ढाई करोड़ की नल जल योजना को धूप लगाने बैठे विभागीय अधिकारी

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@वॉइस  ऑफ  झाबुआ

 

आजादी के बाद भी आज देश के लगभग चालीस से पचास प्रतिशत गांवों में पानी के लिए बच्चे,महिलाओ से लेकर बुजुर्ग को दो दो हाथ करना पड़ रहा है तब जाकर घंटो होने पर एक समय का पानी मिलता है,इन्ही क्षेत्रों की समस्या को सुलझाते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल जीवन मिशन योजना के नाम से एक महत्वपूर्ण योजना लागू की जिसका उद्देश्य हर घर जल मिले इसी लक्ष्य को लेकर शुरु की वही मोदी की  महत्वपूर्ण योजना का लाभ आज कई ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा हे।

ढाई करोड़ की नल जल योजना का धूप लगाने बैठे अधिकारी

केंद्र की महत्वपूर्ण योजना जल जीवन मिशन योजना का लाभ हर घर जल मिले इस लक्ष्य को लेकर योजना की शुरुवात हुई थी,परंतु मध्यप्रदेश में अधिकांश जगह लीपापोती के नाम के अलावा कुछ भी नही हुआ है,झाबुआ जिले के तेहसील थांदला की पंचायत भामल में केंद्र की जल जीवन मिशन योजना की टंकी का भूमिपूजन हुआ जिसकी लागत 249.22 है,केंद्र की महत्वपूर्ण योजना में भामल पंचायत और जिला अधिकारी जितेंद्र मावी,सब इंजीनियर गौरीशंकर चौधरी पहले भी क्षेत्रीय सांसद गुमान सिंह डामोर को नही बुलाते हुए इस योजना में अपनी किरकिरी करा बैठे है,वही भूमिपूजन में सांसद डामोर को भुला बैठे अधिकारी पुनः मोदी सरकार की महत्वपूर्ण योजना में फिर से किरकिरी कराने में लगे हुए के साथ बिना जिला अधिकारी के निरीक्षण के बावजूद कांग्रेसी नेता के कहने पर भामल पंचायत ने अपनी सहमति देते हुए टंकी के निर्माण के लिए सहमति देते हुए भूमिपूजन करवा दिया।

 

अधिकारियों ने ढोलखरा योजना का पानी आज तक नही पहुंचाया खवासा में

पूर्व में ढोलखरा से खवासा तक पानी की योजना पर मध्य प्रदेश सरकार ने 50लाख राशि की स्वकृति दी थी पर परंतु जिला अधिकारी जितेंद्र मावी और थांदला के विभागीय अधिकारी अपनी मर्जी के चलते हुए आज तक खवासा को पानी नही मिला वही ढोलखरा से खवासा तक के पानी के नाम पर सिर्फ विभागीय एसडीओ को हटाया गया था परंतु जिला अधिकारी मावी द्वारा पानी को लेकर कोई भी संज्ञान नही लिया गया जिससे आज भी खवासा वासियों को जल के लिए संकट का सामना करना पड़ता है वही अभी भी भामल में ढाई करोड़ की लागत से बनने वाली जल जीवन मिशन की टंकी से भामल में तो पानी मिल जाएगा परंतु भामल में ही स्थित रूपारेल,रूपापाडा और ढोलखरा के रहवासियों को पानी नही मिलते हुए फिर संघर्ष करना पड़ेगा।मामले में ग्रामीणों से भी बात करना चाही तो उनका कहना था की भामल में नल और जल दोनो ही है ऐसे में वहा टंकी का निर्माण कराया जाएगा तो उसका फायदा हमे नही मिलेगा,अगर टंकी का निर्माण कराना हे तो भामल को छोड़ कर रूपापाडा और ढोलखरा में कराना चाहिए ताकि सभी जगह पानी पहुंच सके,ग्रामीणों का ये भी कहना हे की टंकी भूमिपूजन के पूर्व ही पंचायत में बोला था परंतु पंचायत ने ये कहते हुए बात खत्म कर दी के निर्माण यही होगा,वही ढाई करोड़ की लागत से बनने वाली टंकी निर्माण के स्थान के चयन पर जिला अधिकारी जितेंद्र मावी सहित थांदला विभागीय अधिकारी का चुप रहना उक्त योजना को फेल करने जैसा दिखाई दे रहा है,ढोलखरा योजना में जो गबन हुआ हे उसकी जांच तक नही कराते हुए योजना में पलीता लगाने में कोई कसर नही छोड़ी थी वही खवासा के ग्रामीण आज भी ढोलखरा के नाम से आस लगाकर बैठे है परंतु जिला अधिकारी का सुस्ताना रवैया खवासा वासियों की आस को पूरा नहीं कर पायेंगे,अगर ढोलखरा योजना मे अधिकारियो की सक्रियता होती तो खवासा को आज पानी मिलता वही भामल में भी इसी प्रकार की कोई गलती होती तो उसका जिम्मेदार अधिकारी होंगे या पंचायत ये तो भविष्य में पता चलेगा अगर समय रहते हुए जिला अधिकारी ने कोई निर्णय नहीं लिया तो निश्चित ही केंद्र की महत्वपूर्ण योजना जल जीवन मिशन पर पलीता लगाते हुए ढाई करोड़ का धूप जरूर लगेगा….

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