प्राचार्य ने बचाव के लिये अपनाया नया हथकंडा बच्चो का उपयोग कर रोड़ करवाया जाम

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Voice ऑफ झाबुआ / पेटलावद

एक तरफ शासन बच्चो की शिक्षा मे कोई बाधा ना आये इसलिये बच्चो को सारी सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैं l एकलव्य विद्यालय के बच्चो ने राज्यपाल के सामने जब अव्यवस्थाओं और मैदान साफ कराना,असमय व खराब भोजन, नाश्ता संबंधी शिकायत की तो उन बच्चो की आवाज दबाने और राज्यपाल के सामने हो रही किरकिरी से बचाने के लिये सांसद ने मोर्चा सम्हाला और उन बच्चो की आवाज को बड़े प्यार से बैठा कर दबा दिया गया l
ताबड़तोड़ अधिक्षिका को निलंबित किया गया, साथ ही जाँच दल गठित किया गया जिसमे जाँच मे बाधा पहुँचाने, महिला अधिकारी के साथ दुर्व्यहार करने के कारण प्राचार्य प्रसाद को निलंबित किया गया l
फिर तिकडमी चाल चल कर प्राचार्य ने इंदौर आयुक्त के निलंबन आदेश से बचने के लिये अपने आकाओ (सप्लायरो) के जरिये मलाईदार पद पर बने रहने के लिये नया स्थानांतरित आदेश जारी करवाया जिसमे पुरे सत्र मे कार्य मुक्त ना होने की बात भी लिखवा ली ताकि सांप भी मर जाये और लाठी भी ना टुटे याने निलंबित भी ना होना पड़े, और स्थानांतर स्थान भी ना जाना पड़े और मलाई दार पद पर बने रहे l
पर प्राचार्य की जब ये युक्ति भी काम ना आई जब जिले से उक्त पद हेतु प्रभारी के रूप मे नितिन परमार को प्रभार सौपने का आदेश जारी किया l
अब फिर प्राचार्य और उसके हमदर्द सप्लायरो ने आज नई चाल चली और एकलव्य के बच्चो से विद्यालय के सामने रोड़ जाम करवाया गया, अब सवाल ये खड़ा होता है कि जिन बच्चो ने प्रबंधन के द्वारा किये जा रहे अत्याचार और अव्यवस्था के मामले में आवाज उठाई और मीडिया के सामने चीख चीख कर पोल खोली थी जाँच दल ने भी अव्यवस्था का दोषी प्रबंधन को करार दिया आज उन बच्चो के पीछे ऐसा क्या हुआ की वो उसी प्राचार्य के बचाव मे आ गये? आम व्यक्ति अच्छी तरह से इस चाल को समझ रहा है साथ ही सूत्रों की माने तो 2/3 दिन तो बच्चो पर दबाव बनाकर पून:वीडियो बनाये गये जिनका उपयोग बचाव के लिये किया जावेगा l परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण समय में बच्चो की पढ़ाई ना करवा कर इस तरह धरना प्रदर्शन मे उपयोग करना क्या सिद्ध करता है l

कहाँ गये आदिवासी संगठन जो समाज हित की बात करते नहीं थकते थे अब क्या हो गया जब गरीब आदिवासी बच्चो की आवाज साम, दाम, दण्ड भेद की नीति अपना कर दबाया जा रहा है, अब जरूरत है जयस व जय आदिवासी संगठन की जो इस मैदान मे आकर समाज हित में बच्चो को न्याय दिलाये अन्यथा इसी तरह गरीब बच्चो के मुहँ का निवाला छिना जाता रहेगा l

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