बसों के ऊपर बैठकर शाला पहुंचने को मजबूर आदिवासी अंचल के छात्र

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निलेश डावर

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में यातायात व्यवस्था कब दुरुस्त होगी यह सोचने के लिए और इस पर सवाल खड़े करने वाले कोई नही है, जनप्रतिनिधियों को वोटों से मतलब अधिकारी ड्यूटी कर समय निकालने और तनख्वाह से मतलब रखते है, कोई रिस्क लेना नही चाहते है, क्योंकि ईमानदारी से बेखौफ होकर ड्यूटी कोई नही करना चाहता है, सरकार इन आदिवासी बहुल जिलों के विकास के लिए अतिरिक्त फंड देती भी है तो जनप्रतिनिधि और अधिकारी कर्मचारियों को केसे उपयोग करना चाहिए यह नही आता है, और कई बार पैसा लेप्स हो जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में तो अलीराजपुर वैसे ही सबसे पिछड़े जिले में पहले पायदान पर है, मध्यप्रदेश सरकार को जिले में शिक्षा को बढ़ाने के लिए, गरीबी से जिले को मारने के लिए तमाम प्रकार के प्रयास किए जाना चाहिए। लेकिन सरकार योजना तो बनाती है, उसका इमानदारी से क्रियान्वयन नहीं कर पाती है उनके सरकारी मुलाजिम जन जन तक उस योजना का लाभ पहुंचाने में असफल रहते हैं, स्कूलों में शिक्षक नहीं है घर से आने जाने के लिए आवागमन के साधन उपलब्ध नहीं होते हैं, इसलिए मजबूरन छात्रों को बस के ऊपर बैठना पड़ता है, क्योंकि किराया आधा देने की वजह से बस के अंदर फूल किराया देने वालों को बिठाया जाता है, जीप के ऊपर, दोनो साइड लटकना, पीछे लटक के, बोनट पर बैठकर जान को खतरे में डालकर रोज यात्रा करना पड़ता है, प्रशासन चारों तरफ से लदे वाहन के फोटो किसी के द्वारा वायरल होने के बाद गाड़ी वाले पर कार्यवाही करता है गाड़ी को जब्त करता हैं, लेकिन समस्या क्या है वहां तक नहीं पहुंच पाता है। अलीराजपुर जिले को शिक्षित बनाने के लिए पूरा जोर शिक्षा पर दिया जाना चाहिए स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की भर्ती की जाना चाहिए, आवागमन के साधन सरकार को मुहैया कराना चाहिए, लेकिन ऐसा करने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठाना चाहती है, स्थानीय नेता जनप्रतिनिधि सभी यह चाहते हैं कि यह इलाके अशिक्षित रहे और अज्ञान रहे ताकि हम लगातार इनके वोट लेते रहे इन्हें बेवकूफ बनाते रहे और सत्ता पर हम काबीज होते रहे सत्ता की मलाई खाते रहे।

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