जो लोगों के घरों में डालता है गुमनाम लेटर…!

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वॉईस ऑफ झाबुआ

 

जरां पता लगाना तो… कौन है ये गोलु भिखारी… सुना है बिन पेंदे के लौटे की तरह भियां… ये कभी इधर लुडकता है तो कभी उधर लुडकता है… काम नी बने तो भियां पिछे से वार करता है… आगे से वार करने की तो हिम्मत है नी… सुना है इस गोलु भिखारी की कोई रिश्तेदार है… जिसके कलमगटटे नेता से ऐसे अवैध संबंध है कि भियां ये उनकी दलाली कर नेताओं से अपना फायदा उठवाता है… कोई भी काम हो… सिधा पहुंचता है भोपाल और उन नेताओं से अपना काम करवाता है… नेता भी क्यों न इसका काम करें। क्योंकि अवैध संबंधों की नस जो इसने पकड रखी है… अब आप ही बिताओं भियां यें चमडी का दल्ला… अपने खुन के रिश्तों को तार तार रहा है तो आप ही सोचिये है…क्या करता होगा…. जब अपने ही खुन की दलाली कर सकता है तो दुसरों को क्या छोडेगा…. भियां सुनने में तो ये भी आ रहा है कि ये गोलु भिखारी थांदला में लोगों के घरों में गुमनाम लेटर डालता है… एक बार नहीं। दो से तीन बार इसने गुमनाम लेटर डाले… बाद में ये सीवीटीवी केमरे में केद हो गया ओर इसका भांडा फुट गया! जहा इसका काम नी बनता है वां ये ऐसे काम करता है… और लोगों को परेशान करता है… कोई ऐसी जगह नही होगी जहां ये दलाली करता होगा… इसके कारनामों की वजह से थांदला के एक भाजपा नेता के बेटे ने इसकी जमकर लु उतारी ऐसी लु भी ऐसी उतारी की कान के किडे मर गए थे… अब भियां कुछ अधिकारियों के भी मुंह लगा हुए है और उनकी दलाली करता है… ऐसे में अवैध जमीनों के मामले में इसका हाथ जरूर होता है… अधिकारी भी खुश और इसकों भी चंद टुकडे मिल जाते है… और अधिकारियों के लिए हनियां भी परोसता है… किसे परोसता है ये अगले अंक में बतायेगा… बाकि कोई इस कहानी को अपने उपर न ले… हमने तो सुना था और पता लगा रहे है… अगर बुरा लगे भी तो दो रोटी ज्यादा खा लियो… पर एक बात है हम तो नंगे है और नगे के नौ ग्रह बलवान होते है… ये जो अधिकारियों के साथ कागजों का खेल खेला है… वो तो हमारें पास दर्जनों में पडे है… पर अब भियां इस गोलु भिखारी का पता लगा कर इसकी चडडी तो उतरेगी… चुनाव तो लडे… हार भी तय है…।

बाक़ी अगले अंक में……

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