अरे वाह रे ठीक्रम…? गजब का बेवकूफ बना रिये… कलमकारों को…

1980

वॉइस ऑफ झाबुआ

कहने को तो पत्रकार चौथा स्तंभ होता है.. मगर कुछ लोग पत्रकरो के नाम पर दुकानदारी चलाने में कोई कसर नही छोड़ रहा है.. संगठन बनाओ ओर पत्रकारो के नाम पर उगाही कर लो… ऐसा ही एक संगठन झाबुआ अलीराजपुर में संचालित है जो कहने को तो अंतरराष्ट्रीय है… मगर उसके पदाधिकारी… राष्ट्रीय .. राज्यस्तरीय जिला स्तरीय पदाधिकारी झाबुआ अलीराजपुर में ही है… इनका बस एक काम झाबुआ अलीराजपुर में पत्रकारों के नाम पर उगाही करो… नही दे तो अधिकारियों को चमकाते है… एक बार उगाही करो और सालभर की इनकी निराद हो जाती है… क्योंकि वसूली ही ऐसी करते है… इनका मतलब ही आओ जाओ और ले आओ… ओर कुछ नही… इस संगठन का जो आका है वो बिन पेंदे का लोटा है.. कभी इस पाले में कभी उस पाले में… कहने का ही ये संगठन है .. पर इसमे न कोई राष्ट्रीय है न अंतर राष्ट्रीय… बस बेवकूफ बनाया जा रहा है… मनावर में भी इन्होंने कुछ ऐसा ही किया… जिसकी वजह से पत्रकरो को अपमानित महसूस करना पड़ा था.. सम्मान भी ऐसा की 50 50 रुपये प्रमाण पत्र बनवा लिए ओर बिना नाम के बांट दिए… अब क्या कहे… ये तो उगाही का धंधा है.. क्या करे… पर ऐसे उगाही करने वालो को पेलना जरूरी…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here