बीएमओ की सुस्त प्रणाली के चलते मरीजों को नहीं मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं?

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ओमप्रकाश राठौर

आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन और नियंत्रण के लिए बनी रोगी कल्याण समिति कागजों तक ही सिमटी हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी, समस्याओं का समाधान और मरीजों को सुविधाए मुहैया करवाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोगी कल्याण समिति की बैठक कब हुई थी, इससे स्वयं बीएमओ अनभिज्ञ हैं। ऐसे में रोगी कल्याण समिति के औचित्य तथा पदाधिकारी व विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।जिले का आदिवासी स्वास्थ्य के मामले में अति संवेदनशील है। यहां की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं की स्वास्थ्य सुविधा व जागरूकता के प्रति असंतोष व्यक्त करने के बाद भी यहां स्वास्थ्य सुविधा के प्रति जिम्मेदार रोगी कल्याण समिति सक्रिय नहीं हुई है। नतीजा अन्य विकासखंड की तुलना में स्वास्थ्य सेवाएं फिसड्डी बनी हुई हैं।रोगी कल्याण समिति को शासन की ओर से विभिन्न अधिकार भी दिए गए हैं। हर जरूरत के लिए शासन पर निर्भर रहने की बजाय समिति के माध्यम से स्थानीय स्तर पर दानदाताओं को प्रेरित कर अस्पतालमें आवश्यक सुविधाएं जुटाने का प्रावधान किया जा सकता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्याणपुरा में समिति की बैठक नियमित रूप से नहीं हो पाने से अस्पताल की और मरीजों की समस्याओं का त्वरित निराकरण भी नहीं हो पा रहा है। शासन के निर्देशानुसार समिति की साधारण सभा एक साल में कम से कम एक बार और कार्यसमिति की बैठक छह माह में एक बार अवश्य होना चाहिए।

समय पर नहीं आते डॉक्टर मरीजो को जाना पड़ता है निजी क्लिनिक मै

कल्याणपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मै ना तो डॉक्टर समय पर आते है और ना ही अन्य कर्मचारी जिससे मरीजों को निजी क्लिनिक मै अपना इलाज करवाना पड़ता है जिससे मरीजों को काफ़ी पैसे खर्च करने पड़ते है

अगले अंक मै पढ़िए कौन कौन करता है हॉस्पिटल मै पार्टी व कौन चला रहा है रिमोर्ट से पुरे हॉस्पिटल को जल्द ही वॉइस ऑफ झाबुआ

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