कोरोना काल में अधिकतर महीने स्कूल के ताले जंग खाते रहे परिणाम केसे अद्भुत हो सकते है ।

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दिलीपसिंह भूरिया आजादनगर

आलीराजपुर जिले के हाल ही में आए कक्षा दसवीं और बारवी का परिणाम सो प्रतिशत आना और जिले का नाम प्रदेश में प्रथम आना जिले के आम लोगो को हजम नही हो रहा है सोसल मीडिया से लेकर आम चौराहों तक चर्चाएं जोरों पर है की अधिकतर महीनो में कोरोना काल में अधिकतर स्कूलों के क्लास रूम के दरवाजों पर ताले जंग खाते रहे और अधिकतर शिक्षक खुद कोरोना के शिकार हो कर शासन द्वारा बनाए गए के
कोरोंटाइन सेंटरों में भर्ती रहे और कई ब्लॉकों के शिक्षको की कोरोना महामारी में मृत्यु हो गई और कई स्कूल शिक्षक विहीन और कई विशेषज्ञ विषयों के शिक्षको की भी मृत्यु हो जाने के बाद भी साल भर उस विषय की अन्य शिक्षक ने सिर्फ पुस्तके देखकर ही छात्र छात्राओं को ऑनलाइन अध्ययन करवाया गया ।जिसके परिणाम स्वरूप जिला प्रदेश में अव्वल लेकिन उन आकडो को केसे झुठलाया जा सकता है की आज परीक्षा परिणाम के पूर्व आजादी से लेकर अब तक शिक्षा का प्रतिशत सबसे पिछड़े जिले में और परीक्षा परिणाम भी सबसे पिछड़ा लेकिन अचानक क्या छात्र छात्राओं ने कोरोनास काल में राज्य के वैज्ञानिकों ने कैसी घुट्टी पिलाई की जिससे एक ही महीने में परीक्षा परिणाम सो प्रतिशत और जिला पूरे प्रदेश में प्रथम ।जबकि राज्य की राजधानी भोपाल इंदौर जबलपुर देवास रतलाम उज्जैन जेसे जिले अलीराजपुर जिले से परिणाम में पिछड़ गए ।ऐसा चमत्कार एक चुनाव में परिणाम के समय में और एक परीक्षा के समय में अलीराजपुर जिले में ही हो सकता है जो अद्भुत और आश्चर्य चकित करने वाले है जिनको कोई हजम नही कर पाया या यू कहे सरकार या सत्ता का कोई खेल है जिसमे आदिवासी जिले को पिछड़े जिले से अव्वल जिले में केसे ताबड़तोड़ पहुंचाया जा सकता है उसका परीक्षण कर एक छोटा सा उदाहरण पेश किया गया है ।

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