आरोपियों को बचाने लगे जुगत में, लक्ष्मी यंत्र के सामने नतमस्तक हुई पुलिस…? क्या कियोस्क संचालको की होगी जांच

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वाॅइस ऑफ झाबुआ, निकलेश डामोर

लोगों को लुट कर अपने घर आबाद करने वालें ठग अर्पित, संदेश, अंकित और हर्षित अब फरार है… और अपनी लुगाईयों को भी गिरवी रख पैसे कमाने वाले भाजपा कांग्रेस नेता इन काले कारनामें करने वालों को बचाने में लगे है। क्योंकि इनसे इन्हे लक्ष्मीयंत्रों की प्राप्ती होगी तभी तो इनके बच्चे पलेंगे… नहीं तो भुखे मर जायेगे… झाबुआ आदिवासी बाहुल्य जिला होने के बाद आदिवासी नेता इस काले कारोबार को बढावा देने में लेगे है… सुत्रों की माने तो एक नंदु नाम का नेता है जो आये दिन सब को उंगली करता रहता है और इस कांड में इसका पोता भी शामिल है इसी ने खवासा चौकी पर विधायक को बुलवाया था। इन बाप दादा और पोते का उल्टे सीधे काम करने में ही मन लगता है और लोगों को उंगली करने में भी।
करोंडों का खेल है जिसमें कई लोग शिकार हो चुके है मगर पुलिस भूमिका संदेहास्पद है सुत्रों की माने तो थांदला थाना प्रभारी कौशल्या चौहान से इनकी भेंट भी हुई है जिसके बाद भाजपा के दलालों द्वारा जमानत हुई। सुत्रों तो ये भी बताते है आईडी डिलीट करने में एक बडा गठजोड हुआ है तभी तो थाना प्रभारी न आगे कुछ कर रहे है और न ही चौकी प्रभारी। जबकि मोबाईलों की जांच से पहले अगर इन चारों से पुछताछ हो जाती तो कई बडे नामी चेहरे उजागर हो सकते थे मगर न जाने क्यों पुछताछ भी नही की जा रही है मतलब तो साफ है। सुत्रों का तो यह भी कहना है कि एक जवान के पास मोबाईल भी है जो वो किसी को दे नही रहा है।
करोडों की इस ठगी में कई लोंगों का रूपये फंस चुके है अगर रूपयें नही मिले तो आत्महत्या करने पर मजबुर होना पडेगा लेकिन पुलिस लक्ष्मी यंत्रों के चक्कर में कुछ करना नही चाहती है और अगर करेगी तो ये पुलिस की सबसे बडी उपलब्धी होगी मगर लक्ष्मीयंत्रों के सामने सब नतमस्तक है… सुत्रों की माने तो नितीन, अजय, सुरज, पवन, सम्राट, अतुल, तुषार आदि एक एक व्यक्ती ने लाखों की रकम दी है… अगर कियोस्क सेंटर और मोबाईलों की सुक्ष्मता से जांच हो तो दुध का दुध और पानी का पानी हो जायेगा… कियोस्क सेंटरों की बात करें तो मनीष, हनी और रोहित के कियोस्क सेंटर की जांच हो तो ये लेनी देनी रिकार्ड आसानी से उपलब्ध हो सकते है मगर पुलिस ने ऐसा नही किया क्योकि लक्ष्मी यंत्रों के सामने सब नतमस्तक है… पेटलावद के एक कियोस्क से भी गोवा की इस लुट कंपनी से लेनी देनी होती है… रूपयों को लाना लेजाना… विशाल करता है… इन चारों ठगों का मेन गुर्गा विशाल ही है… सुत्रों का तो ये भी कहना है कि इन सब की बैठक एक चाय की दुकान पर है जहां सारी बातचीत होती ये चाय कि दुकान किसी पवन की है… इस खेल में पवन का भी हाथ है…।
सुनने में तो ये भी आ रहा है कि कुछ लोगों कह रहे है हमने तो ब्याज पर पैसे दिए है ब्याज पर पैसे दिए तो आप लोगों के पास ब्याज पर पैसे देने का लाईसेंस है… ये भी जांच का विषय है। ऐसे में इन 10 से 20 प्रतिशत पर ब्याज पर देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इन सुदखोरों को आदिवासी क्षेत्र में ब्याज पर पैसे देने को लेकर मामला दर्ज कर उनका जुलुस निकालना चाहिए। बाकि अगले अंक में…

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