शहीद आज़ाद की भूमि पर मुनिश्री का दो दिवसीय व्यायखायन

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ममता को अपनाने वाला दुखी और समता को अपनाने वाला हमेशा सुखी होता है- मुनि निपुणरत्न जी

दिलीपसिह भूरिया चन्द्रशेखर आज़ाद नगर।

आजाद नगर। ममता यानी की संसार से मोह रखने वाला हमेशा दुखी होता है और क्षमता याने की संसार की चीजों को त्याग करने वाला और परमात्मा के गुणों को अपनाने वाला हमेशा सुखी होता है यह शरीर जो मिट्टी का बना है मिट्टी में ही मिल जाना है। इससे मोह रहेगा तो कभी भी इस संसार से और इस जंजाल से मुक्ति नहीं होगी इसके विपरीत यदि परमात्मा से प्रेम किया जाए और उनके सद्गुणों और दिखाएं मार्गो पर चला जाए तो आसानी से परमात्मा को पा कर मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है । यह बात दो दिवसीय व्याख्यान में नगर में पधारे मुनि निपुण रत्न विजय जी महाराज ने अपने मुखारविंद से कहीं।
उन्होंने छोटे छोटे किस्सों से बताया कि किस प्रकार सीधा रास्ता प्रेम का है किसी से दो बोल मिठे बोल लो तो वह खुश हो जाता है।
ममता यानी के मोह को त्यागना आसान नही है तरह तरह सासारिक प्रलोभन इंसान को लुभाते है । परमात्मा का मार्ग एक दवाई है बरसो तक संसार की कड़वी बाते पीने के बाद हो सकता है भक्ति के मार्ग की दवा थोड़ी कड़वी लगे पर यह आगे सुख ही देती है। इसके पहले बुधवार सुबह 8 बजे मुनि निपुण रत्न आदि ठाणा 6 के साथ नगर में पधारे। नगर की सीमा पर जैन समाज द्वारा मुनि श्री का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद नगर में बैंड बाजो के साथ विशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में जगह जगह नगर के लोगो ने मुनि मंडल का गवली एवं चरणवन्दन कर स्वागत किया। अंत मे जुलूस स्थानिय जैन मंदिर पहुचा यहां मंदिर प्रांगण में सैकड़ों लोगों के उपस्थिति में मुनि श्री ने व्याख्यान दिया।

मुस्लिम जमात ने किया सम्मान
गुरुवार को व्याख्यान के पूर्व विधायक सुलोचना रावत, सांसद प्रतिनिधि माधोसिंग डावर, जनपद अध्यक्ष इंदरसिंह डावर, नप उपाघ्यक्ष नारायण अरोड़ा, सकल व्यापारी संघ के अलावा मुस्लिम जमात ने मंच ओर चढ़ कर मुनि श्री का कामली ओढ़ा कर बहुमान किया।
पहले दिन मुनि श्री के सांसारिक मामा बाबुलाजी एवं परिवार ने कामली ओढने का लाभ लिया। इसके बाद गुरुवार दोपहर में मुनि मंडल का गुजरात की ओर विहार हुआ ।

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