पिथौरा पेंटिंग नहीं -पिथौरा आदिवासी समाज मे पूजनीय, खत्रीज देवी देवता है। सामाजिक कार्यकर्ता ने की अपील पिथौरा घर के अंदर की दीवार पर बनाया जाता है और पूजा की जाती है हर जगह बना कर अपमान ना करें प्रशासन

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निलेश डावर अलीराजपुर

अलीराजपुर नगरपालिका ने जिला मुख्यालय को सजाने और साफ सफाई के लिए अच्छा प्रयास किया है दीवारे सुंदर बनाई जा रही है, काफी अच्छा भी लग रहा है रंगीन दीवारे देखकर,किन्तु पिथौरा कोई साधारण चित्र नहीं है जिसे कही भी किसी भी दीवार पर बनवाया जा सके, ये आदिवासी समाज के आराध्य देवी देवता है जिन्हे वो मन्नत पूरी होने पर घर,परिवार,समाज की सुख शांति के लिए विधि विधान से गांव के बड़े बुजुर्गो,पुजारा,बड़वे द्वारा गायना कर विधिवत घर की आंतरिक मुख्य दिवार पर बनवाकर बली दी जाती है जिसमे गांव,और रिस्तेदार शामिल होते है.। इसकी मान्यता है गलत तरीके इस्तेमाल होने पर बनाने वाले को नुकसान झेलना पड़ता है… कही बार जान माल का नुकसान भी होता आया है… इसीलिए पिथौरा को पेंटिंग न समझे इसे कही भी न बनवाये इससे आदिवासी देवी देवता का अपमान होता है क्योंकि दीवारों पर जानवर पेशाब से लेकर मानव स्वभाव मे थूकने जैसी चीजे भी होती है। प्रशासन से अनुचित जगह पर पिथोरा नही बनाने की अपील सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई..

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