पेटलावद शहर में खुली हुई मौत की दुकानों पर दिखावे की होती कार्यवाही

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दोषी कौन ? F.I.R. ओर आपराधिक प्रकरण किस पर होना चाहिए ? जिसने शासन की सैलरी ली या जिसने दी ? जो बीना रजिस्टर्ड होकर मौत की दुकान याने क्लिनिक, संचालित कर रहे है वो या जो पद पर रहते संचालित करवा रहे है वो ? BAMS आयुर्वेद की डीग्री पर एलोपैथिक ट्रीटमेंट कर रहे वो ? या पद पर बैठे वो निष्क्रिय अधिकारी जो आँख से अंधे नाम नैनसुख बन बैठे है ? पेटलावद वो शहर है जो जिले में फर्जी डॉक्टरो की मंडी बन गया है । जहाँ गली गली में फर्जी डॉक्टर लोगो के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे है । अनाड़ी डॉक्टरों को कब तक जिला बर्दाश्त करेगा लोगो के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने इन माफियाओं को जो ऊंची ऊंची दुकान खोलकर लोगो की जान बचा नही, लूट रहे है ये चिकित्सा क्षेत्र के माफ़िया है ।
मामला झाबुआ जिले के पेटलावद चिकित्साजगत में जुड़े माफियाओं का है जिन पर BMO और CMHO या तो मेहरबान है या मजबूर । जिनपर कोई कार्यवाही नही हो पा रही है । वही पेटलावद के आसपास कोरोना में कई लोगो की मौत इन नीम हकीमों की वजह से हुई है । जिला प्रशासन को इनको संज्ञान में लेते हुए इनकी फर्जी फजीहतों पर कार्यवाही करना अपेक्षित है । ये बीना डीग्री के अपनी दुकान दारी चला रहे है
इन फर्जी बंगालीयो की डिग्रीयों की जाँच के साथ कार्यवाही करना जिला प्रशासन का संज्ञान लेना जनहित में आवश्यक प्रतीत होता जा रहा है । परंतु मूल बात ये भी है की इन सब का सरगना कौन है? कौन इनको संरक्षण दे रहा? कौन भेट पूजा ले रहा? सबसे पहले कलेक्टर साहब शासन प्रशासन मे बैठे इनके रहनुमाओ पर कार्यवाही करे उसके बाद इन पर l
खबर के साथ फोटो पेस्ट है जिसमे बंगालियों का कप्तान बिऐमओ हर माह ऑफिस पर हाजरि देते हैं इस हाजरि मे साहब को सामूहिक भेट पूजा लिफ़ाफ़ा और….

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