गगनभेदी जयकारों के साथ संयम रुचिका साध्वीश्री संयमप्रभाजी ठाणा 7 का कल्याणपुरा में हुआ मंगल प्रवेश

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आचार्यश्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी की आज्ञानुवर्तिनी संयम रुचिका साध्वीश्री संयमप्रभाजी, प्रज्ञाजी, सुज्ञाजी, हितज्ञाजी, सोम्यप्रभाजी, प्रेक्षाजी, निष्ठाजी ठाणा 7 का कल्याणपुरा में शुक्रवार को मंगल प्रवेश हुआ। साध्वी मंडल का पेटलावद, बामनिया, खवासा, थांदला, मेघनगर, झाबुआ आदि क्षेत्रों में धर्म प्रभावना करने के पश्चात यहां पदार्पण हुआ। साध्वी वृंद की अगवानी हेतु बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ व बच्चों का सैलाब श्रद्धा के साथ उमड़ पड़ा। बच्चे-बुजुर्ग श्रावक-श्राविकाएँ बड़ी संख्या में दूर तक पैदल चलते हुए साध्वीश्री संयमप्रभाजी आदि ठाणा 7 की अगवानी में पहुँचे।

जयकारों से गगन गुंजायमान हो गया

मंगल प्रवेश यात्रा के दौरान श्रावक-श्राविकाएँ व बच्चें श्रमण भगवान महावीर स्वामी, आचार्यश्री उमेशमुनिजी, प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी, साध्वीश्री संयमप्रभाजी व साध्वी वृंद की जय जयकार और गुरु गुणगान करते हुए चल रहे थे। इस दौरान मानो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि गगन गुंजायमान हो गया। मंगल प्रवेश यात्रा में छलकते उत्साह के साथ श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। मंगल प्रवेश यात्रा के दौरान ‘थांदला के नन्दन-कोटि कोटि वंदन’, ‘संयम इनका सख्त हैं, तभी तो लाखों भक्त हैं’, ‘श्रमण संघ की शान हैं, उमेश गुरु महान हैं’ आदि ऐसे अनेक जयघोष के साथ प्रवेश यात्रा नगर के प्रमुख मार्ग से होती हुई स्थानक भवन पर पहुंची। वहां श्रावक-श्राविकाओं व बच्चों ने साध्वी वृंद को सामूहिक वंदना कर विहार की सुखसाता पूछी एवं साध्वीश्री संयमप्रभाजी के मुखारविंद से मांगलिक श्रवण की। गौरतलब हैं कि साध्वी वृंद महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में विचरण कर एक लंबे अंतराल के बाद मध्यप्रदेश के विभिन्न नगरों व गावों में विचरण करते हुए कल्याणपुरा नगर में पदार्पण हुआ हैं। साध्वी मंडल का इस वर्ष मध्यप्रदेश के राजगढ़ नगर में वर्षावास होगा।

सुनहरे अवसर का लाभ लेवे

संयम रुचिका साध्वीश्री संयमप्रभाजी एवं साध्वी वृंद के सानिध्य के इस सुनहरे अवसर का पूरा पूरा लाभ लेने का श्रीसंघ ने समस्त श्रावक – श्राविकाओं से अनुरोध किया हैं। इसके अंतर्गत प्रतिदिन राई प्रतिक्रमण प्रातः 4 : 40 बजे (श्रावक का पृथक स्थानक भवन पर), श्रावक वर्ग की क्लास प्रातः 6 : 15 से 7 बजे तक, व्याख्यान प्रातः 9 से 10 बजे तक, दोपहर 2 से 3 : 30 बजे तक जिज्ञासा क्लास, शाम 7 : 05 बजे देवसीय प्रतिक्रमण (श्रावक का पृथक स्थान पर) होगा।

नवकारसी का आयोजन हुआ

इस अवसर पर नवकारसी का आयोजन भी रखा गया। जिसका लाभ जयंतीलाल अनुपकुमार घोड़ावत परिवार ने लिया।

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