एसपी साहब…जरा इधर भी ध्यान दिजीए..!

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नवागत पुलिस अधीक्षक का झाबुआ जिले में पदभार ग्रहण करते ही लगा था कि अब खाकी को बदनाम करने वाले और खाकी वालों पर नकेल तो कसेगी मगर ऐसा नजर ही नही आ रहा है।बिते कुछ दिनों में कई मामले हुए जैसे नाईनटीज केफे पर विवाद… सटोरिये द्वारा चाकु दिखाना और फिर युवक के साथ मारपीट करने और कल जो जुआरियों को पकडा गया…ऐसा लगता है झाबुआ पुलिस चंद लोगों पर बहुत मेहरबान है…कल ही की बात करें तो सुत्रों के अनुसार जिस जगह जुआ चल रहा था वहां कई जुआरी मौजुद थे जिसमें से 8 धरपकड में आये… मगर खाकी को बदनाम करने वाले पुलिस कर्मियों ने वहीं सौदा कर लिया…और तीन को पकड लाए… और उन्हे भी सेटअप कर कुछ देर में छोड दिया… सुत्रों का तो यह भी कहना है तो छोडे गए उनसे 5-5 हजार और तीन से 3-3 हजार में सेटअप हुआ?वहीं कुछ 50 से 60 हजार रूपये जप्ती में आये थे…झाबुआ थाना मानों वसुली का गढ बन गया हो…. पुलिस अधीक्षक महोदय ऐसा लगता हे की यहां वर्ग विषेष के लोगों को काफी सरंक्षण दिया जाता है…ऐसा नही हो की इस सरंक्षण की वजह से झाबुआ की फिजा ही बिगड जाये…ये आपकी जिम्मेदारी है की इस ढर्रे को सही किया जाये…अन्यथा जो चल रहा है वो समझ से परे है। सुत्रों का तो यह भी कहना है कि थाने के जवान रामप्रताप व अन्य इन सब से सेटअप करते है चाकु दिखाने वाल सटोरियेे से 25 हजार रूपये महिने में इसी ने बंदी करवाई है और कल जुआरियों वाले मामले में भी जुआरियों को संरक्षण देने में इसी की भूमिका विशेष है और जनचर्चा यह भी है थाना प्रभारी को भी ऐसे ही कर्मी पसंद है…इनकी भी अलग दांस्ता है वो अगले अंक में हम बतायेगें…।

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