रक्तदान ज़िंदगी का महादान,रक्तदान मानव कल्याण रक्तदानी महान

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हर साल 14 जून को विश्व रक्त दान दिवस मनाया जाता है। कई लोग स्वस्थ होते हुए भी रक्त दान करने से डरते हैं, क्योंकि उनके मन में इससे जुड़ीं कई भ्रांतियां होती हैं। खून के अभाव में कई लोगों की जान चली जाती है। ऐसा किसी के भी साथ न हो, इसीलिए 14 जून को रक्‍त दान दिवस मनाया जाता है।

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रक्त दान को प्रोत्साहन देना एवं उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। रक्‍त दान को महादान भी कहा जाता है। इस दिन रक्‍त दान करके लोगों की जिंदगी बचाने का संकल्प लेना चाहिए।
मेघनगर के राजेन्द्र श्रीवास्तव (नीरज) AB पोजेटिव डोनर है जो अब तक 39 बार रक्तदान कर चुके है । वो बताते है कि झाबुआ आदिवासी बहुल है यंहा रक्तदान के लिये जागरूकता की बेहद कमी है यंहा के ग्रामीण जरूरत पड़ने पर ब्लड की मांग तो करते है पर बदले में देने को संकोच करते है तरह तरह के तर्क है उनके पास ,हम कमजोर है,मजदूरी करते है ,हमे डर लगता है ,तुम व्यवस्था कर दो खर्चा दे देंगे…वगैरह । जिसके कारण की अति आवश्यक केस में समय पर मरीजों को खून नहीं मिलता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
नीरज श्रीवास्तव सतत समझाईस देते हुए ग्रामीण युवाओ को रक्तदान के फायदे बताते व रक्तदान के लिए तैयार करके कई जिंदगियों को बचाने में सफल रहे है।
नीरज सामाजिक कार्यकर्ता है जो सक्रिय रूप से समूचे जिले में अपने परिचितों के माध्यम से रक्तदान के कार्य मे लगें है,वो राष्ट्रीय संगठन सक्षम के प्रांत सचिव भी है जो दिव्यांगता के लिए कार्यरत है , जिसमे रक्तबाधित दिव्यांगता भी शामिल है।

निरज बताते है रक्तदान करने के फायदे…
डेढ़ पाव खून का दान करने से आपके शरीर से 650 कैलोरीज कम होती है।
वजन कम करने में खून का दान करने से मदद मिलती है। इसीलिए साल 2 बार रक्तदान करना चाहिए।
आइरन की मात्रा को बैलेंस करने से लिवर हेल्दी बनता है और कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।
रक्तदान से शरीर में एनर्जी आती है। क्योंकि दान के बाद नए ब्लड सेल्स बनते हैं, जिससे शरीर में तंदरूस्ती आती है।
रक्तदान से खून का थक्का नहीं जमता, इससे खून कुछ मात्रा में पतला हो जाता है और हार्ट अटैक की संभावनाएं कम होती है।
खून डोनेट करने से लिवर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। शरीर में ज़्यादा आइरन की मात्रा लिवर पर दवाब डालती है और रक्तदान से आइरन की मात्रा बैलेंस हो जाती है।

रक्तदान महादान

अमित मेहता पेशे से डॉक्टर हैं इन्होंने अपनी जिंदगी में अभी तक 18 बार रक्तदान कर चुके हैं जब भी किसी जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता होती है यह सिर्फ एक बार फोन करने पर रक्तदान के लिए चले जाते हैं और सभी जनता को भी रक्तदान करने के लिऐ पेरित करते हैं।

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