट मांग रही है।
अब बात यहां अटक रही है कि क्या मनुबेन ने अध्यक्ष पद पर रहते हुए 5 साल जनता का विकास किया या फिर अपना और अपने साथियों का…. जनचर्चा है कि इस बार रही परिषद में अध्यक्ष पद पर रहते हुए महोदया ने विकास कार्य तो नही किए… इनसे जनता पुरी तरह ना खुश है… और अब टिकट देना उचित नही रहेगा… ये हम नही कर रहे है ये नगर की जनता की आम चर्चा है क्योंकि अध्यक्ष पद पर रहते हुए मनमोहन की तरह चुप्पी साधे अध्यक्षा महोदया ने 5 साल निकाल दिए… न तो नगर की जनता से संपर्क साधा और न ही कोई पहल की ऐसे में एक बार फिर वार्ड नम्बर 14 से टिकट मांगना कहा तक उचित रहेगा… जनता का कहना है कि वार्ड नम्बर 14 से कोई नए चेहरे को टिकट दी जाये ताकी वो वार्ड का विकास कर सके। कांगें्रस आला कमान को भी देखना चाहिए कि नगर का विकास हुआ या फिर नही तभी टिकट देना चाहिए बाकि वार्ड की जनता तो नही चाहती है कि मनुबेन को टिकट मिले… ये वार्ड की जनता का कहा है… अब आलाकमान को विकास कार्य देखना है तो नगर कि उत्कृष्ट सडक ही देख ले कि किस तरह से वो थेगलो में तबदील हो चुकी है… सडक तो नजर ही नही आ रही है… भले ही ये भाजपा की परिषद में स्वीकृत होकर बना हो… मगर बाकि का जो काम था वो तो कांग्रेस की परिषद को ही करना था… ज्यादा दुर की बात न करे तो नगर पालिका परिषद के पास ही कुछ रसुखदारों को नीजि लाभ देने के लिए नाले पर पुल बना कर विशेष तौर पर रोड बना कर सहयोग प्रदान किया… नगर के कई वार्डो में जो डामरीकरण हुआ उसमें डामर तो कही नजर रही आ रहा था हां काला आॅइल सडकों पर जरूर बह रहा था… मामले तो बहुत है… अब आला कमान को सोचना होगा…टिकट किसे दे… कही ऐसा न हो कि टिकट देकर बाद में पछताना पडे।

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