लाख कोशिशें फिर भी आदिवासी समाज भाजपा के पक्ष में नही ??

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@ उमेश चौहान

झाबुआ/अलीराजपुर।

मालवा – निमाड़ अंचल के आदिवासियों के लिए विशेष रूप से भाजपा संगठन चिंतित है । पार्टी को संघ के जरिए यह फीडबैक मिला है कि युवाओं पर जयस का प्रभाव बढ़ा है ।

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युवा आदिवासी क्यों व्यवस्था से नाराज हैं ?

यह जानने के लिए भाजपा ने राज्यसभा सदस्य डॉ . सुमेर सिंह सोलंकी , राष्ट्रीय जनजाति आयोग के सदस्य हर्ष चौहान , संघ के इंदौर विभाग के सह संघचालक डॉ . निशिकांत खरे और खरगोन के लोकसभा सदस्य गजेंद्र सिंह पटेल के नेतृत्व में अलग – अलग टीम झाबुआ , अलीराजपुर , बड़वानी , धार , खरगोन और रतलाम जिले में भेजी हैं । यह टीमें पता करेंगी कि युवा आदिवासियों में असंतोष क्यों है ? तमाम योजनाओं के बावजूद आदिवासियों के जीवन स्तर में परिवर्तन क्यों नहीं आ रहा ?

इन टीमों की रिपोर्ट के बाद भाजपा मालवा – निमाड़ अंचल के 22 आदिवासी सीटों के लिए विशेष योजना तैयार करेगी । 2018 में निमाड़ पार्टी ने मालवा अंचल की आदिवासी सीटों में से केवल पंधाना और बागली की सीट पर ही जीत हासिल की थी । बाद में उसे नेपानगर में उपचुनाव में जीत मिली थी । अन्यथा मालवा और निमाड़ अंचल की शेष आदिवासी सीटों पर कांग्रेस विजयी रही थी । इसी कारण से भाजपा 2018 में सरकार नहीं बना सकी थी । यह गलती पार्टी नहीं दोहराना चाहती । इस वजह से भाजपा पूरी तरह से आदिवासी सीटों पर फोकस किए हुए है । संघ परिवार का भी फोकस आदिवासी अंचल में बना हुआ है । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर इंदौर शहर के भाजपा नेता इंदौर जिले के उन होस्टल्स में जा रहे हैं जहां आदिवासी छात्र पढ़ते हैं । इन होस्टल्स में सरकारी और गैर सरकारी दोनों होस्टल शामिल हैं । अब देखते है सरकार आदिवासी समाज के युवाओं को अपने पक्ष में साध पाती है या नही ।

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