चिन्हित एवं जघन्य सनसनीखेज प्रकरण में आरोपी को आजीवन कारावास

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माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सोंस एक्ट ,भरत कुमार व्या्स सा. जिला झाबुआ द्वारा आरोपी भानु उर्फ भमरिया पिता थावरिया भूरिया उम्र 24 वर्ष नि. ढेकलबडी को धारा 5(एल) सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत आजीवन कारावास एवं 5000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । शासन की ओर से प्रकरण का संचालन विशेष लोक अभियोजक, जिला अभियोजन अधिकारी जिला झाबुआ द्वारा किया गया ।
अभियोजन जिला मिडिया प्रभारी सुश्री सूरज वैरागी, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि दिनांक 01.10.2021 को फरियादिया/पीडिता जिसकी उम्र उम्र 11 वर्ष की होकर दोपहर करीब 12.00 बजे भल्ला की दुकान से शेम्पू और बिस्कीट लेकर अपने घर वापीस जा रही थी कि रास्ते् में बोर के पेड के पास आरोपी भमरिया उर्फ भानू पिता थावरिया भुरिया मिला व नाबालिक पीडि़ता को जबरदस्त पकड़कर रूपा भूरिया के कपास के खेत में ले गया था एवं उसके साथ बलात्कार किया था । उक्त बात किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी पीडि़ता को दी गई थी । उक्त घटना की जानकारी पीडि़ता ने अपने घर जाकर माता-पिता को बताई थी। फिर फरियादिया/पीडिता अपने परिवार के साथ थाना झाबुआ में जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पीडिता की रिपोर्ट पर से पुलिस द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया । विवेचना के दौरान आरोपी भमरिया उर्फ भानू पिता थावरिया को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था । जहॉ से माननीय न्यायालय द्वारा न्याायिक अभिरक्षा में भेजा गया था । अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुकत किया गया । अपराध की गंभीरता को देखते हुए, उक्त प्रकरण को जिले का चिन्हित एवं जघन्यभ सनसनीखेज घोषित किया गया था ।
विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्क से सहमत होते हुए न्यायालय द्वारा आरोपी भानु उर्फ भमरिया पिता थावरिया भूरिया दिनांक 11-01-2023 को दोषी पाते हुये, धारा 5(एल) सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत आजीवन कारावास एवं 5000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । न्यायालय द्वारा निर्णय पारित करते समय अपने निर्णय में यह भी लेख किया कि बलात्संग का अपराध एक महिला के शरीर के विरूद्ध होता हैं, जब यह अपराध होता हैं तो उसका शरीर मंदिर की तरह होता है और ऐसे अपराध उसे जीवन के सासों में घुटन कर उसकी प्रतिष्ठाि को आघात पहुंचाते हैं, प्रतिष्ठा किसी के लिये भी सबसे बहुमूल्य गहना है जो वह जीवन को धारण करता है, इसे समाप्त करने के लिए किसी को अनमत नहीं किया जा सकता हैं।शासन की ओर से प्रकरण का संचालन विशेष लोक अभियोजक, जिला अभियोजन अधिकारी जिला झाबुआ द्वारा किया गया ।

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