बागी तो बगावत करते रहेगे भाजपा आलाकमान सोच समझ कर ले निर्णय

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वॉईस ऑफ झाबुआ

नगर पालिका चुनाव क्या आये और कुकरमुत्तों की तरह नेता भी बहार आने लगे है। बडी बात तो यह है कि बार बार बगावत करने वाले भी अपने तेवर दिखा रहे है। जिन्होने भाजपा को हरवाने या फिर यूं कहे भाजपा की छवि धुमिल करने में कोई कसर नही छोडी अब वो भाजपा से पार्षद का चुनाव लडने के लिए न जाने किस मुंह से पार्टी से टिकट मांग रहे है और भगवान उन बडे नेताओं को सदबुद्धी दे कि जो ऐसे बागयों के लिए टिकट मांग रहे है जो पहले ही भाजपा के खिलाफ दुसरों को फार्म भरवा रहे है।
ये हाल झाबुआ के एक वार्ड में नही पूरे 18 वार्डो में है तो भाजपा की
रोटी खाते है और भाजपा की ही बजाते है। ऐसे लोगों का आलाकमान को विशेष ध्यान देना चाहिए। आखिर इनका विरोध हो क्यों रहा है। पार्टी से बगावत करने वालों ने ही भाजपा की लुटिया डुबोई है…!जी हां हम बात कर रहे है वार्ड क्रमांक 08 की जहां भाजपा से 4 लोगों ने फार्म डाला है और पार्टी से टिकट मांग रहे है। इनमें से भाजपा के बागी भी है और हारे हुए भी जिन्हे सिर्फ अपना रोब झाडना है हार गए तो पार्टी के पदाधिकारियों पर ठिकरा फोडना है। झाबुआ के वार्ड क्रमांक 08 में माथुर साहब दो बार हारने के बाद एक बार फिर भाजपा से टिकट मांग रहे है। सुना तो ये भी है कि वो गली मोहल्लों में जाकर ये कहते नजर आ रहे है कि सांसद
साहब ने तो मेरी टिकट तय कर दी… सोचने वाली बात तो यह है कि दो बार हारे हुए प्रत्याशी पर क्या भाजपा अपनी मोहर लगाएगी… क्या सांसद ऐसे हारे हुए प्रत्याशी पर दाव आजमांयेगे… ये तो समझ से परे है… ।
अब बात करते है पार्टी से कई बार बगावत करने वाले की जो अपनी हठधर्मिता के चलते पार्टी को हमेशा नुकसान पहुंचाते ही आया है… सुनने में आ रहा है कोई भाजपा नेता और संघ पदाधिकारी से ये अपनी टिकट के लिए दबाव बनवा रहा है… ताकि एक बार फिर भाजपा को नुकसान पहुंचा सके। सोचनिय बात तो यह है कि उन बडे भाजपा नेता और संघ पदाधिकारी को सोचना चाहिए जो पार्टी को बार बार बगावत कर नुकसान पहुंचा रहा है उसकी पैरवी कैसे करें? ऐसी कई घटनाये और मामले है जिसके लिए भाजपा आलाकमान को इस बागी को टिकट देने से पहले बडे सोच समझ कर विचार करना होगा ताकि आने वाले समय में ये बागी
भाजपा को चोट न पहुंचा सके।

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