1 बल्ब जलाने के बदले मिल रहे हैं 5 आंकड़ों वाले बिजली बिल

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निलेश डावर – शाहिद जैनब
मध्य प्रदेश मे भाजपा सरकार चुनाव के समय तो किसानों, गरीब,आदिवासी के हितों की बात करती है। देश के प्रधानमंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री किसानों की आय दोगुनी करने की बात करते हैं । लेकिन किसानों के साथ हो रहे आर्थिक शोषण पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रही है। झाबुआ – अलीराजपुर जिले के गरीब आदिवासियों के बिजली के बिल 2000 से 12000 तक के आ रहे हैं। झाबुआ अलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में जहां रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है सिर्फ खेती पर समाज निर्भर रहता है सबसे गरीब व पिछड़े जिले मध्य प्रदेश के हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने विद्युत विभाग को ठेके पर दे दिया है और अब विद्युत विभाग वाले अपने मनमर्जी तरीके से विद्युत बिल गरीबों के हाथों में थमा रहे हैं और बिल समय पर ना भरने पर विद्युत कनेक्शन काट देते हैं। विद्युत विभाग को ठेके पर देखकर लग तो ऐसा ही रहा है कि सरकार गरीब,आदिवासियों की जेब पर डाका डलवाया जा रहा है। जिनके घरों में मात्र एक बल्ब चलता है उनके घर भी 2000 से 12000 तक के बिजली बिल पहुंचा दिए गए एक किसान की वार्षिक आमदनी महज 30 हजार से 35 हजार होती है, उस किसान के घर 12000 का बिजली बिल पहुंचाया जाता है, आदिवासी बहुल क्षेत्र में सरकार आदिवासियों की कमर तोड़ने का काम कर रही है। और टिकरा विद्युत कंपनी के नाम का फोड़ा जा रहा है।
लॉकडाउन की वजह से बिजली बिल माफ का क्या है सच…???
शिवराज सरकार ने 2020 में लॉकडाउन के दौरान आर्थिक गतिविधियां संचालित नहीं होने की वजह से गरीबों के बिल माफ किए थे, लेकिन अभी 2020 के बिलों की वसूली भी जोरों से चल रही है, बिजली विभाग घर-घर बिल पहुंचा रहा है क्या यह गरीब लोगों के साथ शिवराज का छलावा नहीं है..??
क्या किसानों को ठंड में ठिठुर कर मरते देखना चाहती है सरकार
किसान देश का अन्नदाता है ओर देश की सीमा पर तैनात जवान देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर रहा है, तो वही किसान रात भर जागकर बिजली के इंतजार में रात गुजर रहा है, कड़ाके की ठंड में थरथर कांपते हुए किसान अपने खेतों में सिंचाई कर रहा है, लेकिन शिवराज सरकार दिन में विद्युत सप्लाई करने की बजाय रात को महज 4 से 6 घंटे कर रही है। सवाल यह भी है कि थ्री फेस के लिए बिजली बिल किसान समय पर भर देते हैं फिर गरीबों के साथ इस प्रकार का भेदभाव क्यों…? जबकि उद्योगपतियों को लगातार विद्युत सप्लाई की जाती है।
तो क्या नकली वादे थे शिवराज जी
आदिवासी वोट बैंक के नाम पर करोड़ों खर्च कर दिए लेकिन आज भी आदिवासियों की स्थिति वैसे ही है जैसे अंग्रेजो के समय थी आज भी इस क्षेत्र के आदिवासी मनमाफिक ब्याज वसूलने वाली साहूकारी और सरकार के टैक्सों के शोषण से परेशान हैं। आपने बड़ी बड़ी घोषणाएं की लेकिन आज भी क्षेत्र की जनता ठगा सा महसूस कर रही है।

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