गिट्टी की जगह मिट्टी डालकर बनाया गया जोबट नानपुर रोड, करोडो रुपए की लागत से बन रहा जोबट-खट्टाली व नानपुर रोड चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट, समाचार लगने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी नही ले रहे सुध

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अलीराजपुर- रितेश लोहार

मिली जानकारी के अनुसार जोबट वाया खट्टाली नानपुर 22 किलोमीटर लंबे रोड मार्ग करीब 67 करोड़ रुपये की लागत बनाया गया है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं और नही प्रशासन इस पर कोई निगरानी रख रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने बताया कि जोबट खट्टाली नानपुर से आने वाले करोड़ो रूपये की लागत से सड़क निर्माण का कार्य किया जा रहा है जिसमे सड़क पूरी तरह से गुणवत्तापूर्ण नही बनाई जा रही है मिट्टी मिली हुई गिट्टी डाली जा रही है मुरुम की जगह आस पास की धूल डाली जा रही है जो कभी भी सड़क उखड़ कर पानी मे बह जाएगी। देखने में तो बहुत कुछ हो सकता हे। मगर कोई भी अधिकारी या रोड निर्माण के इस मामले को पूर्ववर्ती अफसरों के कार्यकाल की करतूत बताकर मौजूद अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। जनप्रतिनिधि इस और ध्यान नहीं दिया जा रहा है आपको बता दे कि कई वर्षी से इस मार्ग की मांग ग्रामीणों के द्वारा की जा रही थी

कांग्रेस की लगभग 15 महीने की सरकार मैं हुआ था काम चालू

आम जनता की मांग पर प्रदेश कांग्रेश कमलनाथ की लगभग 15 महीने की सरकार ने यह सड़क करोड़ो रूपये की लागत से बनाने का ठेका दिया व काम भी लगभग पूर्ण होने को हे लेकिन काम पूर्ण होने से पहले ही सड़क पर किया जा रहा मिलावटी मटीरियल आम लोगो के लिए आक्रोश बनता जा रहा है ठेकेदार भी कभी कभार देखने आते है सभी काम लेवर मेट पर पूरा किया जा रहा है

कांग्रेस की लगभग 15 महीने के कार्यकाल में हुआ था 67 करोड़ रुपए के रोड का भूमि पूजन

कांग्रेस पार्टी की लगभग 15 महीने की सरकार में 67 करोड़ रुपए के रोड का भूमि पूजन जिले के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल के द्वारा गुरुवार दोपहर 1 बजे किया गया था । उक्त रोड की क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग थी जो पूर्व क्षेत्रीय विधायक स्वर्गीय कलावती भूरिया के अथक प्रयासों से संपन्न हुई रोड स्वीकृत हुआ था जिसमें जोबट खट्टाली नानपुर मार्ग की लंबे समय से मांग चल रही थी जिसे पूर्व क्षेत्रीय विधायक स्वर्गीय कलावती भूरिया ने प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा से मिलकर विशेष पहल कर उक्त मार्ग स्वीकृत कराया गया था जिसमें उक्त मार्ग का भूमिपूजन जिले के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल के द्वारा किया गयाथा जिसमें
जोबट पूर्वक्षेत्र की विधायक स्वर्गीय कलावती भूरिया एवं अलीराजपुर क्षेत्र के विधायक मुकेश पटेल तथा जिला कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष महेश पटेल व जोबट उदयगढ़ भाबरा के जनपद अध्यक्ष भी मौजूद थे।

निर्माण एजेंसी के द्वारा नया पुल बनवाना था लेकिन कमीशन खोरी की चक्कर में वह ठेकेदार की सांठगांठ से है पुराने पुल को नया पुल बनाकर बता दिया गया

भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने के लिए लाख प्रयासों के बावजूद भी भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसा ही मामला नानपुर खट्टाली जोबट 67 करोड़ों रुपए की लागत से बन रहा बाईपास रोड कहां है जहां पर सरकारी धन का दुरुपयोग एवं संबंधित अधिकारी मिलकर बंदरबांट करने का आरोप वहां के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने लगाया और कहा कि यह नानपुर वाह जोबट के बीच जितने भी पुराने पुल पहले बने हुए थे उसको ठेकेदार वह निर्माण एजेंसी के द्वारा नए पुल बनाए हुए बताएं दिए गए
विकास कार्य में प्रयोग नहीं किया गया धन को बंदरबांट कर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। शिकायत करने के बाद जो भी संबंधित अधिकारी यहां आए खानापूर्ति करके चले गए और कोई वास्तविक जांच नहीं हुई इसलिए निर्माण एजेंसी वो ठेकेदार के हौसले बुलंद है और आला अधिकारी इस भ्रष्टाचार को हवा दे रहे हैं। जब शिवराज सरकार भ्रष्टाचार से मुक्ति करने का सरकार वादा कर चुकी हैं ।फिर भी सरकारी धन को बड़ी निर्भीकता के साथ पलीता लगाया जा रहा है।

जहां नेता.निर्माण एजेंसी और ठेकेदार के बीच मिलीभगत हो जाए वहां निर्माण कार्य का भगवान ही मालिक है।

जीता-जागता उदाहरण है 22 किलोमीटर लंबा नानपुर- खट्टाली -जोबट मार्ग अब से दो साल पहले 67 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा बाईपास यह डामर रोड पहली बरसात में पानी में बह गया था। तब से अब तक इसकी दशा दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती चली गई। आज मौके पर रास्ता तो है मगर डामर रोड पूरी तरह से नदारद हो चुकी है। ग्रामीणों की मांग और जनप्रतिनिधियों के सतत प्रयासों से स्वीकृत यह रोड ठेकेदार एजेंसी के द्वारा बनवाया जा रहा है। रोड के जड़ से उखड़ जाने व आवागमन में असुविधा होने के कारण ग्रामीणों में जबर्दस्त आक्रोश है। विभाग और ठेकेदार को पानी पी-पीकर कोसने वाले ग्रामीणों की शिकायत शासन और प्रशासन के कारिंदों के मौन को लेकर भी है। शिकायतों के बाद भी विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार वह एजेंसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंग पाई है।

टिकाऊपन पर उठे थे सवाल

इसके रोड टिकाऊपन व काम की गुणवत्ता को लेकर सवालिया निशान लगने शुरु हो गए थे। विभागीय अधिकारियों से लेकर प्रशासन तक का ध्यान घपलेबाजी की ओर आकृष्ट कराया जा रहा था। बावजूद इसके ठेकेदार के साथ मिलीभगत किए बैठे विभाग के अधिकारियों ने अपने कानों से रुई बाहर नहीं निकाली। नतीजा यह रहा कि निर्माण के बाद पहली बरसात की बौछारों ने गिट्टी और डामर के नसीब में वियोग लिख दिया। अब डामर और गिट्टी नाम की चीज मौके पर ढूंडे से मौजूद नहीं है।

5 साल की गारंटी दरकिनार, पेंचवर्क कराकर निपटाया

सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य के बाद उसके रख-रखाव की गारंटी 5 साल की होती है। गारंटी पीरियड में ठेकेदार निर्माण की सलामती को लेकर जिम्मेदार होता है। इसी गारंटी के आधार पर उसे भुगतान भी किया जाता है। नानपुर खट्टाली जोबट रोड के मामले में इस नियम का भी ध्यान नहीं रखा गया है।

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