स्काउट गाईड के नाम पर शिक्षक कर रहे है काम चोरी

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@वॉइस ऑफ झाबुआ

ऐसा लगता है जिला प्रशासन को जिले की पडी ही नही है कोई कुछ भी करें उन्हे क्या..? उन्हे तो अब कहां से गांधीछापों की सौगात होगी बस इस ओर ही ध्यान है तभी तो जिले कई ऐसे कामचोर शिक्षक है जो स्कूल में जाने की बजाय अपनी दुकानदारी में ही लगे रहते है क्योंकि इस ओर ध्यान देने वाला ही कोई नही है अब आप स्काउट गाइड की ही बात कर लो..!

जिले भर में स्काउट गाइड के नाम पर शिक्षक अपनी स्कूल तक पहुंचते ही नही है और पहुंचते भी है तो हस्ताक्षर कर कार्यालय में काम है कह कर निकल जाते है और कार्यालय भी नही पहुंचते है और या तो घर में आराम फरमाते है या फिर अपनी दुकानदारी में लगे रहते है जबकि शासन के नियम कुछ ओर ही कहते है… लेकिन नियमों का क्या नियम तो बनाये जाते है उसका धरातल पर कोई मतलब ही नही होता है… ऐसे में ये काम चोर शिक्षक बच्चों के भविष्य से खिलवाड करते देखे जा सकते है। स्काउट गाइड के क्रिया कलापों के लिए भी निर्धारित समय होता है उसके बाद स्काउट संभालने वाले शिक्षकों को अपने कर्तव्य स्थल पर कार्य करना होता है मगर ऐसा कहीं भी नही देखा गया है कि शिक्षक अपने कर्तव्यों को निर्वहन अच्छी तरह से कर रहे हो… बडी बात तो यह भी है की स्काउट गाइड के नाम पर अपनी दुकानदारी चलाने वाले ये शिक्षक स्काउट के बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध करवाते है ही नही है जबकि शासन द्वारा स्काउट गाइड के लिए भी निर्धारित राशि का आवंटन किया जाता हैं। सुना है कि राशि तो आती है मगर कई सामग्री बच्चों से ही मंगवा ली जाती है और शासन द्वारा आवंटित राशि चट कर ली जाती है। अब एक ओर विचारणिय बात यह है कि पूर्व में सेवानिवृत्त हुए शिक्षक जयंत वैरागी का अब स्काउट में क्या काम क्या ये बचपन से ही स्काउट अपनी बपौती में लेकर आये है उन्हे ही जिला प्रशासन द्वारा आगे क्यों किया जाता है जहां हो स्काउट के नाम पर आगे कर दिया जाता हैं ऐसे में जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देते हुए स्काउट गाइड के सही संचालन और शिक्षकों की काम चोरी की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि ये अपने कर्तव्यों का सही तरह से निर्वहन कर सके। लेकिन ऐसा नही लगता है कि इन काम चोरों पर लगाम कसी जायेगी… क्योंकि उपर से लेकर नीचे तक पुरा का पुरा बांस पोला है।

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