बाहर के मुद्दो पर ढोल पीटने वाला जयस और भील सेना संगठन जिले के गेंहू घोटाले से किनारा क्यों किया?

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दिलीपसिंह भूरिया

अलीराजपुर जिले में हुवे गेंहू घोटाले में आज तक जिले के आदिवासी संगठन भील सेना और जयस दोनो ही संगठन चुप क्यों है जिले के बाहर अगर कोई घोटाला या अपराध होते ही जिले की हर गांव गली मोहल्ले ओर सड़को पर साथ ही सोसल मीडिया में ढोल पीटने लगने वाले आदिवासी संगठनों के जिले के किसी भी एक नेता का न ही कोई बयान आया ना ही कोई ज्ञापन या ना ही कोई आंदोलन की चेतावनी क्या जिले के दोनो राजनेतिक संगठन गेंहू व्यापारी या गेंहू के ठेकेदार के इशारों पर काम करते है या चुनावी वर्ष होने के कारण अपनी अपनी टिकिट की जुगत में। है इसलिए गेंहू घोटाले में चुप्पी साध रखी है या जिले में घर घर में झगड़ा क्यों करे लगता है वेयर हाउस के मालिक और ठेकेदार से कई सामाजिक कार्यक्रमों के लिए चंदा लिया हुवा है इसलिए गेंहू चोर और कालाबाजारी की खुली छूट दे रखी है जिले में आदिवासी संगठनों ने ।जिले में हुवे बीते 20से 22 सालो से जिस गेंहू के ठेकेदार ने गरीबों के पेट के निवाले का सौदा अपनी तिजोरी भरने के लिए किया है और जब उसकी चोरी पकड़ी गई है तब सब उसको बचाने की जुगाड़ में लग गए है ।जिले के आदिवासी संगठन के नेता की चुप्पी मुझे गेंहू घोटाले बाज के साथ होने का संकेत है लगता है गरीबों का गेंहू बेचकर दिया जाने वाला चंदा उनके कार्यक्रमों में उपयोग होता है ।जिसके कारण अपने आकाओं के सामने केसे बोले अगर बोलेंगे तो आगे से चंदा रूपी हड्डी नही मिलेगी और वो कार्यक्रम नही होंगे और अपने राजनेतिक उद्देश्य सिद्ध नहीं होंगे ।जिस गरीब आदिवासीयों के आप नेता और हमदर्द बनने का ढोंग कर रहे है अपने राजनेतिक उद्देश्य सिद्ध करने के लिए गरीब जिले की जनता सीधे करीब से सभी आदिवादी संगठनों के नेताओ की चाल को देख रही है समझ रही है आपकी की चुप्पी कई सालो के चोरों को जो दुनिया की नजरो से आज तक छिपे थे वो आज फिर बचके निकलने में कामयाब हो जायेगे ।आपको अपनी एकता और संगठन की पूरी ताकत का इस्तेमाल कर गेंहू घोटाले बाज को जेल भेजने के लिए एक आंदोलन करना चाहिए ।आदिवासी संगठनों के वो पोस्टर बाय नेता कहा गए जो बड़े बड़े मंचो से भाषण देते है हम फलाना कर देंगे डीकना कर देंगे आज शेर घर में ही चूहे साबित हो रहे हो ।क्यों आपका जमीर या आप का शेर होना मर चुका है ।।आज आपको आपके ही जिले की जनता इंतजार कर रही है की जिले के आदिवासी संगठनों के नेता उनकी आवाज बनकर सड़को पर उतरे और उनके हक अधिकार की बात करे उनके लिए आंदोलन के लिए आगे आए या फिर ठंड के मौसम में अपनी अपनी गोदडीयो में चुपचाप सो गए क्या चोटी चोटी बातो पर आंदोलन की चेतावनी और धमकियां देने वाले आदिवासी विरो अपनी अपनी गोदडीया फेलो और गेंहू घोटाले बाजों के खिलाफ कोई आंदोलन की बात तो बोलो।।

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