नगर में गोवंश की दुर्दशा पर नगरवासियों में नाराजगी

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 भारतीय संस्क्रति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है इसलिये इन्हें गोमाता के नाम से भी न सिर्फ पुकारते है बल्कि देवतुल्य मानकर गाय की पूजन भी हमारे देश मे की जाती है। गाय को भगवान और माता के समान दर्जा देने और इनकीं महता को बताने के लिये हम धर्म और पुराणिक गर्न्थो में कई वर्णन  है ।

गो सरंक्षण के हो रहे पूरे देश मे हो रहे प्रयास

पूरे देश मे जहां गोमाता के सरंक्षण के लिये अभियान चलाए जा रहे है ,कई सामाजिक और धार्मीक  संघठन इनके लिये कार्यरत हे असंख्य गोशालाये खुली हुई है , पहली रोटी गाय की   के विचारों के साथ हर घर मे खाना बनने से पहले गो रोटी निकालने की परम्परा है और हर घर मे एक गाय रखकर उनकी सेवा करने की बातों पर लगातार प्रचार प्रसार हो रहा है, ओर मीडिया तथा सोसल मीडिया पर गो सवंर्धन ओर गो रक्षण की पोस्ट लगातार  देखने को मिलती है ।

नगरवासियों मे  नाराजगी

इतने सारे प्रयास होने के बावजूद नगर में इन दिनों पुज्नीय गो मातां कीं दुर्दशा ओर  अनदेखी के चलते  ओर गोपालकों की लापरवाही के कारणों से इन दिनों नगरवासियों में खासी नाराजगी देखने को  मिल रही है ।

रोड पर बैठे रहती गाय ओर पशु

मोर प्रेमी ओर समाजसेवीनगरवासी जितेंद्र कटकानी
ने बताया की  नगर में मुख्य मार्गो ओर सड़को तथा अंदरूनी मार्गो पर गाय ओर अन्य पशुओं का झुंड खड़ा ओर रात्रि में बैठा ही रहता है जिसके चलते वाहन चालकों ओर  पैदल चलने वालों  को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । वही हटाने या भगाने पर कई बार पशु आक्रामक भी हो जाते हैं।  साथ ही सड़कों पर दोड़ने से भी कई लोग इनकीं चपेट में आकर घायल भी हो चुके है।

पालकों को दूध से मतलब भूखे प्यासे भटकते पशु ओर गो

वरिष्ठ व्यापारी ओर समाजसेवी किशोर सोनी
ने बताया कि नगर ने अधिकांश पशु पालकों की लापरवाही  देखने को मिल रही है कई गोपालक  गायों को सुबह शाम दूध निकालने के बाद खुला छोड़ देते है ओर उनकी देखभाल ओर चारा पानी की व्यवस्था नही करते जिससे पशु भूखे प्यासे भटकते रहते है जिसके चलते वे कूड़ा, कचरा ,गन्दगी ओर प्लास्टिक तक खाते है जो पशुओं को न सिर्फ बीमार करता  बल्कि पशुओं के प्राण तक संकट में पड़ जाते है। पशु पालकों को दूध दुहने के अलावा पशुओं की देखभाल भी करना चाहिए।

प्रसव के दौरान परेशान होते पशु

नागरिक पीयूष पटवा

ने बताया कि  आये दिन  पशु पालकों की लापरवाही से कई बार गायो को प्रसव के समय भी खुला छोड़ दिया जाता है जिससे कई बार गो माता को प्रसव के समय दिक्कतें आती है  ओर कुत्ते आदि भी नवजात पशु ओर गाय को नोच कर घायल कर देते है ।कई बार नगरवासियों ने प्रसवरत गाय की देखभाल, सेवा यहां तक कि प्रसव भी करवाया है । कई वार नगर के प्रतिष्टित  सोसल मीडिया ग्रुप पीएनपी  और वॉट्सपग्रुप ओर फेसबुक पर आए दिन इस प्रकार की प्रसव से पीड़ित गायों के मालिको को सूचना देकर खबर करवाना पड़ता जो सीधा पशु ओर गो पालकों की लापरवाही दर्शाता है।

होना चाहिए एफआईआर

नगर की एक मात्र गोशाला ओर जीवदया समिति के महेंद्र अग्रवाल

ने बताया कि कई बार नगर परिषद ओर प्रशासन खुले में घूमते हुए गोमाता ओर पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाकर उन्हें गोशाला में छोड़ जाते है बाद में पशु मालिक आते है जो कई बार शपथ पत्र पर यह लिखकर गए कि वे अपने पशुओं का ध्यान रखेंगे लेकिन पशु को गोशाला से वापस ले जाने के बाद स्थिती  जस की तस रहती है लगभग 25 अधिक पशुपालक कई बार शपथ पत्र दे चुके है लेकिन पालन नही करते ऐसे लापरवाह पशुपालको पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

गो सेवको का गिरता मनोबल

नगर में गोसेवा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले कृष्ना जाधव, अंकित सेंचा, दीपक राठौर , मांगीलाल राठौर
आदि ने बताया कि कई बार खुले में घूमती ओर परेशान होती गायों को पकड़कर उचित रखरखाव के लिये  पेटलावद, बामनियां, बनी की गोशाला में छुड़वाया गया, पशुपालक  अपनी जिम्मेदारी निभाने की बजाय आकर हमसे विवाद ओर अभद्र व्यवहार  करते है, जिससे गोसेवकों का मनोबल गिरता हे । गायों ओर खुले घूमते पशुओं का उचित रखरखाव होना चाहिए।

समिति बने गोपालक भी  ध्यान दे

नगर में गोपालक ओर गौमाता  के विशेष चिंतक ओम सतोगिया
ने बताया कि घरेलू पशुओं ओर खुले घूम रहे पशुओं की अलग अलग पहचान हो, घरेलू पशुओं विशिष्ट पहचान को पशुपालकों के आधार से जोडा जाए  और नगर में इस प्रकार की समिति भी बने जो ऐसे  खुले घूम रहे पशुओं  की उचित देखभाल करें, नियम का उल्लंघन करने वालो पर कार्यवाही होनी चाहिए। पशुपालन करने वालो को भी अपनि जिमेदारी समझना चाहिए ।

कानून का हो सख्ती से पालन

इस संबंध में नगर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता व नोटरी राजेंद्र  चतुर्वदी
ने बताया कि गोवंश के   संबंध में कानून में गोवंश प्रतिषेध अधिनियम सहित कई प्रकार के कानून बने हुए हैं वहीं नगर में पशुओं की और गौ माता की देखभाल नहीं करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रशासन ओर जनता का  प्रयास करना चाहिए। गाय को घर मे रोटी खिलाने की भारतिय परम्परा का भी पालन होना चाहिए।

प्रशासन  करता रहता है मोनिटरिंग

इस सम्बंध में एसडीएम शिशिर गेमावत
ने बताया कि खुले घूम रहे पशुओं के लिये प्रशासन नगर परिषद के माध्य्म से मुहिम चलाता रहता जल्द ही फिर से मुहिम चलाकर  सख्त कार्यवाही की जावेगी।

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