सोशल मीडिया पर प्राचार्य के नीलबंन के लिये उठने लगे स्वर खास कमेंट जो सोशल मीडिया पर पसंद किये गए बचाव में प्राचार्य की बेटी भी आई आगे

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पेटलावद

कल जिस तरह राज्यपाल के सामने एकलव्य विद्यालय में बच्चो ने जमीनी हकीकत बयां की उससे सिस्टम की कलई खुल गई, उसे लाख ढकने का प्रयास किये जाये पर अब सब कुछ आम व्यक्ति के सामने आ चुका है, मामले को दबाने के लिये छात्रावास अधिक्षिका दुर्गा गरवाल को निलंबित किया गया, किंतु प्राचार्य योगेंद्र प्रसाद पर हर बार की तरह इस बार भी भ्रष्ट सिस्टम प्राचार्य के बचाव में आगे आया और बचा भी लिया और आरोप हर बार की तरह केवल छोटे कर्मचारी पर मड़ ठीकरा फोड़ दिया गया l
प्राचार्य पर पहली बार आरोप सहायक शिक्षक गुप्ता को थप्पड मारने का हो, सहायक शिक्षिका के साथ दुर्व्यवहार के बाद हाथो चप्पल खाने का मामला हो, सहायक शिक्षक के हाथो पिटने का मामला हो, रसोइयन के साथ छेड़छाड़ का हो होस्टल अधिक्षिका के साथ दुर्व्यवहार का हो या एकलव्य मे शासन द्वारा नियुक्त होस्टल अधीक्षक को ज्वाइन ना कर बाहर का रास्ता दिखाने का हो या सी ई ओ जनपद के साथ भी ऑफिस जाकर दादागिरी का हो, छात्राओ को वर्तमान मे घटिया खाना देने का हो या छात्र वृत्ति घोटाला हो हर बार दोषी सिस्टम ने इस दूध के धुले हठधर्मी इस प्राचार्य को दोषी कभी माना ही नहीं हर बार इसके गले का फन्दा छोटे कर्मचारी के गले पहिनाकर बलि का बकरा बनाया गया जिसमे शिक्षक दीपेंद्र चौधरी तो वर्तमान मे अधीक्षक दुर्गा गरवाल को दोषी मानकर हथौड़ा चलाया गया जो सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर रहा है l

अब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर उठ रहा है जिसमे कई कमेंट उठे जिसमे

1. मिलिंद मेहता का कमेंट : असल मे गर्ल्स स्कूल के प्राचार्य का पद कुछ विशेषताओं के मालिक के पास होना चाहिये।इस प्रसाद की तो जुबान ही बेलगाम है।यह अश्लील ओर भद्दे शब्दो का इस्तेमाल सरेआम करता है।यह गर्ल्स स्कूल में कार्यरत रहते हुए हजारो मौकों पर नियमो की धज्जियां उड़ाते देखा गया है।यह महिला कर्मियों के साथ अभद्र ओर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए पकड़ा गया है।असंख्य जघन्य अपराधों से संस्था को लज्जित कर चुके इस शख्स को आखिर मामाजी क्यों पुरस्कृत कर रहे है?क्या उनको अपनी भांजियों के हितों की रक्षा नही करना चाहिए?कमाल का निलंबन हुआ,असल मे तो पेटलावद को महामहिम के सामने लज्जित करने के लिये सही व्यक्ति को निलंबित करना चाहिए।हो सकता है कि जिलाधीश महोदय ओर एस डी एम महोदय इस पापी के पुराने कारनामो से अनभिज्ञ हो,मीडियाकर्मियों को इसके वो पुराने कारनामे भी पुनः संज्ञान में लाना चाहिये।

अजय जैन बामनिया : प्राचार्य को हटाने के लिए विभिन्न आदिवासी संगठनों को आंदोलन की राह अपनानी चाहिए जो गरीब आदिवासी बच्चों को ठीक से खाना नही दे रहा उसे पद पर रहने का कोई हक नहीं है l सही प्लेटफार्म मिलने पर ही उन्होंने अपने दर्द का इजहार किया है वरना कोई किसी की बेवजह शिकायत क्यो करता है l बच्चों के माता पिता की उम्मीदों पर सिस्टम अगर खरा नहीं उतर रहा है तो उस सिस्टम में बदलाव करना जरूरी हो जाता हैं l
राकेश परमार (झाबुआ) : बलि का बकरा बनाया गया हे,,,प्राचार्य भी बराबर का दोषी हे,,,,लेकिन प्राचार्य को बचाने के लिये होस्टल अधीक्षिका को निपटा दिया हे।
जीवन ठाकुर (कांग्रेस) :अब तो हटना पड़ेगा पहले पत्रकार पर हमला करवाया था अब नहीं चलेगी दादागिरी
हरीश राठौड़ (पत्रकार) :बड़ी सेटिंग होगी बड़ी डील के साथ

अक्षय भट्ट सारंगी : ऊपर वालो को बचाने के लिए ही नीचे वालो को निपटा दिया ।

रवि राज पटेल सारंगी :धन्य है वो लड़की जिसने सरकार की पोल खोल कर रख दी l

राकेश गेहलोत :एकलव्य परिसर की होस्टल अधीक्षक दुर्गा गरवाल हुई निलंबित हुई , प्राचार्य की जबाबदेही कौंन तय करेगा,प्राचार्य को बचाने का प्रयास, सामग्री खरीदी और भर्ती को जाँच हो तो खुलेंगे कई नेताओं की पोल l जिस प्रकार का मामला पेटलावद में राज्यपाल के दौरे पर हुवा, जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा,एसी प्रशांत आर्य और प्राचार्य योगेंद्र प्रसाद को निलंबित किया जाना था l

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