कैसे रुके अवैध शराब का विक्रय शराब माफियाओं का गड़ है अलीराजपुर । कई मशीन मिली है जिले के अलग अलग थाना क्षेत्र में । गुजरात महाराष्ट्र जैसे राज्य की सीमाएं छूती है जिले की सीमाओं को।

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कैसे रुके अवैध शराब का विक्रय शराब माफियाओं का गड़ है अलीराजपुर ।

कई मशीन मिली है जिले के अलग अलग थाना क्षेत्र में ।

गुजरात महाराष्ट्र जैसे राज्य की सीमाएं छूती है जिले की सीमाओं को।

दिलीपसिंह भूरिया

 अलीराजपुर जिला इतिहास के पन्नो में देश की आज़ादी में अहम योगदान देने वाले अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के जन्म स्थान वाले जिले के रूप में देश में विख्यात है ।लेकिन जिला जिस तरह आजाद के जन्म जिले के रूप में प्रसिद्धि है उसके साथ साथ इस जिले को शराब के अवैध भंडारण और अवैध विक्रय का भी गड़ माना जाता है अलीराजपुर जिले की भौगोलिक स्थिति ऊबड़ खाबड़ और जंगलों से भरी हुई है ।जहा से अवेध शराब का संग्रहण और उनका विक्रय और उसका व्यापार व्यवसाय करने में आसानी होती है जिसके कारण जिले में शराब ठेकेदारों के अलावा जिले में भी बड़े बड़े शराब माफिया पैदा हो गए है और शराब के कारोबार कर कर के अलीराजपुर जिले को शराब की नगरी और शराब से सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले जिले की श्रेणी में आज पूरे मध्यप्रदेश में लाकर खड़ा कर दिया है ।जिले के हर छोटे बड़े गांव गली मोहल्लालों में शराब की सैकड़ों अवेध दुकानें आज भी संचालित हो रही है ।जिसका रिकॉर्ड आज भी किसी भी सरकारी विभाग के पास नही है जिले की आबकारी पुलिस रोजाना सैकड़ों टारगेट के तहत प्रकरण दर्ज कर अदालत में पेश करती आई है और कई दुकानों को बंद भी करवाई जा चुकी है। लेकिन फिर भी रोजाना कईं दकानें अवेध शराब की खुल जाती है या खोली जा रही है। जिससे की शराब निर्माण करने वाले और शराब ठेकेदार और शराब माफियाओं की चांदी हो रही है जिले की सीमाएं गुजरात और महाराष्ट्र जैसे दो बड़े राज्यों से मिल रही है जिसके कारण भी शराब की बिक्री बहुत ही ज्यादा है ।विशेष सूत्रो से खबर है की रोजाना गांधी के राज्य गुजरात में जहा कानूनी तौर पर शराब की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध है लेकिन रोजाना गुजरात में सेकडो की तादात में अवेध शराब के अड्डे खुल्ले हुवे है और रोजाना अवैध शराब के कारोबारी गुजरात में शराब के विक्रय में लगे हुवे है ।और गुजरात में अवेध शराब के विक्रय में अन्य राज्यों की गाडियां और लोग जिनको गुजरात पुलिस ने पकड़ी या राजसात की है साथ की अवेध शराब का धंधा करने वाले लोगो को गिरफ्तार कर गुजरात की जेलो में आज भी रखा हुवा है सजा काटने के लिए उसमे मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के लोगो के सबसे ज्यादा नाम होने की बात को नकारा नहीं जा सकता है ।जिले की अधिकतर सीमा जंगल क्षेत्र से लगी होने से शराब की जंगलों से ज्यादा तस्करी की जाती है ।जिले के अधिकतर जंगल सघन वनों की श्रेणी में आते है जिसके अंदर अवेध शराब निर्माण से लेकर उनके भंडारण तक को अवेध शराब निर्माता और विक्रेताओं अपना अड्डा बनाकर रखा है कई ऐसे अड्डे है जहा आज तक प्रदेश का कोई भी प्रशासनिक विभाग नही जा सका जिसके कारण जितनी शराब जिले की लायसेंसी दुकानों पर मंगवाई नही जाती उतनी तो जिले की गली चौराहों पर बोतले भंगार वालो की दुकानों पर भंगार में बिकती दिखाई देती है ।पर आज तक किसी भी विभाग ने इसकी बारीकी से जांच तक नही की ओर ना करने की चेष्टा की जिससे जिले में दिन दुगनी रात चोगनी शराब जिले की गली मोहल्लों में अवेध दुकानों पर विक्रय हो रही है ।। जिले में जब भी कोई शराब की बिक्री का अवेध मामला पकड़ाया है तो उसके साथ साथ शराब निर्माण की बड़ी बड़ी मशीन निजी घरों में गैर कानूनी तौर पर नकली शराब का निर्माण करते हुवे मिली है ।जिससे जिले के हर छोटे बड़े लोगो को शराब निर्माण और उसके विक्रय का शोक हो चुका है ।जिले में अवेध शराब का निर्माण और विक्रय मदारी के खेल जैसा हो गया है ।जिससे जिले की गरिमा को ही बदनाम करके रख दिया है ।।

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