बलात्कारी तात्या बिच्छु की मन की बात भाग 02

छात्राओं से हवस की प्यास बुझाने के लिए बिस्तर सहीत घीस ले जाता था तात्या बिच्छु जमकर सोटे पडे तो ढाबा छोड भाग निकला था ये वहशी दरिंदा खटकानी ओर तात्या बिच्छु की ये कैसी जुगलबंदी

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Niklesh Damor
आपका भियां निकलेश डामोर
भियां सभी को राम राम… लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ…. भियां आज फिर में सुनाने जा रिया हुं तात्या बिच्छु की रोचक कहानी भाग 02… भियां कांग्रेस का शासन काल था उस समय तात्या बिच्छु की मां भी शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत थी… तब भियां तत्या बिच्छु की माताजी गहरी नींद में सोते हीे छात्राओं के मुंह पर कपडा बांध बिस्तर समेत अपने कमरे में खिंच ले जाता था और अपनी हवस की प्यास बुझाता था… वहशीदरिंदे से स्कूली छात्राएं इतनी परेशान थी की गुजरात में आरोजित कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तात्या बिच्छु की माताजी ले जा रही थी तब छात्राओं ने इस संबंध में कलेक्टर को शिकायत की और इसे बस से उतरवाया…।
भियां इस वहशी दरिंदे ने कई लोगों के घरों में संेंध पर अपनी हवस की प्यास बुझाई… भियां धांधा पानी चालु करने के लिए नगर के एक समाजसेवी भंडारी से इसने 5 हजार रूपयें उधार लिए.. धंधा पानी चल गिया… जब समाजसेवी ने पैसे मांगे तो इस तात्या बिच्छु ने समाजसेवी के साथ गाली गलोज की और मारपीट पर उतारू हो गिया…. आज यां तक नी थम री… भियां जां धंधा पानी चल रिया था… वां पर भी इसने बुरी नजर डाली… और अपनी हवस की प्यास बुझाने की कोशिश की… मगर भियां वां इसको ऐसे सोटे पडे… ऐसे सोटे पडे की पुछोईज मत… भियां सोटों की मार से ये इधर उधर भागता फिरा… और आज भी वो ढाबा विरान पडा है… उस और जाने की तो इसकी हिम्मत ही नी है… अगर गिया तो फिर धमाधम सोटे पडेंगे… भियां नगर पालिका चुनाव के दौरान उपाध्यक्ष चयन की जब बारी आई तो ी करवाने के नाम पर 30 हजार रूपयें खा गिया… जब रूपयें मांगे तो मोबाईल पर आने वाला फोन ही उठाना बंद कर दिया… अब सोचों भियां ये तत्या बिच्छु के रिया है…. चुनाव लडु… तो भियां ये बताओं की ये चुनाव कैसे जीतेगा… पेली बात तो ये है कि इसको कोईज टिकट नी देगा…. वार्ड में गिया तो युवा ठोसे मारेंगे… भियां खास और रोचक मुददे तो बाद में सुनाउंगा… क्योकि भियां पिक्चर अभी बाकी है… अभी सुना दिया तो बाद में मजा नी आयेगा… भियां एक बात बिता दुं इसकु आता जाता तो कुछ नी है… सोशल मीडिया पर किसको भला बुरा कहना किसको नही ये सब लिख कर खटखानी देता है… खटखानी को जिस पर से भडास निकालनी हो वो इसे लिख कर देता है और ये पोस्ट कर देता है… बडे शातिर तरीके से अपने रास्ते के कांटों को साफ करता है इन दोनों की जुगल बंदी भी भाग 03 में बितायेंगे… और इन्होने जो ईमानदारी के मुखोटे पहने हुए है उसे भी हटायेगे।…
जल्द ही अगले अंक में
अब जा रिया हुं… लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं तात्या बिच्छु… ये जो लोगों के सामने जा जा कर रो रियो हो… सब जानते है ये घडिया आंसु है… और ये तो तुम के रिये हो टिकट नी मिली तो… इनको देख लुंगा के रिये हो तो ये मुगालते मन से निकाल लियो… पेले तो ये के दुं… तुमको टिकट मिलेगीईज नी… और दुसरी बात… अच्छी अच्छी बाराते भगा ली है… भाजपा में आने से पेले कम सोटे पडे थे… अपन बांध के माछलिया ले जायेगे… और वां ऐसे है कि तेरे से ही हवस की प्यास बुझा लेगे… अब जा रिया जय राम जी की।

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