कलेक्टर साहब…! थांदला क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर भी दो ध्यान?जनता कर रही है मांग

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वाॅइस ऑफ झाबुआ, प्रद्युम्न वैरागी

  लगता है इन दिनों बीएमओ साहब राम नाम जपना, पराया माल अपना की तर्ज पर काम कर रहे है और इस वजह से स्वास्थ्य सुविधाएं लचर सी होती जा रही है। मगर जिम्मेदार इस और ध्यान ही नही दे रहे है। जी हां हम बात कर रहे है थांदला बीएमओ साहब की जिनकी वजह से थांदला क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाएं लचर सी होती जा रही है और इस दिनों बीएमओ साहब कभी घटिया निर्माण कार्य, तो कभी स्टाॅफ नाराजगी… और कभी महिला नर्सेस को प्रताडित करने के मामलों को लेकर सुर्खियों में नजर आ रहे है।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं का तो बुरा हाल है, मुलभूत सुविधाओं के लिए ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र समस्याओं में उलझे पडे है। अब खवासा की ही बात करें तो पिछलें कई महिनों से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में कोई स्थायी चिकित्सक ही नही है। सिर्फ स्टाॅफ नर्स, सुपरवाईजर, एमपीडब्ल्यु व स्वीपर ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चला रहे है। जबकि यहां एक चिकित्सक की नितांत आवष्यकता है। यहां चिकित्सक नही होने की वजह से ग्रामीणों को थांदला पेटलावद, रतलाम और दाहोद अपने ईलाज के लिए जाना पडता है। जिससे उन्हे काफी परेशानी का सामना करना पडता है। हालांकि बीएमओ अनिल राठौड के पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खवासा का चार्ज है मगर वो यहां पर कभी आते ही नही है और अगर आते भी है तो कब आये और चले गए पता भी नही चलता ऐसे में यहां के रहवासी अन्यत्र इलाज करवाने जायेगे ही।

कलेक्टर साहब को देना होगा ध्यान

कलेक्टर सोमेश मिश्रा से खवासा के रहवासी मांग करते है कि उन्हे अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए एक डाॅक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खवासा नियुक्ति किया जाये। सीएमएचओ साहब कोई रहवासियों द्वारा कई बार अवगत करवाया गया मगर एक बार भी उनके द्वारा इस ओर ध्यान नही दिया गया। कलेक्टर साहब बीएमओ साहब भी अपनी दुकानदारी में लगे हुए है उन्हे खवासा क्षेत्र की पडी ही नही है। कलेक्टर साहब जनचर्चा और सुत्रों का कहना है कि बीएमओ साहब को हेराफेरी करने से फुर्सत मिले तो वो स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर ध्यान दे खवासा तो ठिक थांदला के भी यही हाल है। सुना है जो बोलेरो में ये घुमते है वो इनके परिवार की ही बताई जाती है। वार्डो को तोड उनमें पुरानी फे्रम का उपयोग करने में भी पिछे नही हट रहे है। नये पलंग खरीदने की बजाय पुराने पलंगों की ही मरम्मत और पुताई करवा कर रखवा दिए और बिल नए पलंगों के लगाए गए। सुत्रों का तो यह भी कहना है कि ये अस्पताल पर कम और अपनी निजी लेब पर ज्यादा ध्यान देते है। कलेक्टर साहब से खवासा व थांदला वासियों का आग्रह है कि बीएमओ राठौड को खवासा का चार्ज दिया गया है उन्हे वहां पदस्थ किया जाये या फिर उनकी मुलपद स्थापना काकनवानी भेज किसी वरिष्ठ चिकित्सक को बीएमओ का चार्ज दिया जाये ताकि थांदला व उनके आस पास के क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधा व्यवस्थित हो सके।

क्यों नही दे रहे है वरिष्ठ ध्यान

सुत्रों की माने तो थांदला स्वास्थ्य विभाग में जो गोलमाल हो रहा है वो वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में ही हो रहा है और इस गोलमाल के चक्कर में बीएमओ और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए जमकर गांधीछापों की बारिस हो रही है। ऐसे में लाख शिकायत और भ्रष्टाचार उजागर होने के बावजुद भी वरिष्ठ इस ओर ध्यान नही दे रहे है। क्योकि राम नाम जपना पराया माल अपना।

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