छोटाउदेपुर जिले के पूर्वी क्षेत्र और पश्चिमी मध्य प्रदेश के गुजरात सीमावर्ती क्षेत्रों में होली से एक सप्ताह पहले आयोजित भंगोरिया हाट का विशेष महत्व

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अलीराजपुर- रितुराज

मध्य प्रदेश की सीमा से लगे गुजरात का छोटा उदयपुर जिला गुजरात के ज्यादा तर आदिवासी आबादी वाले जिले में से एक है। होली के पूर्वे एक सप्ताह पहले होली की तैयारियों की खरीदी के रूप में यहां भंगोरीया हाट लगता है, यहां की प्रादेशिक भाषा में होंगे भोंगर्या हाट भी बोला जाता है भंगोरीया कोई त्योहार या मेला नहीं है बल्कि होली के त्योहार के लिए खरीदारी के लिए एक पारंपरिक विशेष हाट है, जहां होली के पहले सप्ताह में साप्ताहिक हाट आयोजित किया जाता था, वे होली त्योहार की विशेष खरीद के लिए आते हैं, साथ में आदिवासी वाद्य मोटला ढोल,ददुडी और बांसुरी,खडखसीया बजाते अपने अंदाज में लोग नाचते गाते पुरे साल खेती और अन्य कामों में से मुक्त हो कर मज़ा लुटाते हैं।

भंगोरीया हाट में खास करके जुवानिया विशिष्ट डिज़ाइन से बनाया हुआ और एक ही कलर के पहनावा गहने से सज्य कर हाट में पहुंचते हैं आदिवासी युवतियां पारंपरिक आभूषणों के अलावा चांदी के हार, चांदी की हांसडी चांदी के कल्ला (मुंडलीयां और कडीवालां) चांदी के बाहटीयां, हाथ के पांचिया, चांदी के कमर झुडो , चांदी की हांकली (चेन), चांदी के कहडा (कंदोरा), कैड जूडो, चांदी की लोलिया, चांदी विटला, चांदी का फांसी, आदि चांदी के आभूषणों में विशेष रूप से बड़ी मात्रा में उपयोग किया करते हैं।

जबकि आदिवासी युवाओं के लिए खास कर चांदी के भोरिया, चांदी के भोरियां, चांदी के कांटलां, चांदी की किकरी, कहडो (कंदोरा) आदि जैसे आभूषणों से सज्य कर भंगोरिया हाट में पहुंचते हैं।

अपने ही गांव की एक तरह की एकता और विशिष्टता दिखाने की कोशिश करने के लिए एक ही डिजाइन की पोशाक पहने अपने खुद के गांव की अलग पहचान बनाने की एक प्रणाली सालों से चली आती है, एक ही डिजाइनर या एक ही रंग के कपड़े पहनने का उद्देश्य भी भांगोरिया की इतनी बड़ी भीड़ में कहीं अपनों से दूर हो जाते भी सरलता से मिल सकें यह भी है।

भंगोरिया हाट में आदिवासी अपनी पारंपरिक आदिवासी पोशाक में अपनी विशिष्ट पहचान और अपनी बेनमून आदिवासी संस्कृति की झलक देते हैं, और आदिवासी संस्कृति को जीवित और अच्छी तरह संभाल कर रखने की कोशिश करते हैं।

इस प्रकार भंगोरिया हाट यहां के आदिवासी लोगों के लिए एक ऐसा मंच है जो पूरे साल अपने काम में व्यस्तता से बाहर निकल कर अपने आदिवासी वाद्य मोटला ढोल, ददुडी, बांसुरी, खडखसीया की थाप पर नाचकूद कर एक शारीरिक और मानसिक स्वस्थता के साथ आनंद उल्लास महसूस करते हैं।

यहां के आदिवासी समुदाय के वालसिंहभाई राठवा पाणीबार वाला के अनुसार मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले छोटाउदयपुर जिले के आदिवासी और आदिवासी एक ही समुदाय के हैं, लेकिन छोटाउदेपुर जिले में रहने वाले आदिवासी, खासकर राठवा आदिवासी कहलाते हैं और अलिराजपुर जिले( मध्य प्रदेश) के आदिवासी भिलाला आदिवासी के नाम से जाना जाता दोनों जिलों के आदिवासीयों का रोटी-बेटी और सभी तरह का सामाजिक नाता सदियों से चला आता है।

मध्य प्रदेश के आदिवासी भी भंगोरिया हाट में गुजरात आते हैं।इसी तरह, छोटाउदयपुर जिले के आदिवासी भी बड़े समूह में मध्य प्रदेश के भंगोरिया हाट में जाते हैं।

छोटा उदयपुर और गुजरात सीमावर्ती मध्यप्रदेश के भंगोरीया हाट

-11 मार्च शुक्रवार – गुजरात के झोझ, और मध्यप्रदेश के कठीवाड़ा, वालपुर, उदयगढ़.
-12 मार्च शनिवार – गुजरात के छोटाउदेपुर और मध्यप्रदेश के उमराली, नानपुर.
-13 मार्च रविवार – गुजरात के पानवड़ और मध्यप्रदेश के छकतला, झिरन, सोरवा.
-14 मार्च सोमवार गुजरात के कवांट और मध्यप्रदेश के अलिराजपुर,भाभरा.
-15 मार्च मंगलवार- मध्यप्रदेश के वखतगढ,आंबुआ.
-16 मार्च गुजरात के रंगपुर (स). मध्यप्रदेश के चांदपुर, बरझर और बोरी.
-17 मार्च गुरुवार- गुजरात के देवहाट और मध्यप्रदेश के फूनमाल, सोंडवा,जोबट.

साप्ताहिक हाट जो जगह भरता है, होली से पहले भंगोरिया हाट में बदल जाता है। छोटा उदयपुर और गुजरात सरहदी मध्यप्रदेश के आदिवासी एक ही कबीले से है लेकिन छोटा उदेपुर के आदिवासी राठवा से जाना जाता है और मध्यप्रदेश के आदिवासी भिलाला। हाट में खरीदारी उपरांत खेती कामों में व्यस्त लोग भंगोरीया हाट के बहाने मिलकर एक दूसरे की खबर भी लेते हुए दिखते हैं और अपनापन महसूस करते हैं

इस साल कोरोना की स्थिति में सुधार होने पर बड़ी संख्या में जनसैलाब उमड़ेगा.

इस प्रकार छोटाउदेपुर जिले के साथ-साथ गुजरात सीमावर्ती राज्य मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में, होली से पहले, यहाँ के आदिवासी अपनी अनूठी और बहुत प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को बरकरार रखने में मानते हैं, इस प्रकार पारंपरिक रूप से आयोजित भंगोरिया हाट का इस क्षेत्र के आदिवासियों के लिए बहुत महत्त्व है।

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