वनवासी कल्याण आश्रम स्थापना दिवस मनाया

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सन 1954 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा ईसाई मिशनरियों की जांच के लिए जस्टिस भवानी शंकर नियोगी की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया गया। इस काम में सहयोग हेतु बाला साहब जी ने अंबिकापुर से संघ के प्रचारक श्री भीमसेन जी चोपड़ा एवं रायगढ़ से श्री कृष्णराव सप्रे को बुला लिया था। इस कार्य में कल्याण आश्रम ने पूर्ण सहयोग के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन 1956 में जांच पूरा होकर रिपोर्ट सामने आई जिसमें ईसाई मिशनियों द्वारा राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का उजागार हुआ था।

1958-59 में वनवासी बंधुओं में भाव जागरण की दृष्टि से जशपुर में विष्णु यज्ञ और रूद्र यज्ञ का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर वनवासी संत पू. गहिरागुरू जी का शिष्यों के साथ यज्ञ में आगमन हुआ था। बनारस से आए 108 कर्मकांडी पंडितों के द्वारा यज्ञ सम्पन्न किया गया। क्षेत्र से हजारों वनवासी अपने साथ उपहार स्वरूप चावल, घी, साग-सब्जी एवं समिधा आदि कुछ न कुछ लेकर जरूर पहुंचते थे। फलस्वरूप सम्पूर्ण क्षेत्र में धर्म के प्रति श्रद्धा भाव का जागरण हुआ था।

1972 में ही कल्याण आश्रम ट्रस्ट लंदन के संस्थापक श्री एकनाथ गोरे के प्रयास से पूर्ण सुविधायुक्त दो चल-चिकित्सा वाहन भी प्राप्त हुआ था। इसके द्वारा जशपुर, सरगुजा क्षेत्र के अनेक वनवासी गांवों में केन्द्र बनाकर चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती थी।

वर्ष 1977 में जनता शासन के समय भारत के प्रधानमंत्री श्री मोरारजीभाई देसाई का नवम्बर में कल्याण आश्रम में आगमन हुआ था। इसमें 5 हजार वनवासी, नगरवासी बंधुओं ने कार्यक्रम में भाग लिया था। सार्वजनिक सभा में मोरारजीभाई ने कहा कि वनवासी सिंह से नहीं शहरी आदमी से डरते हैं। इस दूरी को दूर करना ही होगा। जाते समय आश्रम की प्रशंसा में बोले कि “Programme was nicely arranged”.

वर्ष 1980 में भारत के प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का कल्याण आश्रम में आगमन हुआ। सार्वजनिक सभा में अत्यन्त पिछड़ी जनजाति कोरबा बंधु हाथों में तीर-धनुष लेकर हजारों की संख्या में उपस्थित थे। लगभग 25 हजार वनवासी बंधु सभा में उपस्थित थे। कल्याण आश्रम के कार्य से विश्वनाथ प्रताप सिंह अत्यंत प्रभावित हुए। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा था “हम तो केवल वनवासी विकास की बात करते हैं कल्याण आश्रम तो उनमें ‘तू-मैं एक रक्त’ की भावना से काम करता है।”

1970 में गुरूनानकदेव की 501वीं जयन्ती के अवसर पर तीन दिन गुरुग्रंथ साहब की स्थापना कर जशपुर में कार्यक्रम किया गया, जिसमें मा. राजाभाउ पातुरकर का व्याख्यान दसों गुरूओं के बारे मे हुआ था। प्रेरणादायी उद्बोधन से सभी ने राष्ट्रीय एकात्मता की अनुभूति की । पवित्र वातावरण में व्याख्यान के आयोजन का उद्देश्य सफल रहा।

देश के महत्वपूर्ण व्यक्तियों का कल्याण आश्रम में आगमन

■ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प.पू. श्री गुरूजी 1964 एवं 1965 में।

■ पू. बालासाहब देवरस 1974 एवं 1978 में।

■ पू. रज्जू भैया जी 1995 में।

■ पू. सुदर्शन जी 2001 एंव पूज्य मोहन भागवत जी 2022 में।

■ मा. भैया जी जोशी सरकार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2016 एवं 2020 में।

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ईसाई धर्म प्रचारकों के छल-छड़ा पूर्ण राष्ट्रघाती कार्यों की जाँच करने के उद्देश्य से मध्य प्रांत के मुख्यमंत्री श्री रवि शंकर शुक्ल द्वारा सन 1954 में जस्टिस श्री भवानी शंकर नियोगी की अध्यक्षता में नियोगी आयोग की घोषणा कर दी गयी। प्रश्न था कि कौन हिन्दू पक्ष के तथ्यों को प्रमाण सहित आयोग के सम्मुख प्रस्तुत कर आयोग को तर्क संगत निष्कर्ष तक पहुंचाने में सहयोग करेगा। कल्याण आश्रम ने संघ के प्रचारक कृष्णराव सप्रे एवं श्री भीमसेन चोपड़ा के परिश्रम पूर्ण सहयोग से यह कार्य सम्पन्न किया।

मान सिंह भूरिया जिला संघचालक आश्रम समिति, जिला अध्यक्ष मुन्ना लाल निनामा वनवासी कल्याण परिषद झाबुआ ,जिला संगठन मंत्री गणपत मुनिया , श्यामा ताहेड, मनोज अरोरा ,युवा प्रमुख कल्याण परिषद झाबुआ अल्केश मेड़ा, कांजी भूरिया ,खेम सिंह जमरा प्रदेश सह संयोजक जनजाति सुरक्षा मंच ,कमलेश बिलवाल ,अशोक त्रिवेदी,छगन लाल गामड़ ,बाल सिंह जी मसानिया ,महेश मुजाल्दे आश्रम अध्यक्ष प्रमुख ,सागर बिलवाल श्रद्धा जागरण महेंद्र भूरिया ,दीवान डामोर, जयंत बैरागी, सुनील भट्ट विश्व हिंदू परिषद ,अनिल पोरवाल, श्रीकांत भट्ट ,धनजी मेड़ा, रमन सिंह मेड़ा नरसिंह खोखर ,मुकेश तड़वी,सुनील कामलिया,महेश गामड़ आदि गणमान्य उपस्थित थे।

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