कौन है ये दलाल उर्फ लहरी बाबा जो झाबुआ में कर रहा दलाली आदिवासी समाज और गरीबों की रोकता है गाडि़या

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रईसजादो से खाता है खोफ ….गरीबो पर ढहाता है जुल्म

में चाहे जिसकी गाड़ी रोकू मेरी मर्जी

न पुलिस है न सरकारी कर्मचारी फिर आरटीओ विभाग के साथ कैसे कर रहा दलाली

वॉईस ऑफ झाबुआ

लोग कुत्ते पालते है… मगर पिटोल आरटीओ विभाग ने दलाल पाल रखे है… जो ऐसे दलाल है… जो गरीबों पर जुल्म ढाते है और अमीरों के सामने नतमस्तक नजर आते है… ऐसे दलाल अधिकारियों के आगे पीछे घुमते रहते है… इसी तर्ज पर पिटोल बेरियर पर आरटीओ कार्यालय में लहरी बाबा को पाल रखा है… जो आलाधिकारियों के साथ घुमता रहता है… जहां अधिकारी वाहन जांच करने पहुंचे ये वहां उपस्थित होता है… ये न तो सरकारी कर्मचारी है… और न ही कोई अभिकर्ता… फिर भी गरीब और बेबसो पर जल्म ढाता नजर आता है… झाबुआ जिला एक आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां के ग्रामीण खेती पर निर्भर होने की वजह से इतने सक्षम नही है… मगर ये इन्ही बेबसों को रोकता है… और उनसे मन मुताबिक वसुली करता है। अगर कोई विरोध भी करता है… तो कहता है… मैं चाहे जिसकी भी गाडी रोकु मेरी मर्जी… न ये तो पुलिस है और न ही सरकारी कर्मचारी सिर्फ ठेके पर आया हुआ एक मुलाजिंम है… ये गरीब आदिवासियों को ही रोकता है… और न जाने क्यों विभाग भी इसे लेकर जहां हो वहां निकल पडता है… सुना है विभाग को ये लहरी बाबा गरीब आदिवासियों से मोटी रकम वसुल करने में मुख्य भूमिका निभाता है… सुना तो ये भी है कि कई सेटिंगे ये ही करता है… जिसका इसे कमीषन तो ठिक… कुछ और भी मिलता है… सुत्रों का तो यह भी कहना है ये अधिकारियों के लिए शराब शबाब और कबाब की भी व्यवस्था करता है… तो ये बात यहां तो सही लगने लगी है कि लोग कुत्ते पालते है आरटीओ कार्यालय ने दलाल पाल रख है… बाकि अगले अंक में…

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