15 हजार शिक्षकों को भोपाल में प्रशिक्षण के नाम पर मुख्यमंत्री,मंत्री अपनी राजनीति चमकाने में लगे -कांतिलाल भूरिया

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झाबुआ

3 सितम्बर झाबुआ जिले सहित आसपास के आदिवासी बहुल जिलों में शिक्षा बेहाल है कोई देखने या मानिटिरिंग करने वाला नहीं है। आदिवासी क्षेत्रों में ना शिक्षक है ना छात्रावासों में मूलभूत सुविधा प्राप्त हो रही है जिससे छात्र -छात्राएं परेशान है। छात्रों को सडकों पर उतरना पड रहा है। लेकिन सरकार अपनी राजनीति चमकाने में लगी है।ना मुख्य मंत्री का इस ओर ध्यान है ना ही सबधिंत मंत्रीयों का।शिक्षकों की भर्त्ती में अनावश्यक विलंब किया गया अब चुनाव निकट आते देख कर भर्त्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गयी। मुख्यमंत्री एवं प्रदेश के मंत्री अपनी राजनीति को चमकाने के लिए अब शिक्षकों को प्रशिक्षण देगें इस पर भी सवाल उठाये है एवं कहा शिक्षक स्वयं प्रशिक्षित उपरान्त ही वे नोकरी के लिए पात्रता रखते है।
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता साबिर फिटवेल ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त आरोप पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं झाबुआ विधायक कांतिलाल भूरिया ने सरकार पर लगाते हुए कहा कि झाबुआ जिले में थांदला से झाबुआ तक बच्चे पैदल अपनी समस्याओं के लिए आ जाते है लेकिन थांदला मेघनगर के प्रशासकीय अधिकारीयों के कानों कान खबर नहीं होती है यदि थांदला मेघनगर के अधिकारी समय रहते समस्याओं पर ध्यान दे देते तो गरीब आदिवासी बच्चों को छात्रवृति के लिए झाबुआ तक 30 कि.मी. पैदल नहीं चलना पडता। जब इतने इक्ठठे होकर छात्र थांदला से निकले तो क्या वहां के अनुविभागीय अधिकारी एवं अन्य जनपद स्तरीय अधिकारीयों को खबर नहीं थी कि वे बच्चों को रास्ते में रोक कर उनकी समस्या का वहीं हल कर देते घ् इसी प्रकार पिटोल में भी बच्चों द्वारा आन्दोलन किया जा रहा है वहां भी छात्रों को स्कुल में भवन एवं शिक्षकों की समस्या है किन्तु झाबुआ जिले सहित सभी आदिवासी बहुल जिलों में यही हालत है जिला प्रशासन एवं जनजातिय कल्याण विभाग का कोई ध्यान नही है। केवल कागजों पर कार्य हो रहा है।
भूरिया ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में प्रभारी मंत्री अथवा जनजातिय कल्याण विभाग के मंत्री कभी जिलों का दौरा नहीं करते है।बच्चों को स्कूल युनिफार्म नहीं मिली ना साईकिल वितरण हुआ ना छात्रवृर्त्ती मिल रही है, स्कूलों में शिक्षकों की कमी है,विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं है,भवन जर्जर हो गये है पीने का पानी नहीं है साथ ही छात्रवासों की हालत तो अत्यन्त ही खराब है वहां पर ना छात्रों के लिए बिस्तर है ना पंलग है पीने का पानी भी नही मिल रहा भूरिया ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि अधीक्षकों से पद रूपये लेकर भाजपा के नेताओं के द्वारा प्रशासन पर दबाव बना कर नियुक्ती कराई जा रही है छात्रावासों में भाजपा के पदाधिकारी घटिया सामग्री सप्लाय कर रहे है जिससे छात्रावासों की यह हालत हुई है।
मुख्यमंत्री चुनाव निकट आते देख कर स्कुलों में शिक्षकों की भर्त्ती की घोषणा कर रहे है जबकि पात्र शिक्षक तीन वर्षाे से नौकरी का इंतजार कर रहे है कई तो अपनी आयु पूर्ण कर चुके है लेकिन पात्र होने के बाद भी उन्हे नौकरी नहीं मिली है अब चुनाव निकट को देखते हुए ताबडतोब नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है।
भूरिया ने चार सितम्बर को एक दिवसीय प्रशिक्षण पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री तथा जनजातिय कल्याण विभाग के मंत्री केवल अपनी राजनीति स्वार्थ के कारण 15 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की नौटंकी भोपाल में की जाने वाली है जबकि शिक्षक स्वयं प्रशिक्षत है तथा उसके उपरान्त ही वे शिक्षक बने है क्या यह नीतिगत निर्णय है कि इतनी बडी मात्रा में पूरे प्रदेश से 15 हजार शिक्षकों को इक्कठा कर प्रशिक्षण दिया जावेगा। भोपाल में प्रशिक्षण के नाम पर लाखों रूपया खर्च करने के बजाय वह पैसे स्कुलों में देना चाहिए,जिससे स्कुलों की हालत सुधरे।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्मल मेहता, कार्यवाहक अध्यक्ष हेमचन्द्र डामोर, रूपसिंह डामोर, कोषाध्यक्ष प्रकाश रांका, पूर्व विधायक जेवियर मेडा, शहर अध्यक्ष गौरव सक्सेना, युवक कांग्रेस अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य विजय भाभर, समाज कल्याण बोर्ड के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र शाह ग्रामीण अध्यक्ष बन्टू अग्निहोत्री,एनएसयुआई अध्यक्ष विनय भाभर पूर्व जनपद अध्यक्ष शंकरसिंह भूरिया मानसिंह मेडा युवा नेता आशीष भूरिया जितेंद्र सिंह राठौर गौरव सक्सेना महिला कांग्रेस एवं सेवादल पदाधिकारीयों आदि ने भी आदिवासी क्षेत्रों में स्कुल एवं छात्रावासों की कमीयों को तत्काल दूर करने की मांग की है अन्यथा कांग्रेस पार्टी भी स्कूल छात्रों के साथ मिलकर पूरे जिले में आन्दोलन करेंगी।

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