बस पलटने से बड़ा हादसा,35 लोग हुए घायल

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थांदला झाबुआ जिला जोकी एक आदिवासी बहुमूल्य जिला है जिसमें ग्रामीण इलाकों में आदिवासी निवासरत हे जिसका पूरा फायदा यह प्रशासनिक अधिकारी हो या बस संचालक या फिर शराब माफिया या फिर रेत माफिया हो यह सब भी अपनी जेबे भरने का काम बखूबी निभा रहे हैं इन्हें ग्रामीण आदिवासियों की जिंदगी से इन्हें कोई मतलब नहीं दिखाई देता नजर आ रहा है जेसे कि आपको बता दे की थांदला के समीप काकनवानी हरिनगर के बीच ग्राम देवका में अंधे मोड़ पर कल्याणपुरा बालवा सा बस क्रमांक MP 45 P0 212 जैन बस सर्विस की बस अपना संतुलन खोकर पलटी खा गई जिसमें 35 यात्रियों को चोट आने की खबर आई है यात्रियों को गांव के लोगों की मदद से बस से बाहर निकाल कर काकनवानी थांदला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार हेतु लाया गया जानकारी के अनुसार दुर्घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है घायल लोगो की खबर लेने नगर परिषद उपाध्यक्ष पंकज रमेश चंद्र जागीरदार राठौड़ मंडल अध्यक्ष संदीप समर्थ उपाध्याय संजय भाबर अशरफ पटवारी बबलू बृजवासी आनंद चौहान थांदला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और घायलों की जानकारी ली गई साथी डॉक्टरों से मिल उपचार में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखने को कहा गया उसके बाद पंकज जागीरदार राठौड़ द्वारा हॉस्पिटल में जितने भी पेशेंट थे उन्हें चाय बिस्किट वितरण किए गए l

सड़कों पर सरपट दौड़ रही बिना फिटनेस परमिट की अवरलोड बसे कोई अधिकारी भी ध्यान देने वाला नहीं

झाबुआ जिले में असुविधाओं का अंबार लग चुका है परंतु कोई अधिकारी या कोई जनप्रतिनिधि भी इन असुविधाओं को देखने वाला नजर नहीं आ रहा आपको बता दें की झाबुआ जिले में ओवरलोड सवारी बस जीप संचालक अपनी कैपेसिटी से अधिक सवारियां ऊपर नीचे भर सड़कों पर बेहिचक चला करते हैं जिसमे ग्रामीण इलाको से छोटे छोटे बच्चे पड़ने आते हे और वह बच्चे कभी बसों के गेटो पर लटकते नजर आते हैं या फिर बस की छतों पर बिठा दिया जाता है कहीं जीप संचालक उन्हें बोनट पर बिठाकर या फिर आइट साइड लटकाकर ग्रामीण इलाकों से लेकर नगर में पहुंचते हैं ऐसे में कई बार दुर्घटना घटित हो चुकी है परंतु आरटीओ विभाग हो या पुलिस विभाग दोनो ही अपनी मस्ती में मस्त हे इन दोनो विभागो की आखों के सामने ओवरलोड वाहन दौड़ते रहते हैं परंतु इनके द्वारा किसी प्रकार की भी कोई कार्रवाई नहीं देखने को मिलती है साथ ही आपको यह भी बता दें कि अगर इन बसों की यदि सही से जांच की जाए तो उनके कागज भी पूरे नहीं निकलेंगे साथी फिटनेस वर्क परमिट भी इन संचालकों के पास नहीं मिल पाएंगे इनकी बसों की हालत इतनी दयनी हो चुकी है कि अगर आरटीओ विभाग उन्हें चेक करें तो उन्हें सड़कों पर भी चलने की अनुमति नहीं मिलेगी परंतु पैसों की चकाचौंध में यह सारे अधिकारी लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ करते नजर आते हैं कलेक्टर मैडम जरा इन अधिकारियों पर भी ध्यान दे दीजिए जो कि अपनी जेब भरने के चक्कर में आम जनता की जिंदगीयो से खिलवाड़ करते जा रहे हैं अब देखना यह है कि प्रशासन इस दुर्घटना पर इन वाहन संचालकों पर कार्रवाई कर पाता है या नहीं या फिर अपने जेब भरने के ही काम करेंगे सरकार ने इन्हें जिस कर्तव्य के लिए इन्हें अच्छी खासी तंखा दी जा रही है फिर भी इन अधिकारियों द्वारा अपने काम को लेकर कोई दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई देती है l

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