भुराघाटा स्कूल पर एक गाय जीवन और मृत्यु के लिए संघर्ष कर रही है देश भर में गो रक्षक ,गो सेवक बनकर घूमने वाले नकली गो भक्तो सेवा का मोका है हाथ से ना जाने दो। जो असली सेवा गाय और बैल की करते है उन आदिवासी सेवको की तो पीट पीट कर जान ले ली जाती है ।

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भुराघाटा स्कूल पर एक गाय जीवन और मृत्यु के लिए संघर्ष कर रही है

देश भर में गो रक्षक ,गो सेवक बनकर घूमने वाले नकली गो भक्तो सेवा का मोका है हाथ से ना जाने दो।

जो असली सेवा गाय और बैल की करते है उन आदिवासी सेवको की तो पीट पीट कर जान ले ली जाती है ।

दिलीपसिंह भूरिया आजाद नगर

आजाद नगर भाभरा के भुराघाटा स्कूल से प्रांगण में बीते एक सप्ताह से किसी अज्ञात व्यक्ति की गाय लावारिश अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही है उस क्षेत्र के आम नागरिक उस गाय को धूप से बचाने के लिए ताड़ के पेड़ के पत्तो से ढककर दिन भर भीषण गर्मी से उसकी रक्षा कर रहे है और कही से घास और पीने के पानी की व्यवस्था कर रहे है लेकिन पूरे देश में और गली मोहल्लों में खुद को गो सेवक और गो भक्त बताकर बड़े बड़े नारे लगाने वाले सच्चे गो भक्तो का इंतजार भुराघा टा क्षेत्र की जनता और गो माता कर रही है । आजाद नगर में कई गाए है जो नगर में बिना किसी मालिक की है जिनको खाना और पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है न ही नगर की जनता और ना गो रक्षक दल या गो भक्त उनका ख्याल रखते है नगर की नगर परिषद भी इन गाय और अन्य आवारा जानवरो को एक साथ कही रखकर इनकी सेवा की जा सके उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं है जबकि नगर ले आसपास हजारों एकड़ जमीन चारागाह या गो शाला खोलने के लिए प्रयाप्त हो ।लेकिन ऐसी कोई योजना नगर परिषद के पास या नगर की जनता के पास नही है क्योंकि जहा मिले कमिसन वही होता सारा काम जेसी नियत होगी तो कोई परोपकारी कार्य केसे किया जाएगा।यह गाय जीवन मृत्यु के बीच अपना समय काट रही है ।इसको सेवा के लिए कोई कदम प्रशासन उठता है या नही देखना है । जो असली गाय और बेलो को पालकर असली सेवा करने वाले आदिवासी लोगो को तो नकली गो भक्त पीट पीट कर जान लेने जी लगे है ।क्योंकि असली सेवक आदिवासियो से नकली तिलक और गमछाधारी गो भक्तो की पोल खुल ना जाए।इस गाय को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जा कर इसकी सेवा की जाए अन्यथा इसकी मृत्यु हो जाने पर या गाय की ऐसी दशा पर किसी समाज विशेष पर बेवज कोई आरोप या प्रत्यारोप लगाने का भी प्रयास हो सकता है।जिससे स्थानीय प्रशासन को अपनी जवाबदारी समझना अति आवश्यक है ।

 

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