चार लाख की लागत से बना सुलभ शौचालय आमजन के लिए नही खुला?

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@अविनाश   गिरी   थांदला

भारत में स्वच्छता की दिशा बदलने का संकल्प लेकर चलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांव हो या शहर हर स्तर पर और व्यवस्था अनुसार सुलभ शौचालय को निर्माण कराकर स्वच्छता का संदेश दे रहे हे,परंतु आज भी कई गांव में स्वच्छता को लेकर जागरूक नही होते है शासकीय पेसो का दुरुपयोग करने में लगे हुए है,तो कही सुलभ सोचलाय बनने के बाद भी पंचायत के जिम्मेदार ध्यान नही देते हुए मेवा खाकर बैठते हुए मोदी के स्वच्छता अभियान को पलीता लगाने में लगे हुए हे।

चार लाख की लागत से बना सुलभ शौचालय आमजन के लिए नही खुला

मोदी सरकार की महत्व पूर्ण प्रकल्प में से एक स्वच्छता अभियान है जो पूरे देश में एक अभियान को लेकर चलाया जा रहा हे जिसमे ग्रामीण जन भी सहयोग कर रहे हे,वही मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की थांदला तहसील के अंतर्गत आने वाली परवलिया पंचायत में मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान को पलीता लगाने में सरपंच,उपसरपंच सहित सचिव बाज नहीं आ रहे हे,परवलिया पंचायत में स्वच्छता बनाए रखने के लिए चौराहे पर सामुदायिक सुलभ शौचालय चार लाख की लागत से आमजन के लिए बनाया गया था,परंतु परवलिया पंचायत के सरपंच,उपसरपंच,सचिव और क्षेत्रीय जन प्रतिनिधि की उदाशीनता और लापरवाही के चलते बीते पंद्रह महीने से सुलभ शौचालय आमजन और राहगीर के लिए नही खुला जिसको लेकर कुछ ग्रामणी जन का पंचायत के प्रति आक्रोश धीमे रूप से दिखाई दे रहा है।

सुलभ शौचालय पंद्रह महीने से बंद होने के चलते लोगों में पनप रहा आक्रोश

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने के उद्देश्य को लेकर पंद्रह महीने पहले चौराहे पर सुलभ शौचालय बनवाया गया था,लेकिन वर्तमान में सुलभ शौचालय बंद होने की वजह से लोगों को शौच के लिए खाली पड़े प्लाट,या इधर उधर जाना पड़ता है,ऐसे में एक तरफ जहां गंदगी फैल रही है,वहीं दूसरी ओर बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है,एक साल से बंद पड़े शौचालय को लेकर लोगो का आक्रोश पंचायत के खिलाफ साफ देखने को मिल रहा हे।

बुजुर्ग और महिलाएं होती हे परेशान

गांव में जहा सुलभ शौचालय बना हे वहा पर आए दिन ट्रेफिक बना रहता है,ऐसे में यात्री हो या राहगीर हो दोनो के लिए मुसीबत का सामना करना पड़ता है,व्यवस्था होने के बाद भी राहगीर को रोड की साइड में जाना पड़ता हे,पंचायत की उदाशीनता राहगीर पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है,परवलिया पंचायत में पंद्रह महीने से बंद पड़े सुलभ शौचालय से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और महिलाओं को होती हे,परंतु राहगीर और महिलाओं की समस्या स्थानीय पंचायत को नजर नहीं आ रही हे,इसी वजह से अपनी वाहवाही लूटने की दौड़ होने की वजह से अब तक सुलभ शौचालय का शुभारंभ नहीं हो सका है।

खुशाल की ग्रामीण सरकार नही कर पा रही जनता की सेवा

आजकल की भारतीय राजनीति में नेताओ की जनता के प्रति सेवा कम और मेवा का भाव ज्यादा होता हे उसी हिसाब से जनता के लिए कार्य करते हे,पंच से लेकर विधायक सांसद तक आजकल इसी कम सेवा के बदले ज्यादा मेवा खाने के चक्कर में लगे हुए हे भले ही उस अभियान या योजना का लाभ आमजन को मिले या नही,शासन की हर योजना में नेता,जनप्रतिनिधि या कर्मचारी अधिकारी का भी एक रेशों तय होता हे,कुछ ऐसा ही नजारा शायद परवलिया की पंचायत में सुलभ शौचालय को लेकर देख जा रहा है,लगभग चार लाख की लागत से बने आमजन के लिए बनाए गए सुलभ शौचालय पिछले पंद्रह महीने से बंद पड़ा है,जिससे आमजन को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है,गांव के सरपंच खुशाल सिंगाड,उपसरपंच पुरण पाटीदार और सचिव संतोष माली और पंच भी बंद पड़े सुलभ शौचालय को आज तक नही खुलवा पा रहे है,कारण क्या हे ये तो वोही जाने परंतु पंचायत की हठधर्मिता के कारण आमजन और राहगीर की समस्या जस के तस ही दिखाई दे रही हैं।वही उपसरपंच पुरण पाटीदार से सुलभ शौचालय की जानकारी लेना चाही तो उन्होंने कहा की कोनसा सुलभ शौचालय?मतलब साफ हे की गांव के उपसरपंच गांव की स्थिति से अभी अनजान है।

क्या बोले जिम्मेदार

मामले को लेकर जब मंत्री से बात करना चाही तो उनका कहना था की अभी साफ सफाई करवाई है,जल्द ही खोल देंगे।

संतोष माली
मंत्री परवलिया।

वही मामले को लेकर गांव के उप सरपंच से बात करना चाही तो उनका कहना था की फिटिंग बाकी हे,और मंत्री से बात करने का बोल दिया।

पुरण पाटीदार
उप सरपंच परवलिया।

मामले को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष से बात की गई तो उनके द्वारा कहा गया आपके द्वारा मुझे इन बातों से अवगत करवाया गया है अगर इस प्रकार की स्थितियां बनी हुई है तो सरासर गलत है शासन की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचना चाहिए यदि अगर ऐसा है तो मेरे द्वारा इसकी जांच करवाई जाएगी अगर ऐसा है तो मैं इसकी निंदा करता हूं मेरे द्वारा जिला प्रशासन को भी अवगत करवाया जाएगा।

सोनल भाभर
जिला पंचायत अध्यक्ष झाबुआ।

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