आदिवासियों को लूटने में लगे भाजपा के चौकीदार:-आम आदमी पार्टी

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अलीराजपुर

विगत दिनों हुवे अनाज की कालाबाजारी में लिप्त पूर्व विधायक और सांसद प्रतिनिधि माधोसिंह डावर और नितेश अग्रवाल के परिवार का जिले के समस्त समाज के द्वारा सामूहिक बहिष्कार कर देना चाहिए क्योंकि इनके परिवार के लोगो और इनके मुखिया के लालच ने हर इस गरीब के मुंह का निवाला छीन कर उन फेक्ट्रियो के मालिक को बेच दिया जिनके घर में पहले से तिजोरियां सोने और चांदी की ईट से भरी पड़ी है लेकिन उस गरीब की कुटिया में खाने का अनाज का दाना नहीं जिसके घर का मुखिया कोरोना महामारी में दुनिया छोड़ चुका है उस घर की विधवा और बेसहारा महिला से पूछो जो अमीर घरों में बर्तन कपड़े और घर घर पोछा मारने के बाद भी अपने बच्चो और बूढ़े सास ससुर का ठीक ढंग से पेट भी नही भर पाती और उस घर के बच्चो से पूछो जिनके माता पिता नही है और मेहनत मजदूरी किसी होटल पर करने के बाद महीने में मिलने वाले सोसायटी के गेंहू से एक टाइम की रोटी खाने को मजबूर है उस मां बाप से पूछो जिनकी ओलाद कोरोना में मर चुकी है और वो सोसायटी के गेंहू से जेसे तेसे अपनी भूख मिटाने के लिए सोसायटी के चक्कर काट काट कर थक कर आसपास के लोगो द्वारा दी जाने वाली बची कूची लोगो के घर की रोटियो से अपना पेट भर कर सो जाते है की कल सोसायटी से अनाज मिलेगा और भर पेट रोटी खाएंगे ।लेकिन इस देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने कुछ सोच विचार करके गृह और चावल फ्री देने का सोचा होगा जनता की समस्या उन्होंने महसूस की होगी लेकिन पूर्व विधायक माधोसिंह डावर और नितेश अग्रवाल जैसे गेंहू के ठेकेदार और कालाबाजारी कर गेंहू माफियाओं द्वारा किसी भी गरीब के आसू पोछकर गरीब जनता की मदद करने के बजाय अपनी तिजोरी कागज के नोटो से और सोने चांदी की ईट से भरने का जो निर्णय लिया है और जिस प्रकार से दिन रात गरीब लोगो का मुंह का निवाला गाडियां भर भर कर बेचा और नोट कमाए और इस काम में जिन जिन लोगो ने भी इन गेंहू की कालाबाजारी करने वाले लोगो का दिन रात साथ दिया उन सोसायटी संचालकों और सेल्समैन जो इस पूरे जिले में है उनका भी इस घोटाले में उतना ही हाथ है जितना इन दो बड़े चोरों का हाथ है जिले की सभी जनता को एक साथ उन इन दोनो परिवार और सोसायटी संचालक और सेल्समेनो को अपने आस पास भी रहने नही देना चाहिए ।और उनको इज्जत से जिले के बहिष्कार करके बाहर कर देना चाहिए। इन सभी गेंहू के कालाबाजारी में शामिल लोगो का जिले के किसी भी सामाजिक कार्यक्रमों में आने से भी प्रतिबंधित कर देना चाहिए।जिससे इनको अपने किए गए चोरी और कालाबाजारी होने का अहसास हो जाए।की जनता के मुंह का निवाला बेचने का क्या हश्र होता है ।और इनको व्यक्तिगत आभास तो होता की हमने कागज के नोटो और सोने चांदी की लालच में कई लोगो को रोजाना घरों में भूखा सुलाया और कही इन लोगो को कभी शर्म तो शर्म आए।

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